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शकरपुर अग्निकांड : अचानक दम घुटने लगा तो नींद टूटी, बालकनी से चिल्लाकर लगाई जान बचाने की गुहार
Wed, 15 Nov 2023 05:29 AM IST
दुष्यंत शर्मा
शुजात आलम, नई दिल्ली
शुजात आलम, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Wed, 15 Nov 2023 05:29 AM IST
सार
अचानक दम घुटने लगा तो नींद टूटी। बालकनी पर आते ही सारा माजरा समझ आ गया। लोगों ने फ्लैट का दरवाजा खोलकर छत या नीचे जाने की कोशिश की तो तेज गर्मी और धुएं ने रोक दिया।
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जांच में जुटी पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
गणेश नगर-2 की चारमंजिला इमारत में रहने वाले आठ परिवार गहरी नींद में थे। अचानक दम घुटने लगा तो नींद टूटी। बालकनी पर आते ही सारा माजरा समझ आ गया। लोगों ने फ्लैट का दरवाजा खोलकर छत या नीचे जाने की कोशिश की तो तेज गर्मी और धुएं ने रोक दिया। दरवाजा खोलते ही फ्लैट में धुंआ भर गया। फौरन लोगों ने दरवाजा बंदकर बालकनी में आने में ही भलाई समझी।
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बीएसएफ से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने वाले पूर्व हवलदार देव सिंह अधिकारी (55) ने बताया कि चौथी मंजिल (दायीं ओर) पर रहते हैं। परिवार में पत्नी नीमा अधिकारी, बेटी भावना (29), बेटा आशीष (23) है। आग लगी तो बेटे को छोड़कर पूरा परिवार सो रहा था। बेटा लैपटॉप पर काम कर रहा था। आग की वजह से वह फ्लैट में ही फंस गए। बालकनी के रास्ते दमकल कर्मियों ने उन्हें बचाया।
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हादसे में जान गंवाने वाली अनीता अपनी भाभी वीना (50) और वीना के बेटे पीयूष (23) के साथ चौथी मंजिल (बायीं ओर) पर रहती थीं। अनीता अविवाहित थीं। पीयूष फोटोग्राफर है। आग लगी तो इन लोगों ने फ्लैट में ताला लगातार निकलने का प्रयास किया, लेकिन बाहर ही गिर गए। बाद में जब तीनों को रेस्क्यू कराया गया तो अनीता की मौत हो चुकी थी।
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फिलहाल, पीयूष का जीटीबी और वीना का आरएमएल अस्पताल में इलाज जारी है। तीसरी मंजिल पर सीए अशोक कुमार गुप्ता (बायीं ओर) रहते थे। उनका परिवार सुरक्षित निकल गया। तीसरी मंजिल के दायीं ओर वाले फ्लैट वाला परिवार भी सुरक्षित निकल गया। दूसरी मंजिल (बायीं ओर) पर देवेंद्र माथुर (52) का परिवार रहता है।
परिवार में पत्नी श्वेता (50), बेटा ऋतिक (27) और बेटी कोमल (30) है। परिवार का गांधी नगर में कपड़ों का कारोबार है। रात करीब 12:15 बजे ऋतिक घर लौटा तो सब ठीक था। एक बजे उसकी आंख खुली तो आग लग चुकी थी। परिवार सुबह तक बालकनी में फंसा रहा। सभी को दमकल कर्मियों ने बचाया।
बेड पर बैठकर परिवार कर रहा था मौत का इंतजार
हादसे में कमल तिवारी और परिवार की हालत बेहद नाजुक है। परिवार में पत्नी प्रियंका और बच्चे शौर्य व शिवाय हैं। कमल और प्रियंका दोनों ही कोचिंग संस्थान में पढ़ाते हैं। रिश्तेदार संजय ने बताया कि आग के समय बाहर निकलने का रास्ता पूरी तरह बंद था। ऐसे में परिवार ने खुद को एक कमरे में बंद कर लिया। बेड पर बैठकर परिवार बस मौत का इंतजार कर रहा था।
इस बीच शौर्य ने कहा कि क्यों न कूदकर जान बचाने का प्रयास करें। इसके बाद ही कमल व प्रियंका ने एक-एक कर बच्चों को नीचे फेंका। बाद में खुद भी छलांग लगा दी। हादसे के बाद प्रियंका को आरएमएल के आईसीयू और तीनों को कैलाश अस्पताल कड़कड़डूमा के आईसीयू में भर्ती कराया गया है। संजय ने बताया कि अभी धनतेरस वाले दिन ही परिवार ने टाटा पंच गाड़ी खरीदी थी। आग से वह भी पूरी तरह जल गई।
पहली मंजिल से बुजुर्ग व युवती ने लगाई छलांग
दमे के मरीज नरेश कुमार (62) परिवार के साथ पहली मंजिल (बायीं) ओर रहते हैं। परिवार में पत्नी मधुबाला व अन्य हैं। परिवार किराये पर यहां रहता है। आग लगी तो जान बचाने के लिए नरेश ने पहली मंजिल से छलांग लगा दी। बाकी परिवार को खिड़की का जाल तोड़कर निकाला गया। पहली मंजिल के दूसरे फ्लैट में सुप्रभा देवी (55) परिवार के साथ किराये पर रहती हैं।
परिवार में पति प्रकाश कुमार, बेटी शिवानी (26) और बेटा हर्षवर्धन हैं। हादसे के समय बेटी नाइट शिफ्ट में वर्कफ्रॉम होम काम कर रही थी। आग लगी तो बेटी ने जान बचाने के लिए पहली मंजिल से नीचे छलांग लगा दी। इससे उसका हाथ टूट गया। कुछ समय पूर्व ही शिवानी की सगाई हुई थी। बाकी परिजनों को पड़ोसियों ने सीढ़ी लगाकर बाहर निकाल लिया।