फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   seven-year-old girl dies in Loknayak Hospital due to disease called MPS-1

दुर्लभ रोग पर सिस्टम से लड़ रही बेबी इन्सा हारी जिंदगी की जंग, आनुवांशिक रोग से पीड़ित थी मासूम

Thu, 04 Jul 2019 07:44 AM IST
Vikas Kumar परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Thu, 04 Jul 2019 07:44 AM IST
विज्ञापन
seven-year-old girl dies in Loknayak Hospital due to disease called MPS-1
बेबी इंसा - फोटो : अमर उजाला

बिस्तर पर लेटे हर पल बीमारी की तड़प और शरीर के एक-एक अंग का साथ छोड़ना। इलाज होने के बाद भी डॉक्टर, नर्स और परिजन हर कोई पीड़ा को समझ रहा था। मगर अफसोस सालाना करोड़ों रुपये का इलाज होने के कारण सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था मूकदर्शक थी। मासूम बिटिया का बेबस पिता उसकी जिंदगी के लिए पिछले सात साल में न जानें कितने दरवाजे खटखटाए, अफसरों से मिन्नतें भी कीं लेकिन बदले में बुधवार को उसे अपनी मासूम का जनाजा ही नसीब हुआ।  

विज्ञापन


दिल्ली के लोकनायक अस्पताल से चली बेबी इन्सा की फाइल कभी दिल्ली स्वास्थ्य विभाग, स्वास्थ्य मंत्रालय के अलावा दिल्ली हाईकोर्ट तक पहुंची। कई सामाजिक संगठन भी ओखला निवासी पिता साजिद के हक में खड़े हुए लेकिन इन्सा की मौत की खबर चंद घंटों में ही लोकनायक अस्पताल से लेकर स्वास्थ्य महकमे, एम्स और हाईकोर्ट तक जा पहुंची। हर कोई स्तब्ध था, आंखें नम थी और सिस्टम के खिलाफ गुस्सा। संक्रमण फैलने के चलते इन्सा ने दम तोड़ दिया। 
विज्ञापन


साल 2014 में मोहम्मद अहमद नामक एक मरीज की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा था कि अगर कोई मरीज ऐसी बीमारी से लड़ रहा है, जिसका इलाज संभव है तो उसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी। इसी कानून के तहत अब बेबी इन्सा के पिता साजिद उन लाखों बच्चों की जिंदगी की भीख मांग रहा है जिनके माता पिता हर दिन अपने कलेजे के टुकड़ों की मौत को अपनी चौखट से भगाने में लगे हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन

 

इस बीमारी का दंश झेल रही थी इन्सा

डॉक्टरों के अनुसार, सात वर्षीय इन्सा एमपीएस-1 नामक दुर्लभ रोग से ग्रस्त थी। यह बीमारी दुनिया के उन 45 दुर्लभ रोगों में से एक है जिन्हें लाइसोसोमल स्टोरेज डिसऑर्डर (एलएसडी) कहा जाता है। दुनिया में करीब 5 हजार बच्चों में से किसी एक को यह दंश झेलना पड़ता है। इस रोग का उपचार संभव है, लेकिन सालाना करीब डेढ़ करोड़ रुपये तक का खर्चा आता है। इस समय भारत में करीब 300 से 400 मरीज इस बीमारी से लड़ रहे हैं। भारत में इसके उपचार के लिए करीब 8 से 10 एक्सीलेंस चिकित्सीय संस्थान भी मौजूद हैं। इसके अलावा रोग की जांच भी संभव है। बावजूद इस बीमारी से ग्रस्त ये मरीज महंगा उपचार होने के कारण पीड़ा झेल रहे हैं। 

सैकड़ों बार अस्पताल में हुई भर्ती
आनुवांशिक रोग होने के कारण इन्सा अक्सर ही बीमार रहती थी। उसे हर बार लोकनायक अस्पताल भर्ती करना पड़ता था। पिता साजिद के अनुसार दुलर्भ रोग को लेकर उसे कभी उपचार नहीं मिल सका, लेकिन लोकनायक अस्पताल में बाकी परेशानियों को लेकर इलाज जरूर मिल जाता था। सात साल में वे उसे लेकर सैकड़ों बार अस्पताल में भर्ती करा चुके थे। 

 

सामाजिक संस्थाओं से बढ़ा था हौसला 

इन्सा की जिंदगी के लिए जब साजिद जगह जगह की ठोकर खाने लगे तो कई सामाजिक संस्थाओं से उनका संपर्क हुआ, जिनमें से कुछ ने इन्सा की मदद आखिरी सांस तक की। अस्पताल से दिल्ली स्वास्थ्य विभाग और वहां से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय होते हुए ये लोग एम्स तक पहुंचे, लेकिन हर बार मुद्दा था उपचार की राशि का।

हाईकोर्ट में पहुंची आवाज तो बदली पॉलिसी
एडवोकेट अशोक अग्रवाल बताते हैं कि बेबी इन्सा की याचिका दिल्ली हाईकोर्ट में दायर करने के बाद कोर्ट के नोटिस के जवाब में सरकार ने कहा था कि बीपीएल परिवार को ही चिकित्सीय मदद दी जा सकती है। इस पर सवाल खड़े हुए तो सरकार ने बीपीएल और एपीएल परिवारों की मदद के लिए दोबारा रेयर डिजीज पॉलिसी बनाने का हवाला दिया। मामला अभी भी कोर्ट में विचाराधीन है।  

दिल्ली नहीं कर सकता था मदद, तभी भेजा केंद्र
दिल्ली स्वास्थ्य विभाग के एक बड़े अधिकारी कहते हैं कि बेबी इन्सा के बारे में विभाग के सभी कर्मचारियों को जानकारी है, लेकिन महंगा उपचार होने के कारण ये उनके हस्तक्षेप से बाहर था। लिहाजा मामले को स्वास्थ्य मंत्रालय उन्हें भेजा गया था। वहां से एम्स में इलाज कराने की स्वीकृति भी इन्हें मिल गई थी। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed