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दिल्ली में कल से सीरो सर्वे का दूसरा चरण, 100 से ज्यादा टीमें 20 हजार से अधिक लोगों का करेंगी टेस्ट
Fri, 31 Jul 2020 02:40 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Fri, 31 Jul 2020 02:40 AM IST
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- फोटो : PTI
कोरोना संक्रमण के फैलाव के स्तर का पता लगाने के लिए राजधानी में शनिवार से सीरो सर्वे का दूसरा चरण शुरू किया जाएगा। इसमें स्वास्थ्य विभाग के दिशा-निर्देशों पर 100 से ज्यादा टीमें 20 हजार से अधिक लोगों के ब्लड सैंपल लेगी।
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यह सर्वे एक अगस्त से 5 अगस्त के बीच किया जाएगा। इससे यह जानने की कोशिश की जाएगी कि दिल्ली में अब कितने फीसदी लोगों में कोरोना संक्रमण के खिलाफ एंटीबॉडी बन गई है। साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि क्या राजधानी हर्ड इम्युनिटी की ओर बढ़ रही है या नहीं।
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स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि सर्वे के परिणाम 15 अगस्त तक आने की संभावना है। जिन लोगों के सैंपल पहले सर्वे में लिए गए थे, इस बार उनके सैंपल नहीं लिए जाएंगे। अभी सर्वे को लेकर दिशा-निर्देश मिलने बाकी है। किस जिले से कितने सैंपल लिए जाने हैं। ये वहां की आबादी के हिसाब से तय किया जाएगा। हर जिले से औसतन 2 हजार सैंपल लेने की कोशिश की जाएगी। सीरोलॉजी टेस्ट में उन लोगों को ही शामिल किया जाएगा, जिनमें कोई लक्षण नहीं हैं। इसमें अलग-अलग उम्र व इलाके के लोगों के बल्ड सैंपल लिए जाएंगे।
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क्या होंगे सर्वे के फायदे
सर्वे से यह पता लगेगा है कि संक्रमण कम्युनिटी में अब कितना फैला है। क्या पहले के मुकाबले अब अधिक लोगों में कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडी बन गई है। यह सर्वे नोडल अधिकारी की देखरेख में किया जाएगा। सभी इलाकों में आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता लोगों से उनके विषय में जानकारी लेंगी और उनके ब्लड सैंपल लिए जाएंगे। एक तरह का रैंडम सर्वे होगा।
इससे पहले 27 जून से 10 जुलाई के बीच सीरो सर्वे किया गया था,जिसमें राजधानी के करीब 23 प्रतिशत लोग कोविड-19 से प्रभावित मिले थे। यानी,एक चौथाई लोगों में एंटीबॉडी विकसित होने की बात सामने आई थी। इसका मतलब था कि वे संक्रमित हुए और ठीक हो गए। जिन लोगों के नमूने लिए गए थे, उनमें से अधिकतर लोगों को नहीं पता था कि वे संक्रमित थे। इसके बाद दिल्ली सरकार ने फैसला किया था कि लोगों में एंटीब़ॉडी का स्तर पता लगाने के लिए अब हर महीने सीरो सर्वे होगा। इससे पता चल सकेगा कि अब कितने फीसदी लोगों में संक्रमण के खिलाफ एंटीबॉडी बन रही है। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि दिल्ली हर्ड इम्युनिटी की तरफ कितना बढ़ रही है।
50 से 70 फीसदी लोगों में एंटीबॉडी बनने पर संक्रमण की गति हो जाएगी कम
सफदजंग के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के डॉक्टर जुगल किशोर के मुताबिक, पहले सर्वे में 23 फीसदी लोगों में वायरस से लड़ने के खिलाफ एंटीबॉडी मिली थी। जो एक राहत की बात है। उन्होंने कहा कि अगर किसी क्षेत्र में 50 फीसदी से अधिक लोगों में एंटीबॉडी मिलते हैं तो यह खतरा कम कर देने वाला होगा। ऐसी स्थिति में कोरोना संक्रमण के मामले कम हो जाएंगे। अगर लगभग हर दूसरे व्यक्ति में एंटीबॉडी होंगे तो कोरोना का प्रसार बहुत कम हो जायेगा,लेकिन यह कहना गलत होगा कि 50 फीसदी से अधिक लोगों में एंटीबॉडी मिल गए तो संक्रमण बिलकुल रुक जाएगा।
आधे लोगों के इम्यून होने पर तेजी से नहीं फैलेगा वायरस
एम्स के पूर्व डॉक्टर पीके सिंघल कहते हैं कि दिल्ली की 50 से 60 प्रतिशत आबादी कोरोना वायरस से संक्रमित होकर ठीक हो जाए, यानी उनमें एंटीबॉडी बन जाए, भले ही संक्रमण के दौरान उनमें हल्के या ना के बराबर लक्षण हों, तो बाक़ी की 40 से 50 प्रतिशत आबादी को भी कोरोना से सुरक्षा मिल जाएगी। डॉक्टर नवल के मुताबिक, 50 दे 60 फीसदी लोगों को तो कोरोना संक्रमण होगा नहीं क्योंकि उनके अंदर वायरस से लड़ने के लिए एंटीबॉडी विकसित हो चुके होंगे ,लेकिन बची हुई आबादी को कोरोना का खतरा होगा लेकिन आधे लोगों के इम्यून होने की वजह से यह तेजी से नहीं फैलेगा।
आधे लोगों के इम्यून होने पर तेजी से नहीं फैलेगा वायरस
एम्स के पूर्व डॉक्टर पीके सिंघल कहते हैं कि दिल्ली की 50 से 60 प्रतिशत आबादी कोरोना वायरस से संक्रमित होकर ठीक हो जाए, यानी उनमें एंटीबॉडी बन जाए, भले ही संक्रमण के दौरान उनमें हल्के या ना के बराबर लक्षण हों, तो बाक़ी की 40 से 50 प्रतिशत आबादी को भी कोरोना से सुरक्षा मिल जाएगी। डॉक्टर नवल के मुताबिक, 50 दे 60 फीसदी लोगों को तो कोरोना संक्रमण होगा नहीं क्योंकि उनके अंदर वायरस से लड़ने के लिए एंटीबॉडी विकसित हो चुके होंगे ,लेकिन बची हुई आबादी को कोरोना का खतरा होगा लेकिन आधे लोगों के इम्यून होने की वजह से यह तेजी से नहीं फैलेगा।