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अमर उजाला अभियान: कोरोना को चित कर विद्यार्थी चल पड़े स्कूल, रखा जा रहा इन बंदिशों का ध्यान
Tue, 22 Mar 2022 06:02 AM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Vikas Kumar
Updated Tue, 22 Mar 2022 06:02 AM IST
सार
वैश्विक महामारी कोरोना के चलते मध्य मार्च 2020 से शिक्षण संस्थान बंद हुए थे। दिल्ली में फरवरी 2021 से सरकारी से लेकर निजी स्कूल खोलने की अनुमति दी गई थी। इसके बाद भी फरवरी से मध्य मार्च तक स्कूलों में हाजिरी 30 से 40 फीसदी तक ही पहुंच पाई।
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स्कूल से बाहर निकलते बच्चे
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
देश की राजधानी दिल्ली में महामारी के दो साल बाद फरवरी से स्कूल खुल गए हैं। स्कूल प्रबंधन सामाजिक दूरी के साथ छात्रों का स्वागत भी कर रहे है पर फिर भी हाजिरी 30 फीसदी तक नहीं पहुंच पायी है। इसका सबसे बड़ा स्कूल बस की सुविधा न होना है। इसके अलावादिल्ली में अभी तक आठवीं कक्षा तक हाइब्रिड मोड से पढ़ाई का विकल्प था। इसलिए अधिकतर अभिभावकों ने इन दिक्कतों और कोरोना के डर से बच्चों को स्कूल भेजने की पहल नहीं की है।
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वैश्विक महामारी कोरोना के चलते मध्य मार्च 2020 से शिक्षण संस्थान बंद हुए थे। दिल्ली में फरवरी 2021 से सरकारी से लेकर निजी स्कूल खोलने की अनुमति दी गई थी। इसके बाद भी फरवरी से मध्य मार्च तक स्कूलों में हाजिरी 30 से 40 फीसदी तक ही पहुंच पाई। अभिभावकों ने हाईब्रिड का विकल्प मिलने के चलते अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजा। दरअसल, सभी प्रकार की परीक्षा से लेकर टेस्ट ऑनलाइन ही आयोजित हो रहे थे। इसका अलावा परिवहन सबसे बड़ा कारण हाजिरी कम होने का कारण रहा। स्कूल में छात्र मॉस्क के साथ पढ़ाई करते हैं। खेलकूद आदि सभी गतिविधियां बंद हैं। इसके अलावा टिफिन शेयर करने की भी मनाही है। सुबह की प्रार्थना ग्राउंड की बजाय क्लासरूम में सीट पर खड़े-खड़े होती है।
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ऑनलाइन एक्टिविटी से जोड़ रहे
बेशक हाईब्रिड मोड से पढ़ाई चल रही है पर अधिकतर स्कूल ऑनलाइन एक्टिविटी से छात्रों को पढ़ाई से जोड़ने पर काम कर रहे हैं। इसके अलावा पेरेंट्स को ऑनलाइन एक्टिविटी और काउंसलिंग से जागरूक कर रहे हैं। इसका मकसद, अभिभावकों और छात्रों के मन में स्कूल में कोरोना संक्रमित होने से लेकर अन्य डर को निकाला जा सके। इसके अलावा क्लासरूम में गेम्स, क्विज आदि के माध्यम से उन्हें मानसिक रूप से तैयार किया जा रहा है।
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नंबर गेम
- दिल्ली में कुल स्कूल 2500 हैं।
- दिल्ली शिक्षा निदेशालय के अधीनस्थ 1723 स्कूल हैं।
- नगर निगम और एनडीएमसी के पास करीब 800 स्कूल हैं।
- सभी स्कूलों में नर्सरी में करीब डेढ़ लाख सीट हैं।
- निजी स्कूलों में करीब 18 लाख से अधिक छात्र पढ़ते हैं।
- दक्षिणी दिल्ली के प्राथमिक विद्यालयों में 93696 बच्चों ने दाखिला लिया है। जबकि उत्तरी निगम के स्कूलों में 84120 छात्र पंजीकृत हैं। वहीं, पूर्वी दिल्ली नगर निगम के प्राथमिक विद्यालयों में 40 हजार से अधिक छात्रों ने दाखिला ले रखा है।
ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था न होने से हाजिरी 30 फीसदी भी नहीं पहुंची
दिल्ली में स्कूल खुलने के बाद भी हाजिरी 30 फीसदी तक नहीं पहुंच पाई। जबकि स्कूल छात्रों का सामाजिक दूरी का पालन करते हुए स्वागत को तैयार थे। इसका सबसे बड़ा ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था न होना था। नौकरीपेशा अभिभावक अपने बच्चों को खुद स्कूल छोड़ने और लाने नहीं जा सकते थे। ऐसे में जब दिल्ली में आठवीं कक्षा तक के छात्रों के लिए हाईब्रिड मोड से पढ़ाई का विकल्प था तो वे ऑनलाइन पढ़ाई को चुनें। अब एक अप्रैल से स्कूल दोबारा पूरी तरह से खुलेंगे, लेकिन तब भी ट्रांसपोर्ट यानी स्कूल बस की सुविधा पर ध्यान देना जरूरी होगा। इसकी पहले तैयारी करनी होगी। मेरा मानना है कि अब सभी बच्चों को स्कूल भेजना जरूरी है। इसके लिए सभी को मिलकर तैयारी करनी होगी। -सुमित वोहरा, संस्थापक, एडमिशन नर्सरी डॉट कॉम, दिल्ली।
ऑनलाइन ओरिएंटेशन के चलते अभिभावकों ने जताया भरोसा
फरवरी में जब आठवीं कक्षा तक के छात्रों को स्कूल बुलाने का फैसला लिया तो उससे पहले ऑनलाइन अभिभावकों का ओरिएंटेशन करवाया गया। इसमें उन्हें स्कूल खोलना और बच्चों को स्कूल आने क्यों जरूरी है पर काउंसलिंग की गई। स्कूल बस उपलब्ध नहीं है फिर भी अभिभावक तैयार हुए और पहली से आठवीं कक्षाओं में करीब 85 फीसदी हाजिरी रही। जबकि 9वीं से 12वीं कक्षा में यह हाजिरी 100 फीसदी है। पहली से 12वीं कक्षा के इन सभी छात्रों ने स्कूल में आकर लिखित परीक्षा दी है। इसका सारा श्रेय टीचर को जाता है। दरअसल हमने एक भी शिक्षक को नौकरी से नहीं हटाया। वे लगातार डांस, योग समेत अन्य एक्टिविटी से छात्रों के साथ जुड़े रहें।
-पूनम गुप्ता, प्रिंसिपल, बीजीएस इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल, द्वारका, सेक्टर -5
हाजिरी आठ से 15 फीसदी तक रही
पहली से तीसरी कक्षा तक आठ से 10 फीसदी ही छात्र स्कूल आएं। जबकि बड़ी कक्षाओं में यह उपस्थिति 10 से 15 फीसदी तक रही। धीरे-धीरे अभिभावक भी सामाजिक दूरी आदि का पालन करने के चलते बच्चों को भेजने में सहमति दे रहे हैं। उम्मीद है कि एक अप्रैल से नया सत्र शुरू होने से इसमें बढ़ोतरी होगी। - एलवी सहगल, प्रिंसिपल बाल भारती स्कूल, पूसा रोड।