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दिल्ली हिंसाः शिव विहार में स्कूल सील, 1400 बच्चों का भविष्य अधर में

Mon, 09 Mar 2020 05:59 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली  
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली   Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 09 Mar 2020 05:59 AM IST
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School sealed in shiv vihar 1400 children's future in unsure
स्कूल सील किया - फोटो : अमर उजाला

शिव विहार तिराहे के पास बाबू नगर स्थित निजी राजधानी स्कूल को पुलिस के छानबीन के लिए सील करने के बाद यहां पढ़ने वाले 1400 बच्चों का भविष्य अधर में है। प्रबंधन ने रविवार को मीडिया के सामने इसे लेकर चिंता जताई।

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प्रबंधक फारुक अहमद ने बताया कि 12 मार्च से स्कूल में छठी से 11वीं तक के छात्रों की परीक्षाएं होनी थीं। दंगाइयों ने इसका इस्तेमाल किया था। इस कारण पुलिस ने स्कूल को सील कर दिया है। उन्होंने कहा कि स्कूल में दोनों समुदायों के बच्चे पढ़ते हैं। इसके सील होने से उनकी पढ़ाई पर सीधा असर पड़ रहा है। 
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उधर, स्कूल के वाइस चेयरमैन सदफ फैसल ने कहा कि स्कूल के बारे में बहुत से लोग भ्रम फैला रहे हैं। उन्होंने कहा कि 24 फरवरी को स्कूल दोपहर दो बजे बंद हो गया था। इसके बाद 500 से अधिक दंगाइयों ने स्कूल को अड्डा बना लिया था। प्रबंधन पुलिस व प्रशासन से स्कूल खोलने के लिए कह रहा है। 
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गौरतलब है कि हिंसा के बाद पुलिस को कई वीडियो मिले थे, जिनमें दंगाई इस स्कूल से हमला करते दिख रहे हैं। पुलिस ने छानबीन के लिए मालिक को हिरासत में लेकर स्कूल को सील कर दिया था।
 

पुलिस पर जाफराबाद इलाके में एकतरफा कार्रवाई का आरोप

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंसा के मामले में समुदाय विशेष के लोग पुलिस पर एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगा रहे हैं। उनका कहना है कि पुलिस केवल एक समुदाय को निशाना बना रही है, जबकि दंगाइयों का कोई जाति-धर्म नहीं होता। पुलिस ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा है कि बगैर पुख्ता सबूत के किसी पर भी कार्रवाई नहीं हो रही है।

ओखला से आप विधायक अमानतुल्लाह खान का आरोप है कि हिंसा के बाद पुलिस की ओर से जारी कार्रवाई से कई सवाल उठ रहे हैैं। हिंसा में अब तक 2193 लोगों को हिरासत में लिया गया है। इनमें सबसे अधिक एक ही समुदाय के लोग हैं। इससे प्रतीत होता है कि पुलिस एकतरफा कार्रवाई कर रही है। 

हिंसा में दोनों समुदाय का नुकसान हुआ है। इसमें सैकड़ों दंगाई शामिल थेे। पुलिस के पास कुछ इलाकों का सीसीटीवी फुटेज भी है, जिसमें कई लोगों के नाम सामने आए हैं। जाफराबाद के लोगों का आरोप है कि पुलिस घरों से बाहर किसी काम से जा रहे युवकों को भी पूछताछ के नाम पर उठा ले रही हैै। हिरासत में लिए गए लोग दोषी हैं तो उन्हें कोर्ट के सामने क्यों नहीं पेश किया जा रहा है।

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