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SC के जज ने पार्क की बदहाली पर लिखी चिट्ठी
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 16 Apr 2014 07:49 PM IST
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राजधानी में एक भी ऐसा सुरक्षित पार्क नहीं है जहां बच्चें खेल सके। इतना ही नहीं दिल्ली की नाक कहे जाने वाले इंडिया गेट व सरोजनी नगर स्थित चिल्ड्रन पार्क की भी हालत भी खस्ता है। इसी मुद्दे पर सर्वोच्च न्यायालय के जज ने पार्कों की ऐसी हालत पर चिंता जताते हुए हाईकोर्ट के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिख डाला। हाईकोर्ट ने पत्र पर कार्रवाई करते हुए दिल्ली सरकार, डीडीए व एनडीएमसी से जवाब तलब किया है।
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कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश बीडी अहमद व न्यायमूर्ति सिद्घार्थ मृदुल की खंडपीठ ने सर्वोच्च न्यायालय के जज के पत्र पर संज्ञान लेते हुए इस जनहित याचिका में तब्दील कर दिया। अदालत ने कहा कि राजधानी में बच्चों के खेलने के लिए उचित पार्क न होना बच्चों के मानवाधिकार का उल्लंघन है।
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खंडपीठ ने एनडीएमसी को उक्त दोनों पार्कों में तुरंत मरम्मत का काम करने का निर्देश देते हुए कहा कि इसके अलावा भी उनके अधिकार क्षेत्र के पार्को का रख-रखाव उचित तरीके से किया जाए। इतना ही नहीं सभी पार्को में बच्चों के खेलने, झूलने के लिए झूले, झील इत्यादि की उचित व्यवस्था की जाए।
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इसके अलावा खंडपीठ ने केंद्र, दिल्ली सरकार, डीडीए, पीडब्ल्यूडी, एमसीडी को नेटिस जारी कर सभी पार्को की रिपोर्ट तलब की है। अदालत ने साथ ही राजधानी के सभी पार्कों के संबंध में फोटो सहित विस्तृत रिपोर्ट 7 मई तक पेश करने का निर्देश दिया है। खंडपीठ ने कहा यह काफी गंभीर मामला है और सरकार को स्वयं इस मामले में ध्यान देना चाहिए था।
हाईकोर्ट को यह पत्र सर्वोच्च न्यायालय के जज कुरियन जोसफ ने लिखा है। उन्होंने कहा कि वे पिछले दिनों इंडिया गेट स्थित चिल्ड्रन पार्क में गए तो पाया कि अधिकांश झूले टूटे पड़े है और पार्क में जगह-जगह खड्डे बने हुए है, जिससे बच्चों को चोट लग रही है। उन्हें यह देख कर भी काफी दुख हुआ कि कई बच्चे घायल हो चुके थे लेकिन उनको देखने के लिए कोई भी कर्मचारी नियुक्त नहीं है।
इसी प्रकार सरोजनी नगर स्थित लक्ष्मी बाई नगर में बने पार्क की भी यही स्थिति थी। पार्क में न तो कोई झील बनाई गई है न ही बैठने की उचित व्यवस्था। आखिर बच्चे कहां व किस प्रकार खेले। यह सरासर बच्चों को मिले मानवाधिकार का उल्लंधन है अत: वे आशा करते है कि इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।