सुर का राजकुमार भटक रहा है तंग गलियों में
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कस्बे के बाजार के पीछे कच्चे, गड्डेढार सड़कों का एक लंबा सिलसिला है। इसका एक छोर हरिजन बस्ती की संकरी गलियों को छूता है। इसकी नियमति सफाई नहीं होने से गलियों में प्रवेश करते ही तबियत भिन्ना उठती है। इसके बीच होता हुआ काफी अंदर तक जाने पर नालियों के किनारे बनियान और छींटदार कच्छे में खड़े एक बालक के साथ चल रहे मनीष आहूजा ने अमर उजाला संवाददाता से परिचय कराया- मिलिए सलमान अली से।
यह सुनकर सहसा विश्वास नहीं हुआ। सामने वही सलमान खड़ा था, जिसने 2011 में देश के चुनिंदा बाल गायकों को पछाड़ कर इंडियन आयडल चैंपियन बना था। इसकी सुरीली गायकी सुनने के लिए लोग घंटों टीवी सेट के आगे बैठे रहते थे। उसने खुद बताया कि इंडियन आयडल जीतकर जब पहली बार मेवात में कदम रखा था तो लोगों ने हाथों हाथ उठा लिया था। पुन्हाना में स्टेज लगाकर उसका भव्य स्वागत किया गया था।
टीवी पर कार्यक्रम आने का मेवात के लोग ब्रेसब्री से इंतजार करते थे, लेकिन चमचमाते कपड़ों में सजा धजा दिखने वाला सलमान जैसे खो गया है। पिछले एक साल से इन गंदी संकरी गलियों से बाहर नहीं निकल पाया है। पहले कैलाश खेर नियमित फोन पर खैरियत लिया करते थे, अब उनसे भी बातचीत नहीं होती। उन्होंने फोन करना बंद कर दिया है।
सलमान संवाददाता को अपने घर ले गया। एक निर्माणाधीन इमारत के बाहर अधेड़ उम्र महिला कस्सी से दरवाजे के आगे जमा मिट्टी छांट रही थी। परिचय कराने पर पता चला, वह उसकी मां परवीना है। बिना प्लास्टर, वायरिंग, खिड़की, दरवाजे के कई कमरे पार कर एक कमरे में पहुंचने पर झूलती चारपाई में धंसे हुए शख्स मिले, जो सलमान के पिता कासिम अली थे।
यह परिवार इलाके में चर्चित है
देखते-देखते सलमान के भाई-बहन भी आ गए। रिश्ते के दो भाई राशिद व अरशद अली इन दिनों सलमान से गायकी की तालीम ले रहे हैं। वह भी वहां मिले। यह परिवार मिरयासी जाति से होने के कारण गाने-बजाने को लेकर इलाके में चर्चित है। वैसे जागरण गाना इनका मूल पेशा है।
जी टीवी के कार्यक्रम में जाने से पहले सलमान भी पिता के साथ जागरण गाया करता था। इंडियन आयडल के ऑडिशन में अपने खर्चे से सलमान को मुंबई ले जाने वाला दोस्त भी इसके घर के पास रहता है।
कार्यक्रम में अव्वल आने पर जी नेटवर्क के साथ करार होने पर सलमान को कई कार्यक्रम मिले। उसके बाद से बेहतर अवसर की तलाश है। इसके पिता मायूस लहजे में बताते है कि तीन पहले इसने लोकल चैनल में कार्यक्र किया था, उसके पैसे भी नहीं मिले।
इंडियन आयडल जीतने पर हरियाणा सरकार की ओर से इसे तकरीबन 22 लाख रुपये दिए गए थे। वह पैसे पुश्तैनी जर्जर मकान को ढहाकर उसका ढांचा खड़ा कराने पर खर्च हो गया। पूरा पैसा खत्म होने के कारण इमारत का बाकी काम नहीं हो पाया है।
'कुछ लोग इसके करियर को तबाह करने पर तुले हैं'
सलमान की गायकी से प्रभावित होकर पलवल के दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस) ने इसे गोद ले लिया था। दो वर्ष तक वहां रहने के बाद तकरीबन पांच महीना पहले, बकौल सलमान के पिता- स्कूल ने उसे घर भेज दिया। सलमान के परिवार वालों का आरोप है कि फरीदाबाद और पुन्हाना के कुछ लोग इसके करियर को तबाह करने पर तुले हैं।
वह चाहते है सलमान उनके ग्रुप में गाए, ताकि उनकी दुकान चलती रहे। इससे इनकार करने पर वे इसके बारे में अनर्गल प्रचार कर इसे आगे बढ़ने से रोक रहे हैं। यहां तक कि जागरण का कहीं से काम मिलता है तो सलमान को बदचलन बताकर पत्ता कटवा दिया जाता था।
सलमान की मां परवीना ने बताया कि नवरात्रों में इसे राजस्थान से बुलावा आया था। आज सुबह वहां से फोन आया कि वह न आए, यहां गायक का इंतजाम कर लिया गया। इसी तरह कुछ नेताओं ने चुनाव प्रचार में बुलाने का वादा कर मुकर गए।
बिना नियमित काम मिलने से सलमान के घर वालों की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर हो गई है। इसके पिता ने बताया कि सालभर पहले तक खूब काम मिला करता था, अब इक्का दुक्का लोग आ रहे हैं। इस लिए सलमान अब दिनभर पुन्हाना की हरिजन बस्ती की सड़ांध मारती संकरी गलियों में भटकता रहता है।