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दिल्ली में अपना अस्तित्व बचाने के लिए भाजपा से दूर हुआ शिअद
Wed, 22 Jan 2020 05:14 AM IST
दुष्यंत शर्मा
सुरिंदर पाल, जालंधर
सुरिंदर पाल, जालंधर
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Wed, 22 Jan 2020 05:14 AM IST
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- फोटो : Amar Ujala
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शिरोमणि अकाली दल बेशक नागरिकता संशोधन बिल का हवाला देकर भाजपा के साथ मिलकर दिल्ली में चुनाव न लड़ने का दावा कर रहा हो, लेकिन अंदर की बात कुछ और ही है।
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भाजपा ने दिल्ली में अकाली दल को इस शर्त पर चार सीट देने का ऑफर किया था कि वह कमल के चुनाव चिह्न पर लड़ेंगे। लेकिन इससे पार्टी के अस्तित्व पर संकट देख शिअद प्रधान सुखबीर बादल तैयार नहीं हुए और भाजपा भी नहीं मानी जिससे दिल्ली में दोनों का रिश्ता टूट गया।
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दरअसल, अकाली दल के नेता और दिल्ली गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान मनजिंदर सिंह सिरसा ने राजौरी गार्डन उपचुनाव में 2017 में भाजपा के टिकट पर ही चुनाव लड़ा था।
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सिरसा की जीत के पीछे भाजपाई यह तर्क दे रहे थे कि वह कमल के फूल चिह्न पर चुनाव लड़े तभी उनकी जीत हुई, वरना वह हार सकते थे। इस बार अकाली दल दिल्ली में आठ सीट मांग रहा था, जिसमें राजौरी गार्डन, हरी नगर, कालका, मोती नगर, शाहदरा, तिलक नगर, सदर बाजार और कृष्णा नगर शामिल हैं।
वहीं भाजपा की तरफ से अकाली दल के साथ बातचीत के लिए नियुक्त किए गए केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने राज्यसभा सदस्य बलविंदर सिंह भूंदड़ और नरेश गुजराल के साथ रविवार शाम बातचीत की। सोमवार शाम को भी भाजपा नेतृत्व की तरफ से कोरा जवाब मिलने के बाद अकाली दल ने अपने आठों उम्मीदवारों को चुनाव न लड़ने के आदेश जारी कर दिए।
पार्टी के उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक, सुखबीर ने तो साफ कर दिया कि पहले सिरसा जरूर भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़े थे लेकिन अब हमारा निशान तकड़ी ही होगा वर्ना हमारी पार्टी खत्म हो जाएगी। इसके बाद सोमवार रात शिअद-भाजपा गठबंधन टूट गया।