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अगले साल तक चुनावी मैदान में होंगे 2400 राजनैतिक दल

Thu, 11 Aug 2016 11:21 AM IST
अमित कुमार निरंजन/अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित कुमार निरंजन/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 11 Aug 2016 11:21 AM IST
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rti says flood of new political parties will come in coming election year
भारतीय निर्वाचन आयोग

कई राज्यों में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। कुछ माह बाद पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव की घोषणा हो सकती है। लेकिन इस बीच निर्वाचन आयोग से आरटीआई के तहत दिलचस्प जानकारी मिली है।

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आयोग में नए राजनीतिक दल बनाने के लिए पिछले डेढ़ साल में 392 आवेदन आए हैं। अमर उजाला को यह जानकारी 16 जून को मिली। निर्वाचन आयोग में 1 जून 2016 को आरटीआई आवेदन के जरिए राजनीतिक दलों के रजिस्ट्रेशन के बारे में जानकारी मांगी गई थी।
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आयोग ने 1 जनवरी 2015 से 31 मई 2016 तक का ब्योरा दिया। इसके मुताबिक देश में कुल 2005 राजनीतिक दल राष्ट्रीय, क्षेत्रीय व अमान्य पार्टी के रूप में रजिस्टर्ड हैं। इनमें छह राष्ट्रीय दल, 50 क्षेत्रीय दल और 1949 अमान्य पार्टी (जिनका वोट प्रतिशत कुल मतदान का 4 प्रतिशत से भी कम हो) हैं। अगर 392 आवेदन स्वीकृत हो जाते हैं तो आगामी विधानसभा चुनाव तक आयोग में पंजीकृत राजनीतिक दलों की संख्या 2400 के करीब हो सकती है।

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90 फीसदी से ज्यादा दल चुनाव आयोग में अपने चंदे का ब्योरा भी नहीं देते

rti says flood of new political parties will come in coming election year
भारतीय निर्वाचन आयोग

ये आंकड़े इसलिए भी चौंकाते हैं क्योंकि इनमें से 90 फीसदी से ज्यादा दल चुनाव आयोग और आयकर विभाग में अपने चंदे का ब्योरा भी नहीं देते हैं। कितने राजनीतिक दलों ने अपने चुनावी चंदे का ब्योरा नहीं दिया फिलहाल इस बात की जानकारी आयोग ने सार्वजनिक नहीं की है।

आयोग के एक नोटिफिकेशन के अनुसार 2014 के लोकसभा चुनाव में 25 प्रतिशत पार्टियों ने चुनाव लड़ा था। इनमें सिर्फ 15 नए राजनीतिक दल थे। आयोग ने 200 राजनीतिक दलों को वर्ष1995 में चुनाव में हिस्सा न लेने के लिए और1999 व 2004 के चुनावों के लिए  220 राजनीतिक दलों को नोटिस थमाया था।

सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के अनुसार निर्वाचन आयोग को राजनीतिक दलों का रजिस्ट्रेशन रद्द करने का अधिकार नहीं हैं, लेकिन 10 साल तक किसी भी चुनाव में हिस्सा न लेने और अपने कार्यालय का सही या नया पता न देने पर आयोग इन दलों को राजनीतिक पार्टियों की सूची से बाहर (डी लिस्ट) कर सकता है।- लक्ष्मी श्रीराम, प्रोग्राम ऑफिसर, एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म

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