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बिछड़े बच्चे को लेकर टालमटोल करते रहे आरपीएफ कर्मी

Sun, 06 Nov 2016 12:24 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद Updated Sun, 06 Nov 2016 12:24 AM IST
सार

- रेलवे के प्रोटोकॉल अधिकारी को शटल में लावारिस मिला था बच्चा 
- गांव के सरपंच से संपर्क कर पिता को दी जानकारी, फरीदाबाद बुलाकर बच्चे को सौंपा

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rpf  men fighting each other on missing child in faridabad
- फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ऑपरेशन मुस्कान के नाम पर स्टेशनों पर घूमने वाले बच्चों को पकड़कर अपनी पीठ थपथपाने वाले आरपीएफ और जीआरपी का असली चेहरा सामने आया है। शटल में लावारिश मिले एक आठ साल के बच्चे को लेकर आरपीएफ और जीआरपी थाने पहुंचे रेलवे के प्रोटोकॉल अधिकारी को यहां के कर्मी टरकाते रहे।

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उक्त अधिकारी ने जब उच्चाधिकारियों से संपर्क किया तब आरपीएफकर्मी  बच्चे को लेने के लिए तैयार हुए। रेलवे अधिकारी ने रात में बड़ी मुश्किल से बच्चे के परिजन से संपर्क किया और उसके पिता को फरीदाबाद बुलाकर उन्हें सौंप दिया।
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जानकारी के अनुसार रेलवे बोर्ड में ऑफिसर प्रोटोकॉल गौरव शर्मा शुक्रवार की रात करीब साढ़े सात बजे गाजियाबाद मथुरा शटल से फरीदाबाद आ रहे थे। उन्हें कोच में एक आठ साल का बच्चा आलोक मिला। वह अपने परिजनों से बिछुड़कर शटल में बैठ गया था।
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शर्मा की नजर जब बच्चे पर पड़ी तो बच्चे को ओल्ड स्टेशन उतारकर आरपीएफ थाने लेकर आए। शर्मा का कहना है कि आरपीएफ एएसआई सतीश कुमार ने उन्हें बच्चे को लेकर जीआरपी थाने में जाने को कहा। जब वह बच्चे को लेकर जीआरपी थाने पहुंचे तो जीआरपीकर्मियों ने यह केस आरपीएफ का बताकर वापस कर दिया।

वह आधे घंटे तक आरपीएफ और जीआरपी थाने के चक्कर काटते रहे लेकिन कोई बच्चे को अपने पास रखने को तैयार नहीं हुआ। आखिर में उन्होंने इसकी जानकारी आरपीएफ उच्चाधिकारियों को दी। वहां से फटकार मिलने के बाद आरपीएफकर्मी बच्चे को लेने के लिए राजी हुए।


बच्चा आलोक यूपी के कासगंज जिले के परतापुर गांव का रहने वाला है। हैरानी की बात ये है कि जब आरपीएफकर्मी  रेलवे अधिकारी की बात सुनने को तैयार नहीं है तो आम आदमी की बात कितनी सुनते होंगे अंदाजा लगाया जा सकता है।

उधर आरपीएफ के डिप्टी कमांडेंट एमएस फारूखी का कहना है कि बच्चे को अटेंड करना आरपीएफ का फर्ज है। यदि किसी ने मना किया है तो उसकी जांच की जाएगी।

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