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Delhi NCR News: यमुनापार के अस्पतालों में बढ़े फ्लू जैसे मरीज, एच1एन1 जांच की किट नहीं
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-एक अस्पताल में रोजाना करीब 100 से अधिक संदिग्ध मरीज फ्लू जैसे लक्षणों के साथ ओपीडी पहुंच रहे
अमर उजाला ब्यूरो
पूर्वी दिल्ली। यमुनापार के अस्पतालों में स्वाइन फ्लू जैसे लक्षणों वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इन अस्पतालों में एच1एन1 की जांच के लिए टेस्ट किट उपलब्ध नहीं हैं। डॉक्टर लक्षणों के आधार पर ही बीमारी की पुष्टि कर इलाज कर रहे हैं।
जीटीबी और स्वामी दयानंद जैसे अस्पतालों में रोजाना 100 से अधिक संदिग्ध मरीज ओपीडी पहुंच रहे हैं। टेस्ट किट न होने से बीमारी की पहचान लक्षणों पर निर्भर है। हल्के लक्षण वाले मरीजों को सामान्य उपचार देकर घर भेजा जा रहा है। गंभीर मरीजों को अस्पताल में भर्ती कर निगरानी में रखा जाता है। सांस लेने में परेशानी या ऑक्सीजन का स्तर कम होने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मधुमेह, सीओपीडी और अस्थमा जैसी बीमारियों वाले मरीजों पर भी खास नजर रखी जा रही है। ऐसे मरीजों को एंटीवायरल दवा, ऑक्सीजन और अन्य सपोर्टिव उपचार दिया जा रहा है। डॉक्टरों ने लोगों को मास्क पहनने, हाथ साफ रखने और बीमारों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी है।
रैपिड किट हो तो 10 मिनट में मिल सकती है रिपोर्ट
डॉक्टरों के अनुसार, अस्पताल में रैपिड टेस्ट किट उपलब्ध होने पर संदिग्ध एच1एन1 मरीजों की जांच तेजी से की जा सकती है, जिसमें करीब 10 से 15 मिनट में रिपोर्ट मिल जाती है। फिलहाल अस्पतालों में किट उपलब्ध न होने की वजह से यह सुविधा नहीं मिल पा रही है। जरूरत पड़ने पर मरीज के नमूने को उच्चस्तरीय जांच के लिए भेजने या पीसीआर टेस्ट कराने का विकल्प है, लेकिन इसमें रैपिड टेस्ट की तुलना में अधिक समय लग सकता है।
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गंभीर मरीजों को तुरंत एंटीवायरल
एच1एन1 के संदिग्ध श्रेणी-बी मरीजों को ओसेल्टामिविर दिया जा रहा है। श्रेणी-सी के मरीजों को तुरंत भर्ती कर एंटीवायरल उपचार शुरू किया जाता है। इनमें कम ऑक्सीजन स्तर या पुरानी बीमारियों वाले मरीज शामिल हैं। स्वामी दयानंद अस्पताल की एमएस सुनीता ने बताया कि उन्होंने जांच किट का ऑर्डर दिया है। किट जल्द आने पर जांच शुरू हो जाएगी।
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अमर उजाला ब्यूरो
पूर्वी दिल्ली। यमुनापार के अस्पतालों में स्वाइन फ्लू जैसे लक्षणों वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इन अस्पतालों में एच1एन1 की जांच के लिए टेस्ट किट उपलब्ध नहीं हैं। डॉक्टर लक्षणों के आधार पर ही बीमारी की पुष्टि कर इलाज कर रहे हैं।
जीटीबी और स्वामी दयानंद जैसे अस्पतालों में रोजाना 100 से अधिक संदिग्ध मरीज ओपीडी पहुंच रहे हैं। टेस्ट किट न होने से बीमारी की पहचान लक्षणों पर निर्भर है। हल्के लक्षण वाले मरीजों को सामान्य उपचार देकर घर भेजा जा रहा है। गंभीर मरीजों को अस्पताल में भर्ती कर निगरानी में रखा जाता है। सांस लेने में परेशानी या ऑक्सीजन का स्तर कम होने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मधुमेह, सीओपीडी और अस्थमा जैसी बीमारियों वाले मरीजों पर भी खास नजर रखी जा रही है। ऐसे मरीजों को एंटीवायरल दवा, ऑक्सीजन और अन्य सपोर्टिव उपचार दिया जा रहा है। डॉक्टरों ने लोगों को मास्क पहनने, हाथ साफ रखने और बीमारों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी है।
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रैपिड किट हो तो 10 मिनट में मिल सकती है रिपोर्ट
डॉक्टरों के अनुसार, अस्पताल में रैपिड टेस्ट किट उपलब्ध होने पर संदिग्ध एच1एन1 मरीजों की जांच तेजी से की जा सकती है, जिसमें करीब 10 से 15 मिनट में रिपोर्ट मिल जाती है। फिलहाल अस्पतालों में किट उपलब्ध न होने की वजह से यह सुविधा नहीं मिल पा रही है। जरूरत पड़ने पर मरीज के नमूने को उच्चस्तरीय जांच के लिए भेजने या पीसीआर टेस्ट कराने का विकल्प है, लेकिन इसमें रैपिड टेस्ट की तुलना में अधिक समय लग सकता है।
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गंभीर मरीजों को तुरंत एंटीवायरल
एच1एन1 के संदिग्ध श्रेणी-बी मरीजों को ओसेल्टामिविर दिया जा रहा है। श्रेणी-सी के मरीजों को तुरंत भर्ती कर एंटीवायरल उपचार शुरू किया जाता है। इनमें कम ऑक्सीजन स्तर या पुरानी बीमारियों वाले मरीज शामिल हैं। स्वामी दयानंद अस्पताल की एमएस सुनीता ने बताया कि उन्होंने जांच किट का ऑर्डर दिया है। किट जल्द आने पर जांच शुरू हो जाएगी।