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रिटायर्ड कर्नल-एडीएम विवाद: एसीईओ के आदेश के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई

Tue, 28 Aug 2018 11:12 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, नोएडा
ब्यूरो, अमर उजाला, नोएडा Updated Tue, 28 Aug 2018 11:12 PM IST
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Retired Colonel and ADM Dispute after not taking Action ACEO Order
रिटायर्ड कर्नल और एडीएम विवाद

रिटायर्ड कर्नल-एडीएम विवाद की जड़ में अवैध अतिक्रमण था। रिटायर्ड कर्नल ने सेक्टर-29 के फ्लैट नंबर 642 से 650 तक के निवासियों के साथ प्राधिकरण से शिकायत की थी। उसी दौरान 18 जुलाई को शिकायती पत्र पर एसीईओ ने नोटिंग करते हुए वर्क सर्किल-2 को कार्रवाई का निर्देश दिया था, लेकिन वर्क सर्किल ने नियमों का हवाला देते हुए ग्रुप हाउसिंग को पत्र वापस भेज दिया था।

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दरअसल, 18 जुलाई को प्राधिकरण के एसीईओ ने एडीएम के खिलाफ शिकायती पत्र पर नोटिंग करते हुए वर्क सर्किल-दो को निर्देश दिया था कि स्थल का निरीक्षण कराकर अनधिकृत निर्माण हटवाएं और कार्रवाई से अवगत कराएं। पत्र में कई फ्लैट मालिकों की ओर से शिकायती पत्र पर हस्ताक्षर किया गया था। 
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इसमें में कई तरह की परेशानियां प्राधिकरण को बताई गई थीं। वहीं पूरी शिकायत एडीएम पर केंद्रित थी। इसके बाद एसीईओ ने वर्क सर्किल-2 को कार्रवाई का आदेश दिया, लेकिन वर्क सर्किल-2 ने कोई कार्रवाई नहीं की और पूर्व सीईओ अमित मोहन प्रसाद के एक आदेश का हवाला देते हुए उक्त पत्र को ग्रुप हाउसिंग को बढ़ा दिया कि ऐसे मामले में मुख्य विभाग ही कार्रवाई करता है। 
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वर्क सर्किल-2 का दावा है कि इसमें धारा-10 का नोटिस सबसे पहले दिया जाता है। इसके बाद 15 दिन का समय दिया जाता है। इसके बाद कोई कार्रवाई होती है। जब इस मामले में ग्रुप हाउसिंग से पूछा गया तो पता चला कि पूर्व सीईओ का आदेश किसी तोड़फोड़ से संबंधित नहीं था। उसमें ऐसा कोई आदेश भी नहीं है कि अगर मामला तोड़फोड़ का हो तो संबंधित विभाग से आदेश लिया जाए।

अधिकारियों का कहना है अगर किसी तरह के अतिक्रमण की शिकायत आती है तो वर्क सर्किल की जिम्मेदारी होती है। अगर वर्क सर्किल उक्त अतिक्रमण को नहीं तोड़ पाता है तो वह संबंधित विभाग को बताता है। इसके बाद संबंधित विभाग उक्त संपत्ति का अलॉटमेंट रद्द करने की कार्रवाई करता है। 


इस मामले में वर्क सर्किल की जवाबदेही बनती है। यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब नियमों की बात बताकर उस समय अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो फिर 21 अगस्त को एकाएक किसके आदेश पर अतिक्रमण को तोड़ दिया गया। क्या उस समय नियमों का पालन किया गया था। यही नहीं यहां यह भी सवाल उठ रहा है कि यहां अवैध निर्माण कैसे हो गया। इस तरह के निर्माण को रोकने की जिम्मेदारी किसकी है। 

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