'विश्वविद्यालयों से पहले RSS मुख्यालय पर तिरंगा फहराए केंद्र'
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जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय प्रबंधन ने आरोप सिद्ध होने से पहले ही आठ छात्रों को विश्वविद्यालय की अकादमिक गतिविधियों से प्रतिबंद्धित कर दिया है।
जेएनयू छासंघ ने तत्काल आठों छात्रों पर लगाया गया प्रतिबंद्ध का फैसला वापस लेने के साथ भारतीय न्यायपालिका से देशद्रोह कानून में पुनर्विचार की अपील की है।
छात्रों ने विवि के कश्मीरी छात्रों के घर पुलिस द्वारा वेरिफिकेशन के नाम पर प्रताड़ित करने का आरोप भी लगाया है। जेएनयू कैंपस स्थित कुलपति कार्यालय के नीचे शुक्रवार को छात्रसंघ उपाध्यक्ष शेहला राशिद ने सेव जेएनयू कम्यूनिटी सिटीजन मार्च में शामिल होने के लिए छात्रों का धन्यवाद करते हुए कहा कि विवि ने जिन आठ छात्रों को प्रतिबंद्ध लगाया है, उसके चलते उनकी पढ़ाई बाधित हो रही है।
शेहला ने सर्वोच्च न्यायालय से अपील कि है कि देशद्रोह कानून में पुनर्विचार किया जाए। वर्ष 1960 से अभी तक इस कानून के तहत किसी को सजा तो नहीं मिली है, लेकिन दुरुपयोग हो रहा है।
'केंद्र आरएसएस मुख्यालय पर तिरंगा फहराए'
केंद्रीय विश्वविद्यालयों में तिरंगा झंडा फहराने के सवाल पर शेहला ने स्वागत करते हुए कहा कि जेएनयू में पहले ही तिरंगा फहराया जाता है।
हालांकि केंद्र सरकार विश्वविद्यालयों से पहले आरएसएस मुख्यालय में पहले भगवा की बजाय तिरंगा फहराए तो बड़ी बात होगी। शेहला ने कैंपस में आयोजित कार्यक्रम और नारे लगाने के मामले में विवि की हाईलेवल कमेटी पर अंगुली उठायी है। छात्रसंघ उपाध्यक्ष का कहना है कि बेशक इस कमेटी को 17 या 18 डीन का साथ मिला हो, लेकिन फिर भी अधूरी है।
देश का कानून जब तक किसी को गुनाहगार न करार दें, वह आरोपी होता है। लेकिन मीडिया ट्रायल ने कन्हैया के पोस्टर और फोटो पर आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करके उसके भविष्य पर दाग लगा दिया है।
शेहला के मुताबिक, बेशक कुछ पूर्व सैनिकों ने जेएनयू विवाद के बाद डिग्री लौटाने की बात कही हो, लेकिन सुरा सिंह नाम के पूर्व सेना अधिकारी मुश्किल वक्त में जेएनयू के साथ है। रिटायरमेंट के बाद सेना अधिकारी केलोफोर्निया में जा बसे हैं। इसके अलावा करीब बीस से अधिक इंटरनेशनल एसो. का भी सहयोग मिला है।