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अब SEZ की जमीन पर बनेंगे आवासीय फ्लैट

Mon, 05 May 2014 12:39 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा Updated Mon, 05 May 2014 12:39 PM IST
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Residential flats will be constructed on SEZ land

अब आपकी नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर फ्लैट की चाहत पूरी हो सकती है।

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आवास की जरूरत को देखते हुए प्राधिकरण विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) की 35 फीसदी जमीन का इस्तेमाल अब रिहायशी उपयोग के रूप में करने जा रहा है।

दरअसल, एसईजेड की योजना विफल रहने पर प्राधिकरण इस जमीन का इस्तेमाल मिश्रित उपयोग के रूप में करना चाह रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, कुल एरिया के 50 फीसदी हिस्से पर उद्योग, ढांचागत विकास और ग्रीन बेल्ट विकसित होंगे।

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साथ ही 35 फीसदी हिस्से पर रिहायशी उपयोग का प्रस्ताव है, जिसमें प्रमुख रूप से ग्रुप हाउसिंग और किसानों को दिए जाने वाले पांच फीसदी आवासीय भूखंड शामिल हैं।
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अब किसानों को पांच फीसदी आवासीय भूखंड देने के लिए भी सिर्फ यही जमीन बची है। इसके अलावा पांच फीसदी एरिया पर व्यावसायिक और दस फीसदी जमीन पर संस्थागत उपयोग की तैयारी है।

एसईजेड की जमीन गुलावली, झट्टा, मोहियापुर, नलगढ़ा आदि गांवों में है। इसका कुल क्षेत्रफल करीब एक हजार हेक्टेयर है। ऐसे में करीब 350 हेक्टेयर जमीन पर रिहायशी सेक्टर विकसित होंगे। यानी इस एरिया में हजारों फ्लैट बनने के आसार हैं।

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वहीं, 50 हेक्टेयर में मॉल और 100 हेक्टेयर जमीन पर शिक्षण संस्थान खुलेंगे। प्राधिकरण इस जमीन की फेंसिंग करवा रहा है। हालांकि एसईजेड के कुछ गांवों की जमीन पर अधिग्रहण होना अभी बाकी है। चुनावी आचार संहिता खत्म होने के बाद प्राधिकरण इस कार्रवाई को पूरी करेगा।

रिलायंस को दी गई थी जमीन
प्राधिकरण ने वर्ष 2005-06 में एसईजेड विकसित करने के लिए यह जमीन रिलायंस इंडस्ट्रीज को दी थी। रिलायंस ने इसके एवज में सिक्योरिटी मनी भी डिपॉजिट कर दी थी। लेकिन बाद में सरकार बदलते ही इस योजना को रद्द कर दिया गया। कुछ समय तक कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद रिलायंस इससे पीछे हट गया। उसकी सिक्योरिटी मनी भी प्राधिकरण ने वापस कर दी है। अब प्राधिकरण अपने हिसाब से इसे विकसित करने का प्लान बना रहा है।

आखिरी लैंड बैंक
नोएडा के पास एसईजेड के रूप में यह आखिरी लैंड बैंक माना जा रहा है। छोटे-मोटे प्लॉट को छोड़ दें, तो इस जमीन के विकसित हो जाने के बाद प्राधिकरण के पास सिर्फ मेंटेनेंस का ही काम बचेगा। बता दें कि प्राधिकरण की आमदनी का सबसे बड़ा स्रोत जमीन आवंटित करना ही है।

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