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शोध में हुआ खुलासा, सर्दियों में ईरान, नेपाल और पाकिस्तान से आता है दिल्ली में प्रदूषण

Mon, 22 Jun 2020 08:32 PM IST
Mohit Mudgal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Mohit Mudgal Updated Mon, 22 Jun 2020 08:32 PM IST
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research three air corridor responsible for pollution in delhi in winters
दिल्ली में प्रदूषण - फोटो : पीटीआई

वैज्ञानिकों ने दिल्ली में प्रदूषण के लिए जिम्मेदार तीन एयर कॉरिडोर की पहचान की है। दिल्ली की आबोहवा को लेकर 15 शोधकर्ताओं की एक टीम से शोध किया है। इसमें आईआईटी कानपुर और दिल्ली के साथ-साथ स्विट्जरलैंड की वायुमंडलीय रसायन विज्ञान प्रयोगशाला के शोधकर्ता भी शामिल हैं। 

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शोध में वैज्ञानिकों ने तीन एयर कॉरिडोर की पहचान की है। शोध के अनुसार दिल्ली की आबोहवा खराब करने के लिए पाकिस्तान, ईरान और नेपाल के एयर कॉरिडोर जिम्मेदार हैं। 
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आईआईटी कानपुर के सिविल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के विभागाध्यक्ष एसएन त्रिपाठी ने शोध के बारे मे जानकारी देते हुए बताया कि ऐसा माना जाता है कि दिल्ली में प्रदूषण उत्तर-पश्चिम दिशा से आता है। हालांकि हमें पता चला है कि सर्दियों के दौरान दिल्ली में तीन अलग-अलग कॉरिडोर से प्रदूषण आता है। 
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पहला कॉरिडोर उत्तर पश्चिम दिशा से है जो पाकिस्तान, पंजाब और हरियाणा से प्रदूषित हवा दिल्ली तक पहुंचाता है। दूसरा नॉर्थ-ईस्ट कॉरिडोर है, जो उत्तर प्रदेश से प्रदूषण लेकर राजधानी तक आता है। जबकि पूर्वी कॉरिडोर के जरिए नेपाल और उत्तर प्रदेश से प्रदूषण दिल्ली तक पहुंचता है। 

दो साल पहले साल 2018 में ऊर्जा और संसाधन संस्थान (TERI) और ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) द्वारा किए गए शोध में पता चला था कि दिल्ली में 64 प्रतिशत प्रदूषण बाहर से आता है। जबकि 34 प्रतिशत एनसीआर से ही आता है। वहीं 18 प्रतिशत प्रदूषण उत्तर पश्चिमी भारत से दिल्ली पहुंचता है। 

उन्होंने बताया कि पूर्वी कॉरिडोर से आने वाली हवाओं में सीसा, तांबा और कैडमियम ज्यादा मात्रा में पाया गया है। जबकि उत्तर पश्चिम कॉरिडोर से दिल्ली में आने वाली हवाओं में सेलेनियम, ब्रोमीन और क्लोरीन ज्यादा मात्रा में पाए गए हैं।

ये तत्व उद्योगों, दवाओं और रसायनों की वजह से आते हैं जबकि क्लोरीन के आने की संभावना ईंट-भट्टों, कचरे के जलने वाले कारखानों की हो सकती है। 

शोध में ऐसे 35 तत्वों के बारे में पता चला है कि जिनमें से 26 तत्व अन्य की तुलना में दिल्ली में आने वाली हवाओं में ज्यादा मात्रा में पाए गए हैं। मोटे कणों के कुल द्रव्यमान का लगभग एक चौथाई हिस्सा इन तत्वों में है। इसे ही पीएम 10 कहा जाता है। 

आईआईटी दिल्ली के सेंटर फॉर एटमॉस्फेरिक स्टडीज के एसोसिएट प्रोफेसर दिलीप गांगुली ने बताया कि टीम ने हर 30 मिनट पर डाटा एकत्रित किया है और फिर उसका रीयल टाइम एनालिसिस भी किया गया है।

उन्होंने बताया कि इससे यह बात साफ होती है कि दिल्ली में रोजाना दो बार प्रदूषण सबसे अधिक होता है। इसमें पहली बार सुबह 3 बजे से लेकर 8 बजे के बीच और दूसरी बार रात 10 बजे तक के आसपास सबसे अधिक प्रदूषण पाया जाता है।


वैज्ञानिकों ने इस शोध को साल 2018 और 2019 की दो सर्दियों में पूरा किया गया है। इसके लिए आईआईटी दिल्ली कैंपस से सैंपल लिया गया है। इस शोध को एक अंतरराष्ट्रीय पत्रिका में प्रकाशन के लिए स्वीकृति भी मिल चुकी है।

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