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पुलिस से रिटायर्ड कर्मचारी के गुमशुदा बेटी के अपहरण की रिपोर्ट 20 साल बाद हुई दर्ज
Mon, 14 Jan 2019 01:27 AM IST
राजेश सैनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गाजियाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गाजियाबाद
Published by: राजेश सैनी
Updated Mon, 14 Jan 2019 01:27 AM IST
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गाजियाबाद पुलिस
- फोटो : फाइल फोटो
पुलिस में 30 साल नौकरी करने वाले बड़े बाबू के पद से रिटायर देवीचंद अपने बेटे की अपहरण की रिपोर्ट दर्ज करवाने के लिए 20 साल से चक्कर लगा रहे हैं। किसी अधिकारी और थानेदार ने उनकी पीड़ा नहीं समझी। अपहरण की रिपोर्ट दर्ज होने में उन्हीं के महकमे ने 20 साल लगा दिए। अब सीओ द्वितीय के आदेश पर सिहानीगेट थाने में रिपोर्ट दर्ज हुई है।
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सिहानीगेट थाना क्षेत्र के सिब्बनपुरा निवासी देवीचंद मूल रूप से सहारनपुर के रहने वाले हैं। उन्होंने बताया कि 2010 में वह गाजियाबाद पुलिस अधीक्षक कार्यालय से बड़े बाबू के पद से रिटायर हुए थे। पीएससी में भी तैनात रहे। उन्होंने बताया कि 1999 में वह सिहानीगेट थाने में तैनात थे। उनका परिवार थाने में बने क्वार्टर में रहता था। उनका बड़ा बेटा जितेन्द्र उर्फ पप्पू हाथरस के एक कॉलेज से आईटीआई की पढ़ाई कर रहा था। वह कुछ दिन की छुट्टी पर आया हुआ था। जितेन्द्र 22 अगस्त 1999 को खाना खाने के बाद अपने कुछ साथियों के साथ घूमने के लिए गया हुआ था, लेकिन उसके बाद से वह कभी घर नहीं लौटा। उसको काफी तलाश किया गया।
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रिश्तेदारी उसके दोस्त व अन्य स्थानों पर भी देखा गया। पहले सिहानी गेट थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई, उसके बाद वह दिल्ली के दरियागंज थाने में भी मुकदमा दर्ज कराया। मुंबई स्थित पर्सन मिसिंग ब्यूरो में भी जितेंद्र के गुमशुदा होने की जानकारी दी गई। उन्होंने अधिकारियों से तलाश करने की मांग की, लेकिन किसी ने कोई सहयोग नहीं किया।
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काफी समय बीतने के बाद उन्होंने पुलिस ने अपहरण में मुकदमा दर्ज कराने की मांग की, लेकिन अपहरण में मुकदमा दर्ज नहीं हुआ। कई साल तक गुमशुदगी से अपहरण का मुकदमा दर्ज कराने के लिए भटकते रहे। मामले की मानवाधिकार आयोग में भी शिकायत की गई थी। अब क्षेत्राधिकारी द्वितीय आतिश कुमार ने गुमशुदगी की रिपोर्ट अपहरण में दर्ज करने के आदेश थाना प्रभारी को दिया, तब जाकर एसपी सिटी श्लोक कुमार ने बताया कि पुराना मामला होने के कारण विभिन्न बिंदुओं पर जांच की जा रही है। रिपोर्ट दर्ज करा दी गई है।