Delhi: दिल्ली में 55 साल बाद दास कैडर के पुनर्गठन को मंजूरी, बीस हजार अधिकारियों-कर्मचारियों को मिलेगा फायदा
गृह मंत्रालय से स्वीकृति मिलने पर एलजी ने मुख्य सचिव नरेश कुमार को इस दिशा में प्रस्ताव तैयार करने व तीन सदस्यीय कमेटी गठित करने का निर्देश दिया था। कमेटी ने 287 ग्रुप ए पदों की पहचान कर इन्हें दास कैडर में शामिल करने का प्रस्ताव बीते दिनों मुख्य सचिव नरेश कुमार को भेजा। उपराज्यपाल ने अब इसे मंजूर कर लिया है।
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दिल्ली प्रशासन अधीनस्थ सेवा (दास कैडर) के पुनर्गठन को उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने मंजूरी दे दी है। इसका फायदा करीब 20 हजार अधिकारियों व कर्मचारियों को लाभ मिलेगा। अब आसानी से इनका प्रमोशन हो सकेगा। साथ ही, दास कैडर के अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए कैडर से ग्रुप ‘ए’ में भेजे जाने के प्रस्ताव को भी मंजूर कर लिया है। इससे वर्षों से बिना प्रमोशन के अतिरिक्त जिम्मेदारी निभा रहे अधिकारी आगे बढ़ सकेंगे।
दास कैडर का गठन 1967 में हुआ था। 55 साल बीतने के बाद भी इसका पुनर्गठन नहीं हुआ। इससे सीधी नियुक्ति से आए ग्रेड-दो के अधिकारी अपनी पूरी सेवा अवधि में केवल एक पदोन्नति पाते हैं। कई मामलों में इनका तबादला किसी दूसरे केंद्र शासित राज्य में कर दिया जाता था। वहीं, कई मामलों में उच्च पदों की जिम्मेदारी तो दे दी जाती है, लेकिन ग्रेड नहीं मिलता। दिल्ली सरकार के अधिकारी व कर्मचारी संघ के अध्यक्ष एएन गौड़ ने बताया कि अधिकारियों व कर्मचारियों की मांग पर एलजी ने करीब एक साल पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास इसकी मंजूरी का प्रस्ताव भेजा था।
गृह मंत्रालय से स्वीकृति मिलने पर एलजी ने मुख्य सचिव नरेश कुमार को इस दिशा में प्रस्ताव तैयार करने व तीन सदस्यीय कमेटी गठित करने का निर्देश दिया था। कमेटी ने 287 ग्रुप ए पदों की पहचान कर इन्हें दास कैडर में शामिल करने का प्रस्ताव बीते दिनों मुख्य सचिव नरेश कुमार को भेजा। उपराज्यपाल ने अब इसे मंजूर कर लिया है।
दास कैडर के अधिकारी बेहद खुश
एएन गौड़ ने बताया कि दास कैडर के करीब बीस हजार कर्मचारी हैं। इनकी कैडर में सीधी नियुक्ति हुई है। अब इन्हें नियत समय पर पदोन्नति मिल सकेगी। वे जिस पद काम कर रहे होंगे, उसका उन्हें ग्रेड मिल सकेगा। सरकार की गाइडलाइन है कि हर पांच साल में कैडर का पुनर्गठन होना चाहिए, लेकिन दिल्ली में यह 55 साल से लंबित था।