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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Relatives refused to come home, terrified by monkey terror in Asawata

Delhi NCR News: रिश्तेदारों ने घर आने से किया मना, असावटा में बंदरों के आतंक से दहशत

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 28 Jun 2026 12:39 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
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पलवल। गांव आएंगे तो कहीं बंदर काट न लें। यह कहकर कई रिश्तेदारों ने असावटा गांव के लोगों के घर आने से मना कर दिया है। गांव में बंदरों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि अब केवल ग्रामीण ही नहीं, बल्कि उनके रिश्तेदार भी गांव आने से कतराने लगे हैं। पिछले एक माह में बंदरों के हमलों में 7 से अधिक लोग घायल हो चुके हैं, जिससे पूरे गांव में भय का माहौल है। ग्रामीणों के अनुसार गांव में बंदरों के कई झुंड सुबह से शाम तक गलियों, छतों और सार्वजनिक स्थानों पर घूमते रहते हैं। अचानक लोगों पर हमला कर उन्हें काट लेते हैं। सबसे अधिक परेशानी बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को हो रही है। लोग घरों की छतों पर जाने, बच्चों को अकेले बाहर भेजने और दैनिक कार्य करने में भी डर महसूस कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या अब केवल परेशानी नहीं बल्कि सामाजिक जीवन को भी प्रभावित करने लगी है।
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लोगों से बातचीत

आए दिन लोगों पर हमले हो रहे हैं और कई लोग घायल हो चुके हैं। प्रशासन को इस समस्या का जल्द समाधान करना चाहिए। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो किसी बड़ी घटना से इनकार नहीं किया जा सकता। धनपत सिंह ग्रामीण
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मैं छत पर कपड़े लेने गई थी। तभी अचानक एक बंदर ने आकर मुझ पर हमला कर दिया और हाथ पर काट लिया। घटना के बाद मुझे अस्पताल जाकर उपचार कराना पड़ा। अब छत पर जाने में भी डर लगता है। विशाखा, ग्रामीण

गांव में बंदरों का आतंक इतना बढ़ गया है कि अब रिश्तेदार भी हमारे घर आने से कतराने लगे हैं। कई लोगों ने साफ कह दिया है कि कहीं बंदर काट न लें, इसलिए वे गांव नहीं आएंगे। वेद प्रकाश आर्य, ग्रामीण


गांव में बंदरों का आतंक इतना बढ़ गया है कि अब घर से बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया है। हर समय डर बना रहता है कि कहीं अचानक बंदर हमला न कर दें।

अनिल रावत, ग्रामीण


गांव में बंदरों के आतंक और लोगों को काटने की शिकायत मेरे संज्ञान में है। इस संबंध में मैंने 20 मार्च को संबंधित विभाग को लिखित शिकायत भी दी थी, लेकिन अभी तक कोई संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई है। सतवीर, गांव सरपंच


ग्रामीणों ने वन विभाग और जिला प्रशासन से गांव में विशेष अभियान चलाकर बंदरों को पकड़ने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।

बॉक्स

जिला अस्पताल में पर्याप्त हैं एंटी रेबीज इंजेक्शन

जिला नागरिक अस्पताल के एसएमओ ने बताया कि अस्पताल में बंदरों के काटने के उपचार के लिए एंटी रेबीज इंजेक्शन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। बंदर के काटने पर प्रभावित व्यक्ति को बिना देरी किए अस्पताल पहुंचकर उपचार कराना चाहिए। संजय शर्मा, डिप्टी सिविल सर्जन, पलवल
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