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अनाधिकृत कॉलोनियों के नियमन पर हो रही राजनीति
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 04 Jun 2014 01:35 PM IST
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दिल्ली की अनाधिकृत कॉलोनियों में विकास कार्य और नियमन में नए सरकारी आदेश का पेंच आ गया है।
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राष्ट्रपति शासन के दौरान शहरी विकास विभाग के उप सचिव की तरफ से उपराज्यपाल की स्वीकृति पर जारी नए आदेश में कॉलोनी नियमन की अंतिम डेडलाइन मार्च, 2015 दी गई है।
कांग्रेस ने इस आदेश को भाजपा का धोखा बताया है। तर्क है कि कांग्रेस ने 895 कॉलोनियां नियमित कर दी थी तो फिर नया आदेश क्यों?
शहरी विकास विभाग के उप सचिव आरके बालियान के हस्ताक्षर से जारी आदेश में कहा गया है कि 904 कॉलोनियों के नियमन की समय सीमा मार्च, 2015 तक बढ़ा दी गई है।
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वहीं तीसरी श्रेणी के 289 और चौथी श्रेणी की 362 कॉलोनी नियमन योग्य हैं या नहीं इसे फिर से तय किया जाएगा। इससे इन श्रेणी की कॉलोनियों पर तलवार लटक गई है।
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नियमन के लिए योग्य मानी गईं 134 कॉलोनियों को प्रथम श्रेणी में रखा गया है। इसकी बाउंड्री जुलाई, 2014 तक राजस्व विभाग को फाइनल करनी है। सितंबर, 2014 तक जियो स्पेशल दिल्ली लिमिटेड को नक्शा फाइनल करना है, जबकि स्थानीय निकाय को ले आउट प्लान पास करना है।
दूसरी श्रेणी में 129 ऐसी कॉलोनियों को रखा गया है, जो 2002 में थीं और 2007 में 50 फीसदी से अधिक बसाहट थी। इन कॉलोनियों की बाउंड्री राजस्व विभाग को नवंबर, 2014 तक पूरी करनी है। दिसंबर, 14 तक नक्शे फाइनल होंगे तो जनवरी, 2015 तक स्थानीय निकाय को ले आउट प्लान पास करना है। फरवरी, 2015 में इन कॉलोनियों के नियमन का आदेश जारी कर दिया जाएगा।
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तीसरी श्रेणी में 289 कॉलोनियों को रखा गया है जो 2002 में थीं और 2007 में बसावट भी 50 फीसदी या उससे अधिक थी। लेकिन एसएआई, वन विभाग और डीडीए समेत अन्य की आपत्तियां हैं। संबंधित एजेंसी को सितंबर, 2014 तक एनओसी देनी है। योग्यता की छंटनी करने केबाद दिसंबर, 14 तक राजस्व विभाग को बाउंड्री तय करनी है और मार्च, 2015 तक नियमित की जानी है।
चौथी श्रेणी में ऐसी 362 कॉलानियां रखी गई हैं जो 2002 में थीं या नहीं थीं और 2007 में बसाहट भी 50 फीसदी से कम थी। अक्तूबर, 14 तक नियमन योग्य हैं या नहीं तय किया जाना है। अप्रैल, 2015 तक बाउंड्री तय करके नियमन प्रमाणपत्र जारी करने की समय सीमा तय की गई है।
नियम बदलने के लिए भेजी गई चिट्ठी का नहीं पता
पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की अध्यक्षता वाली कैबिनेट की स्वीकृति से अनधिकृत कॉलोनियों के नियमन को जैसा है, उसी हाल में करने केलिए नियम बदलने का प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेजा गया था। अभी तक उसकी स्वीकृति नहीं मिली है। जानकारों का मानना है कि बिना कानून बदले कॉलोनियों का नियमन किसी भी सूरत में नहीं किया जा सकता।
वहीं मुख्य कांग्रेस प्रवक्ता मुकेश शर्मा का कहना है कि कांग्रेस ने जिन कॉलोनियों को नियमित किया था, उस पर भाजपा ने तलवार लटका दी है। भाजपा के इशारे पर शहरी विकास विभाग ने नई समय सीमा तय की है। एमसीडी जानबूझकर इन कॉलोनियों के ले आउट प्लान पास नहीं कर रहा है। नए आदेश से बड़ी संख्या में कॉलोनियां नियमन से बाहर हो जाएंगी।