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Delhi NCR News: हजारों अदालती फैसलों का रिकार्ड खतरे में, खंडहर बनी इमारत में चल रहा रिकार्ड रूम छतों से झड़ रहा मलबा, बरसात में भर जाता है पानी, सीलन से गल रहीं फाइलें<bha>;</bha> कर्मचारी और फरियादी रोज जान जोखिम में डालकर पहुंच रहे
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फोटो: जर्जर रिकार्ड रूम में बैठकर काम करते कर्मचारी तथा काम से पहुंचा एक व्यक्ति।
फोटो: जर्जर रिकार्ड रूम में रखा रिकार्ड हो रहा खराब।
फोटो: रिकार्ड रूम का खराब पड़ा शौचालय।
हजारों अदालती फैसलों का रिकार्ड खतरे में, खंडहर बनी इमारत में चल रहा रिकार्ड रूम छतों से झड़ रहा मलबा, बरसात में भर जाता है पानी, सीलन से गल रहीं फाइलें; कर्मचारी और फरियादी रोज जान जोखिम में डालकर पहुंच रहे
दिनेश देशवाल
नूंह। जिन दस्तावेजों के आधार पर लोगों की जमीन, विरासत और राजस्व विवादों का भविष्य तय होता है, वे खुद सरकारी लापरवाही की भेंट चढ़ते दिख रहे हैं। नूंह में जिलाधीश, उपमंडल अधिकारी, जिला राजस्व अधिकारी और तहसीलदारों की अदालतों के हजारों फैसलों का रिकार्ड ऐसी जर्जर इमारत में रखा गया है, जिसकी छतें टूट रही हैं, दीवारों में दरारें पड़ चुकी हैं और बरसात में कमरों तक पानी भर जाता है। हालात इतने खराब हैं कि किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है, लेकिन प्रशासन वर्षों से खतरे को नजरअंदाज करता आ रहा है।
सोमवार को अमर उजाला की टीम ने पुराने एसडीएम कार्यालय परिसर में बने राजस्व रिकार्ड रूम का निरीक्षण किया तो व्यवस्था की पोल खुलकर सामने आ गई।
छतों पर उगे पेड़ों की जड़ें पहुंची रिकार्ड रूम तक:
करीब 12 साल पहले जिला सचिवालय बनने के बाद इस भवन को खाली कर दिया गया था। इसके बाद रखरखाव के अभाव में यह भवन धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील हो गया। आज स्थिति यह है कि छतों पर पीपल और नीम के बड़े-बड़े पेड़ उग आए हैं। उनकी जड़ें छतों और दीवारों को चीरते हुए रिकार्ड रूम तक पहुंच चुकी हैं, जिससे हर समय सीलन बनी रहती है और महत्वपूर्ण दस्तावेज लगातार खराब हो रहे हैं।
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सबसे चिंताजनक स्थिति मुख्य रिकार्ड कक्ष की है। यहां छत का प्लास्टर टूटकर गिर चुका है। लेंटर कमजोर पड़ गया है और लोहे के सरिये खुले दिखाई दे रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि काम के दौरान हर समय डर बना रहता है कि कहीं छत का कोई हिस्सा अचानक नीचे न आ गिरे। इसके बावजूद इसी भवन में रोज सरकारी काम हो रहा है और लोग अपने मुकदमों से जुड़े दस्तावेज लेने मजबूरी में यहां पहुंच रहे हैं।
खराब हो चुका है बहुत-सा रिकार्ड:
बरसात इस रिकार्ड रूम की सबसे बड़ी दुश्मन बन चुकी है। पुराने एसडीएम कार्यालय परिसर में शहर का सबसे अधिक जलभराव होता है। बारिश का पानी सीधे रिकार्ड रूम तक पहुंच जाता है। पानी से फाइलें बचाने के लिए कर्मचारी रैक की निचली अलमारियां खाली कर दस्तावेज ऊपर रखते हैं, लेकिन यदि कोई फाइल नीचे रह जाए तो उसके खराब होने की पूरी आशंका रहती है। कई-कई महीने तक बनी रहने वाली नमी ने हजारों पन्नों को कमजोर कर दिया है। अनेक फाइलों के कागज अपने आप टूटने और बिखरने लगे हैं।
बिजली, पानी और शौचालय का अभाव:
रिकार्ड का बड़ा हिस्सा धूल, मकड़ी के जालों और अंधेरे कमरों में पड़ा हुआ है। कई कमरों में पर्याप्त रोशनी तक नहीं है। बिजली की व्यवस्था नाममात्र की है, इसलिए कर्मचारी खिड़कियां खोलकर दिन के उजाले में काम करने को मजबूर हैं। पीने के पानी और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। अंधेरे और जर्जर कमरों में सांप-बिच्छुओं का खतरा अलग बना रहता है। ऐसे माहौल में काम कर रहे कर्मचारियों और दस्तावेज लेने आने वाले लोगों की सुरक्षा पूरी तरह भगवान भरोसे है।
रिकार्ड लेने पहुंचे मोहम्मद मुस्तकीम, रहमू और जुबैर ने कहा कि यह रिकार्ड रूम कम और खतरे का कमरा ज्यादा लगता है। उनका कहना है कि बदबू, सीलन, धूल, अंधेरा और टूटती छत के बीच कोई भी व्यक्ति सुरक्षित महसूस नहीं कर सकता। सवाल यह है कि जब कर्मचारियों और आम लोगों की जान ही सुरक्षित नहीं है, तो करोड़ों रुपये मूल्य के सरकारी रिकार्ड और हजारों न्यायिक फैसलों से जुड़े दस्तावेज कैसे सुरक्षित रहेंगे।
विडंबना यह है कि यह वही रिकार्ड है, जिसकी जरूरत वर्षों बाद भी अदालतों, प्रशासन और आम नागरिकों को पड़ती है। यदि यह दस्तावेज नष्ट हो गए तो अनेक मामलों में लोगों के अधिकार और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसके बावजूद अब तक इस रिकार्ड को सुरक्षित भवन में स्थानांतरित करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
जिला उपायुक्त अखिल पिलानी ने कहा कि यह इमारत जल्द ध्वस्त होगी, क्योंकि यहां जिला लाइब्रेरी प्रस्तावित है। प्रशासन जल्द ही वैकल्पिक स्थान पर नया रिकार्ड रूम स्थापित कर महत्वपूर्ण दस्तावेजों को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करेगा, ताकि कर्मचारियों और आमजन को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
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फोटो: जर्जर रिकार्ड रूम में रखा रिकार्ड हो रहा खराब।
फोटो: रिकार्ड रूम का खराब पड़ा शौचालय।
हजारों अदालती फैसलों का रिकार्ड खतरे में, खंडहर बनी इमारत में चल रहा रिकार्ड रूम छतों से झड़ रहा मलबा, बरसात में भर जाता है पानी, सीलन से गल रहीं फाइलें
दिनेश देशवाल
नूंह। जिन दस्तावेजों के आधार पर लोगों की जमीन, विरासत और राजस्व विवादों का भविष्य तय होता है, वे खुद सरकारी लापरवाही की भेंट चढ़ते दिख रहे हैं। नूंह में जिलाधीश, उपमंडल अधिकारी, जिला राजस्व अधिकारी और तहसीलदारों की अदालतों के हजारों फैसलों का रिकार्ड ऐसी जर्जर इमारत में रखा गया है, जिसकी छतें टूट रही हैं, दीवारों में दरारें पड़ चुकी हैं और बरसात में कमरों तक पानी भर जाता है। हालात इतने खराब हैं कि किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है, लेकिन प्रशासन वर्षों से खतरे को नजरअंदाज करता आ रहा है।
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सोमवार को अमर उजाला की टीम ने पुराने एसडीएम कार्यालय परिसर में बने राजस्व रिकार्ड रूम का निरीक्षण किया तो व्यवस्था की पोल खुलकर सामने आ गई।
छतों पर उगे पेड़ों की जड़ें पहुंची रिकार्ड रूम तक:
करीब 12 साल पहले जिला सचिवालय बनने के बाद इस भवन को खाली कर दिया गया था। इसके बाद रखरखाव के अभाव में यह भवन धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील हो गया। आज स्थिति यह है कि छतों पर पीपल और नीम के बड़े-बड़े पेड़ उग आए हैं। उनकी जड़ें छतों और दीवारों को चीरते हुए रिकार्ड रूम तक पहुंच चुकी हैं, जिससे हर समय सीलन बनी रहती है और महत्वपूर्ण दस्तावेज लगातार खराब हो रहे हैं।
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सबसे चिंताजनक स्थिति मुख्य रिकार्ड कक्ष की है। यहां छत का प्लास्टर टूटकर गिर चुका है। लेंटर कमजोर पड़ गया है और लोहे के सरिये खुले दिखाई दे रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि काम के दौरान हर समय डर बना रहता है कि कहीं छत का कोई हिस्सा अचानक नीचे न आ गिरे। इसके बावजूद इसी भवन में रोज सरकारी काम हो रहा है और लोग अपने मुकदमों से जुड़े दस्तावेज लेने मजबूरी में यहां पहुंच रहे हैं।
खराब हो चुका है बहुत-सा रिकार्ड:
बरसात इस रिकार्ड रूम की सबसे बड़ी दुश्मन बन चुकी है। पुराने एसडीएम कार्यालय परिसर में शहर का सबसे अधिक जलभराव होता है। बारिश का पानी सीधे रिकार्ड रूम तक पहुंच जाता है। पानी से फाइलें बचाने के लिए कर्मचारी रैक की निचली अलमारियां खाली कर दस्तावेज ऊपर रखते हैं, लेकिन यदि कोई फाइल नीचे रह जाए तो उसके खराब होने की पूरी आशंका रहती है। कई-कई महीने तक बनी रहने वाली नमी ने हजारों पन्नों को कमजोर कर दिया है। अनेक फाइलों के कागज अपने आप टूटने और बिखरने लगे हैं।
बिजली, पानी और शौचालय का अभाव:
रिकार्ड का बड़ा हिस्सा धूल, मकड़ी के जालों और अंधेरे कमरों में पड़ा हुआ है। कई कमरों में पर्याप्त रोशनी तक नहीं है। बिजली की व्यवस्था नाममात्र की है, इसलिए कर्मचारी खिड़कियां खोलकर दिन के उजाले में काम करने को मजबूर हैं। पीने के पानी और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। अंधेरे और जर्जर कमरों में सांप-बिच्छुओं का खतरा अलग बना रहता है। ऐसे माहौल में काम कर रहे कर्मचारियों और दस्तावेज लेने आने वाले लोगों की सुरक्षा पूरी तरह भगवान भरोसे है।
रिकार्ड लेने पहुंचे मोहम्मद मुस्तकीम, रहमू और जुबैर ने कहा कि यह रिकार्ड रूम कम और खतरे का कमरा ज्यादा लगता है। उनका कहना है कि बदबू, सीलन, धूल, अंधेरा और टूटती छत के बीच कोई भी व्यक्ति सुरक्षित महसूस नहीं कर सकता। सवाल यह है कि जब कर्मचारियों और आम लोगों की जान ही सुरक्षित नहीं है, तो करोड़ों रुपये मूल्य के सरकारी रिकार्ड और हजारों न्यायिक फैसलों से जुड़े दस्तावेज कैसे सुरक्षित रहेंगे।
विडंबना यह है कि यह वही रिकार्ड है, जिसकी जरूरत वर्षों बाद भी अदालतों, प्रशासन और आम नागरिकों को पड़ती है। यदि यह दस्तावेज नष्ट हो गए तो अनेक मामलों में लोगों के अधिकार और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसके बावजूद अब तक इस रिकार्ड को सुरक्षित भवन में स्थानांतरित करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
जिला उपायुक्त अखिल पिलानी ने कहा कि यह इमारत जल्द ध्वस्त होगी, क्योंकि यहां जिला लाइब्रेरी प्रस्तावित है। प्रशासन जल्द ही वैकल्पिक स्थान पर नया रिकार्ड रूम स्थापित कर महत्वपूर्ण दस्तावेजों को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करेगा, ताकि कर्मचारियों और आमजन को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।