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रियलिटी चेकः कोई तो बताए, कितनी रफ्तार से चलाएं वाहन

Thu, 05 Sep 2019 06:03 AM IST
दुष्यंत शर्मा नवनीत शरण, नई दिल्ली
नवनीत शरण, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 05 Sep 2019 06:03 AM IST
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reality check in delhi after new motor vehicle act 
चालान - फोटो : अमर उजाला

नए मोटर वाहन अधिनियम के तहत ओवरस्पीड के लिए जुर्माना राशि काफी बढ़ा दी गई है। ऐसे में वाहन चालकों की समस्या यह है कि साइन बोर्ड दिखें तो वह उस पर लिखी रफ्तार का पालन करें। दिल्ली में लगे साइन बोर्ड कहीं पेड़ के पत्तों में छुप गए हैं तो कहीं इनके सामने एक और बड़ा बोर्ड लगा दिया गया है। 

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लुटियन जोन की बात करें तो स्पीड साइन बोर्ड लगे हैं। इन पर व्यावसायिक वाहन के लिए 40 तो निजी वाहन के लिए 50 किलोमीटर प्रति घंटा की गति सीमा बताई गई है। इसी तरह रिंग रोड पर 50/60 स्पीड के साइन बोर्ड लगे हैं। अमर उजाला के रियलिटी चेक में इनमें कई खामियां नजर आईं।
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लक्ष्मीनगर से आईटीओ तीन किमी तक नहीं बोर्ड
विकास मार्ग पर स्थित लक्ष्मीनगर से आईटीओ की दूरी करीब तीन किलोमीटर है। सड़कें भी चौड़ी हैं। यहां वाहन तेज रफ्तार से चलाए जा सकते हैं। रात के वक्त इस सड़क पर अक्सर बाइक सवार स्टंट करते हैं। इसके बाद भी इस सड़क पर पूरे तीन किलोमीटर के स्ट्रेच में एक भी ऐसा साइन बोर्ड नहीं है, जिससे वाहन चालक रफ्तार को धीमी रख सकें। ऐसे में चालकों के सामने दुविधा रहती है कि ओवरस्पीड में चले तो चालान होगा, लेकिन सही स्पीड है क्या?
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विकास मार्ग पर पेड़ के पत्तों में छुपा है बोर्ड
विकास मार्ग से यमुनापार इलाके में वाहन से जा रहे हैं तो इस सड़क पर भी साढ़े तीन किलोमीटर तक नहीं पता चलेगा कि वाहन कितनी रफ्तार से चलाना है। आईटीओ से जैसे ही आगे बढ़ते हैं तो छोटा-सा साइन बोर्ड है, लेकिन वह पेड़ की पत्तियों में छुपा है। इस सड़क पर आगे चलने पर कई सड़कें भी मिलती हैं।

सिकंदर रोड पर अन्य बोर्ड ने ढका
मंडी हाउस से सिकंदर रोड की तरफ चलने पर राउंड एबाउट के ठीक आगे स्पीड साइन बोर्ड है, लेकिन इसके ठीक पहले एक बड़ा बोर्ड लगा हुआ है। ऐसे में यहां चालकों को कैसे पता चलेगा कि इस सड़क पर कितनी रफ्तार रखनी है।

सबसे खतरनाक चौराहा, पर बोर्ड गायब
गोल पोस्ट ऑफिस के आगे जैसे ही आप पंत मार्ग में प्रवेश करते हैं तो थोड़ी ही दूरी पर फिल्म डिविजन के कार्यालय के पास वाले चौराहे पर अक्सर दुर्घटनाएं होती हैं। इसके बाद भी पंत मार्ग से गुरुद्वारा रकाबगंज तक एक भी साइन बोर्ड नहीं दिखा। लोग यहां 80 किलोमीटर प्रति घंटा से भी ज्यादा स्पीड से वाहन दौड़ाते हैं।

दीन दयाल उपाध्याय रोड पर गिनती के बोर्ड
दीन दयाल उपाध्याय रोड पर आईटीओ से मिंटो ब्रिज तक आधा दर्जन सड़कें आकर मिलती हैं। जगह-जगह रेड लाइट तो लगी हैं, लेकिन इस सड़क पर भी साइन बोर्ड गिनती के हैं। यहां भी चालक दुविधा में रहते हैं कि कितनी स्पीड तक जुर्माने से बच सकेंगे
 

लुटियन दिल्ली में कुछ ठीक हैं हालात

लुटियन की दिल्ली में जगह-जगह साइन बोर्ड दिखे। गुरुद्वारा बंगला साहिब से अशोक रोड तक जगह-जगह ये दिखे। हालांकि, अशोक रोड से 200 मीटर तक कोई भी साइन बोर्ड नहीं मिला। इससे आगे बढ़ने पर 400 मीटर तक बोर्ड नहीं दिखा। यहां जयसिंह रोड से वाहन इस रोड पर मिलते हैं।

इंडिया गेट तक हर जगह रफ्तार सीमित रखने की चेतावनी लिखे साइन बोर्ड मिले। अब यह बात दीगर है कि यहां रफ्तार मापक यंत्र नहीं लगाए जाते हैं। जांच में जुटे एक ट्रैफिक इंस्पेक्टर की मानें तो इंटरसेप्टर आम तौर पर वैसी जगह लगाए जाते हैं, जहां खुली सड़क हो। रात के वक्त गुरुद्वारा बंगला साहिब के आसपास और इंडिया गेट पर बाइक सवार जमकर स्टंट करते हैं।

बाइक सवारों के लिए भ्रम के हालात
दिल्ली में साइन बोर्ड लगे जरूर हैं, लेकिन इन पर सिर्फ चार पहियों वाले वाहनों के लिए निर्देश हैं। दोपहिया वाहन चालक ऐसे में भला क्या समझें कि उनके लिए कोई गति सीमा है भी या नहीं।

क्या बोले वाहन चालक

जुर्माना राशि बढ़ने से आम आदमी परेशान हैं। इससे भ्रष्टाचार भी बढ़ेगा। गलती हर इंसान करता है। दिल्ली की सड़कों पर साइन बोर्ड पर निगाह रखें तो दुर्घटना होना तय है। यह बोर्ड सड़क के बायीं तरफ लगे हैं। अगर आप दायीं तरफ से गुजर रहे हैं तो बोर्ड दिखेगा भी नहीं।
- जीवन
नए नियम से दुर्घटनाएं कम होंगी। लोग कम-से-कम हेलमेट लगाकर तो चलेंगे। सरकार ने यह नियम अपने लिए नहीं, बल्कि रोज होने वाली दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए बनाया है। किसी की जान सुरक्षित रहे, इससे ज्यादा जरूरी क्या हो सकता है। 
- राजकुमार
कई बार लाल बत्ती से आगे निकलना मजबूरी हो जाती है। पीछे से जो वाहन आ रहे होते हैं, वह काफी रफ्तार में होते हैं। ऐसे में अचानक ब्रेक लगाएं तो दुर्घटना होने की आशंका रहती है। ऐसे में गलती नहीं भी करें तो भी भारी जुर्माना देना पड़ जाता है। 
- अजय शर्मा
पुलिस वाले और अधिक डराएंगे। साइन बोर्ड तो लगे हैं, लेकिन वाहन कम रफ्तार में चलाएं तो और पीछे से वाहन तेज रफ्तार में आ रहे हों तो क्या किया जाए। सरकार यह तो बताए। पहले सौ रुपये लेकर छोड़ देते थे, लेकिन अब इतना भारी जुर्माना कर देंगे कि देना मुश्किल हो जाएगा।
- सनाउल्ला

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