{"_id":"59c62c534f1c1b8b688b61f7","slug":"read-five-big-black-truth-related-to-ramleela-that-you-do-not-know","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"रामलीला से जुड़ी ऐसी 5 बड़ी बातें जिन्हें नहीं जानते होंगे आप","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रामलीला से जुड़ी ऐसी 5 बड़ी बातें जिन्हें नहीं जानते होंगे आप
Updated Sat, 23 Sep 2017 08:32 PM IST
विज्ञापन
डेमो पिक
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
21 सितंबर से शारदीय नवरात्र के साथ दस दिन तक चलने वाला दशहरा पर्व शुरू हो गया है। दशहरे में जान डालने का काम दस दिन पूर्व रामलीला के मंचन से शुरू हो जाता है। लेकिन बदलते दौर के साथ रामलीलाएं बड़ी चुनौती का सामना कर रही हैं। जहां रामलीला का उजला पक्ष सबके सामने है वहीं इसके स्याह पक्ष की ओर हमारा ध्यान ही नहीं जाता है।
आपको जानकर ताज्जुब हो सकता है क्योंकि ये सारी बातें आपने शायद सुनी भी न हो या यूं कह लिजिए कि आपका कभी इस ओर ध्यान ही न गया हो। दरअसल, ये सब हमारी आंखों के सामने होता रहा है और इसे अनदेखा करने की धारणा हमने अपने दिलों में पाल रखी है।
ये तस्वीर इस लिए दिखाई जा रही है क्योंकि ऐसा कर आने वाले कल में हम मुसीबतों को ही न्यौता देते हैं। फिलहाल, आज के इस परिदृश्य के आधार पर 5 बड़ी बातें सामने आई हैं जो रामलीला के पर्दे के पीछे छुपी इस काली सच्चाई को बयां कर रही है...
विज्ञापन
विज्ञापन
आपको जानकर ताज्जुब हो सकता है क्योंकि ये सारी बातें आपने शायद सुनी भी न हो या यूं कह लिजिए कि आपका कभी इस ओर ध्यान ही न गया हो। दरअसल, ये सब हमारी आंखों के सामने होता रहा है और इसे अनदेखा करने की धारणा हमने अपने दिलों में पाल रखी है।
विज्ञापन
ये तस्वीर इस लिए दिखाई जा रही है क्योंकि ऐसा कर आने वाले कल में हम मुसीबतों को ही न्यौता देते हैं। फिलहाल, आज के इस परिदृश्य के आधार पर 5 बड़ी बातें सामने आई हैं जो रामलीला के पर्दे के पीछे छुपी इस काली सच्चाई को बयां कर रही है...
विज्ञापन
रामलीला के पर्दे के पीछे छिपे पांच काले सच
सुल्तान पुरी मेला ग्राउंड में लगे फूड स्टाल
- फोटो : अमर उजाला
1.कमेटियों का कब्जा: रामलीला के पर्दे के पीछे सबसे पहला और सबसे बड़ा काला सच 'कमेटियों का कब्जा' है। हालांकि किसी भी रामलीला कमेटी का कोई भी पदाधिकारी इस पक्ष पर बोलने को तैयार नहीं हुआ और न ही इससे इंकार कर रहे हैं। आमतौर पर रामलीला जैसे जितने भी बड़े आयोजन होते हैं उन्हें ये कमेटियां ही कराती हैं। रामलीला के 10 दिनों के दौरान मेला स्थल के परिक्षेत्र में दुकानें लगवाने का काम कमेटियों के अधिकार क्षेत्र में ही होता है। बता दें कि ऐसे बड़े आयोजनों के दौरान इन्हीं दुकानों से मोटी कमाई भी होती है।
आयोजनकर्ता कमेटियों का इंटरेस्ट इसलिए ज्यादा बढ़ा है क्योंकि वे मेले में अपने ही स्टाल लगाकर कमाई करने में लग जाते हैं। अब जरा वो दौर याद किजिए जब इन्हीं मेलों के भरोसे दूर-दराज के व्यापारी आमदनी करने आते थे। क्या आज वो कल्चर जिंदा बचा है..? इन कमेटियों ने उनके लिए कोई जगह ही नहीं छोड़ी है। रामलीलाओं से जुड़े बड़े आयोजनों में सब जगह इन्हीं का छत्रप राज नजर आता है।
आयोजनकर्ता कमेटियों का इंटरेस्ट इसलिए ज्यादा बढ़ा है क्योंकि वे मेले में अपने ही स्टाल लगाकर कमाई करने में लग जाते हैं। अब जरा वो दौर याद किजिए जब इन्हीं मेलों के भरोसे दूर-दराज के व्यापारी आमदनी करने आते थे। क्या आज वो कल्चर जिंदा बचा है..? इन कमेटियों ने उनके लिए कोई जगह ही नहीं छोड़ी है। रामलीलाओं से जुड़े बड़े आयोजनों में सब जगह इन्हीं का छत्रप राज नजर आता है।
सुल्तान पुरी मेला ग्राउंड की तस्वीर
2.शोहदों का अड्डा: रामलीला जैसे आयोजन संस्कृति को जिंदा रखने के लिए होते हैं, लेकिन ये काला सच रामलीलाओं के साथ जुड़ गया है जिसे हम और आप जानते हुए अनदेखा कर देते हैं। रामलीला स्थल अब 'शोहदों के अड्डे' में तब्दील होने लगे है। ऐसा कोई मौका नहीं होता है जब किसी महिला या युवती के साथ छेड़छाड़ की घटना न होती हो। बड़ा सवाल ये है कि सुरक्षा होने के बावजूद आखिर ये शोहदे कैसे इन आयोजनों में आकर जम जाते हैं और किसी महिला या युवती के साथ छेड़छाड़ करके निकल जाते हैं।
सुल्तान पुरी मेला ग्राउंड में लगे झूले
- फोटो : अमर उजाला
3.सुरक्षा में चूक: रामलीला जैसे आयोजन कों लेकर आम जनता से लेकर आयोजनकर्ताओं तक को सुरक्षा को लेकर शिकायत रहती हैं। त्योहार के समय सुरक्षा तंत्र को जहां मजबूती से अपनी ड्यूटी निभानी चाहिए वहां तस्वीर ठीक इसके विपरित नजर आती है। हालांकि आयोजन से पहले प्रशासन यही कहता नजर आता है कि सारी तैयारियां कर ली गई है लेकिन जब आयोजन में भीड़ जुटती है तो सब अस्त-व्यस्त नजर आने लगता है। मेले ग्राउंड में दाखिल होने के लिए ही लंबी लाइने लगने लगती है। यही वजह है कि व्यापक भीड़ जुटने पर प्रशासन की तमाम योजनाएं धरी की धरी रह जाती है। और तो और हजारों की तादात में जमा हुए लोगों पर कुछ ही सुरक्षकर्मी तैनात होते हैं।
डेमो पिक
4.पार्किंग का अभाव: दिल्ली की सड़कों के जाम से तो सभी वाकिफ होंगे लेकिन क्या आप इस काले सच को जानते हैं जो सीधा रामलीला से जुड़ा है। दिल्ली के बड़े आयोजन स्थलों पर जहां कहीं रामलीला होती है वहां अमूमन पार्किंग की व्यवस्था पहले तय होनी चाहिए लेकिन व्यवहार में ऐसा नहीं होता। तभी मेला स्थल के आसपास भीषण जाम लगा मिलता है।
ramleela
5.फंडिग की पारदर्शिता: रामलीलाओं का आयोजन अपने आप में बड़ा काम है। स्वभाविक सी बात है कि ये खर्चीला भी है। ऐसे में कमेटियों ही इसका इंतजाम करती है और वही फंडिग भी करते हैं। आमतौर पर कमेटियां रसीद काट कर फंडिंग तो करती है लेकिन उस खर्च का ब्यौरा पारदर्शी नहीं है। कोई भी रामलीला कमेटी ऐसे खर्चों का ब्यौरा नहीं देती। ये सवाल अब इसलिए बड़ा हो गया है क्योंकि रामलीला को लेकर ट्रेंड बदल रहा है और बहुत बड़ी-बड़ी कमेटियां बन गई है जो इस आयोजन के नाम पर मोटा फंड इकट्ठा करती है।