पुरानी जगह पर ही बनेगा गुरु रविदास का स्थायी मंदिर, सुप्रीम कोर्ट ने दी इजाजत
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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के तुगलकाबाद में पुरानी जगह पर ही गुरु रविदास का पक्का (स्थायी) मंदिर बनाने की इजाजत दे दी। केंद्र सरकार ने पहले पोर्टाकेबिन (लकड़ी का केबिन) वाला मंदिर बनाने का सुझाव दिया था। जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने पूर्व कांग्रेस सांसद अशोक तंवर और प्रदीप जैन की उस याचिका को स्वीकार कर लिया, जिसमें पूर्व आदेश में बदलाव करने की गुहार लगाई गई थी। पूर्व आदेश में पोर्टाकेबिन में मंदिर बनाने की बात कही गई थी। पीठ ने सोमवार को कहा कि वह इस बात से सहमत है कि उस जगह पर स्थायी मंदिर बनाया जा सकता है।
याचिकाकर्ताओं के वकील विकास सिंह और विराग गुप्ता ने कहा कि उन्हें पोर्टाकेबिन मंजूर नहीं है। उन्होंने कहा कि अदालत ने पुरानी जगह पर स्थायी ढांचे का निर्माण करने की बात कही थी न कि पोर्टाकेबिन। शायद टाइपिंग में गलती या अन्य कारणों से आदेश में यह बात दर्ज नहीं है। लिहाजा आदेश में बदलाव किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने 21 अक्तूबर को पुरानी जगह पर ही फिर से मंदिर बनाने के केंद्र के प्रस्ताव को मान लिया था। मंदिर के पुनर्निर्माण को लेकर केंद्र को छह हफ्ते में एक कमेटी बनाने का निर्देश दिया था। पहले सरकार ने 200 वर्गमीटर जमीन देने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन बाद में वह 400 वर्गमीटर देने को तैयार हो गई थी। सरकार का कहना था कि वह जगह वन क्षेत्र के तहत आता है, लेकिन श्रद्धालुओं की भावना को देखते हुए वह जगह मंदिर के लिए दी जा सकती है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ढहाया गया था मंदिर
मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 10 अगस्त को संत रविदास मंदिर ढहा दिया गया था। उसके बाद दिल्ली समेत उत्तर भारत के कई स्थानों पर विरोध-प्रदर्शन हुए थे। प्रदर्शन से नाराज सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि कोर्ट के आदेश पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। सभी को इससे दूर रहना चाहिए।