दुर्लभ कैंसर सर्जरी कर बनाया रिकॉर्ड, विश्व का तीसरा सबसे बड़ा ट्यूमर निकाला
-एक महिला के पेट से निकली विश्व की तीसरी सबसे बड़ी 9.1 किलोग्राम की रसौली
-एक महिला के पेट से निकली
-अंडाशय के बाहर 3.5 किलोग्राम रसौली मिलने का भारत का पहला केस होने का दावा
-लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज कराने के लिए किया आवेदन
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद।
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मेडिकल पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित हो रही औद्योगिक नगरी में सर्वोदय अस्पताल के डॉक्टरों ने अंडाशय के दुर्लभ कैंसर से जूझ रही दो महिलाओं की सफल सर्जरी कर रिकॉर्ड बनाने का दावा किया है।
अस्पताल की ऑन्कोलॉजी विशेषज्ञ टीम ने 57 वर्षीय कमलेश कक्कड़ के अंडाशय से 9.1 किलोग्राम का ट्यूमर निकाला। 43 वर्षीय लक्ष्मी अंडाशय से बाहर 3.5 किलोग्रामी की रसौली की वजह से परेशान थीं।
अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि अंडाशय के बाहर इतनी बड़ी रसौली अभी भारत में नहीं निकाली गई। अस्पताल ने इस सर्जरी को लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड मे दर्ज कराने के लिए आवेदन किया है।
सर्जरी के बाद स्वस्थ हुई दोनों महिलाओं को पत्रकारों से रूबरू कराते हुए ऑन्कोलॉजी टीम के डॉ. सुमंत, डॉ. शिवम और डॉ. सीमा ने बताया कि महिलाओं में अंडाशय की रसौली होना आम बात है लेकिन यह दोनों केस अलग थे।
निकाला गया ट्यूमर विश्व में तीसरा सबसे बड़ा
डॉ़ सुमंत ने बताया कि विश्व में सबसे बड़ा ओवेरियन ट्यूमर 20 किलोग्राम और 16.7 किलोग्राम का रिकॉर्ड किया गया है। उन्होंने दावा किया कमलेश की ओवरी से निकाले गया ट्यूमर विश्व में तीसरा सबसे बड़ा है।
बताया कि जब दुबली-पतली कमलेश अस्पताल आर्ईं थीं तो उनका वजन मात्र 48 किलोग्राम था जबकि पेट का घेरा 46 इंच था। जांच में पाया गया कि उनके पेट में करीब नौ किलोग्राम के दो ट्यूमर हैं।
आधुनिक तकनीक से किए गए ऑपरेशन में महज एक यूनिट खून की जरूरत पड़ी वह भी मरीज के कम वजन की वजह से। सर्जरी के बाद कमलेश का वजन 36.5 किलोग्राम रह गया। सर्जरी के दूसरे दिन से ही वह चलने फिरने लगीं और छठे दिन उन्हें छुट्टी दे दी गई।
गायनॉकोलॉजिस्ट डॉ. सीमा ने बताया कि लक्ष्मी को पेट में दर्द, भारीपन की शिकायत के साथ अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जांच में उनके अंडाशय के बाहर करीब साढ़े तीन किलोग्राम वजनी रसौली पाई गई
उन्होंने बताया कि ओवेरियन ट्यूब के बाहर इतनी बड़ी रसौली की रिपोर्ट अभी तक भारत में कहीं से नहीं मिली है। इस तरह के विश्व में सिर्फ तीन केस ही दर्ज किए गए हैं भारत में यह पहला केस है।
डॉ. सुमंत ने बताया कि इस सर्जरी को लिम्का बुक और रिकॉर्ड में दर्ज कराने के लिए आवेदन किया गया है। चेयरमैन डॉ. राकेश गुप्ता ने बताया कि कैंसर के इलाज की बेहतरीन टीम अस्पताल में मौजूद है, इन सर्जरी के अलावा टीम अभी तक 25 मरीजों का बोन मेरो ट्रांसप्लांट कर चुकी है।