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फरीदाबाद: रैपिड जांच किट के तार को सुई समझ कर भागने लगे लोग, लिखित रिपोर्ट के लिए हुई बहस
Sun, 22 Nov 2020 09:18 AM IST
प्राची प्रियम
कैलाश गठवाल, फरीदाबाद
कैलाश गठवाल, फरीदाबाद
Published by: प्राची प्रियम
Updated Sun, 22 Nov 2020 09:18 AM IST
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जांच के लिए लोगों को समझाते पुलिसकर्मी
- फोटो : अमर उजाला
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कोरोना महामारी के बढ़ते मामलों को देखते हुए सरकार ने दिल्ली के साथ लगे बॉर्डर क्षेत्र में रैंडम जांच शिविर लगाना शुरू कर दिया है। शनिवार को जांच का दूसरा दिन था। पहले दिन के मुकाबले दूसरे दिन जांच कराने वालों की संख्या में इजाफा हुआ। 116 लोगों की जांच की गई, जिसमें से एक शख्स संक्रमित मिला। लोग जांच के नाम पर डर रहे थे।
पुलिस ने लोगों को जांच के लिए जागरूक किया। जो लोग बिना मास्क के जा रहे थे उन्हें भी कहा कि संक्रमण की जांच करवाओ या फिर चालान कटवाओ। इससे कुछ लोगों ने जांच कराई। हालांकि, कुछ स्वेच्छा से भी आगे आए।
शनिवार दोपहर 12 बजे से बीके अस्पताल की एंबुलेंस बदरपुर बॉर्डर पर जाकर तैनात हो गई। यहां उनके साथ सेक्टर-37 थाना पुलिस से चार पुलिसकर्मी भी मौजूद रहे। तीन घंटे तक चली जांच में 116 लोगों की जांच की गई जिसमें से केवल एक व्यक्ति संक्रमित पाया गया।
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बीके अस्पताल की टीम से एएनएम मीनाक्षी और लैब तकनीशियन तीरथ कुमार ने लोगों की जांच की। पहले दिन 62 लोगों की जांच की गई थी, जिसमें से दो लोग संक्रमित पाए गए थे। लोगों की जांच करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम को पुलिस का सहारा लेना पड़ता है। ज्यादातर लोग जांच नहीं कराना चाहते।
जांच रिपोर्ट की स्लिप के लिए हुई बहस
शनिवार को भी पुलिस ने अधिकतर उन्हीं लोगों को रोका जिन्होंने या तो मास्क नहीं लगा रखे थे या फिर जो ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन कर रहे थे। लोगों से कहा गया कि कोरोना जांच कराओ नहीं तो चालान कटेगा। ऐसे में लोग मजबूरी में भी जांच कराते नजर आए।
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पुलिस ने लोगों को जांच के लिए जागरूक किया। जो लोग बिना मास्क के जा रहे थे उन्हें भी कहा कि संक्रमण की जांच करवाओ या फिर चालान कटवाओ। इससे कुछ लोगों ने जांच कराई। हालांकि, कुछ स्वेच्छा से भी आगे आए।
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शनिवार दोपहर 12 बजे से बीके अस्पताल की एंबुलेंस बदरपुर बॉर्डर पर जाकर तैनात हो गई। यहां उनके साथ सेक्टर-37 थाना पुलिस से चार पुलिसकर्मी भी मौजूद रहे। तीन घंटे तक चली जांच में 116 लोगों की जांच की गई जिसमें से केवल एक व्यक्ति संक्रमित पाया गया।
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बीके अस्पताल की टीम से एएनएम मीनाक्षी और लैब तकनीशियन तीरथ कुमार ने लोगों की जांच की। पहले दिन 62 लोगों की जांच की गई थी, जिसमें से दो लोग संक्रमित पाए गए थे। लोगों की जांच करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम को पुलिस का सहारा लेना पड़ता है। ज्यादातर लोग जांच नहीं कराना चाहते।
जांच रिपोर्ट की स्लिप के लिए हुई बहस
शनिवार को भी पुलिस ने अधिकतर उन्हीं लोगों को रोका जिन्होंने या तो मास्क नहीं लगा रखे थे या फिर जो ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन कर रहे थे। लोगों से कहा गया कि कोरोना जांच कराओ नहीं तो चालान कटेगा। ऐसे में लोग मजबूरी में भी जांच कराते नजर आए।
कुछ लोग स्वेच्छा से भी जांच के लिए आगे आए, लेकिन रिपोर्ट की लिखित स्लिप लेने के लिए बहस करते हुए भी नजर आए। लोगों का कहना था कि रिपोर्ट की कॉपी साथ होगी तो बार-बार जांच नहीं करानी होगी।
कई कार्यालयों में और सफर के दौरान भी कोरोना की जांच रिपोर्ट मांगी जा रही है। ऐसे में लिखित रिपोर्ट होगी तो फायदा होगा। मौखिक रिपोर्ट से दूसरा व्यक्ति संतुष्ट नहीं होता दोबारा जांच करानी पड़ती है।
जांच किट के तार को सुई समझ कर भागने लगे लोग
कोरोना रैपिड जांच किट में एक लंबा तार होता है, जिसके ऊपर रुई लगाकर उसे नाक में डाला जाता है। नाक से सैंपल लेने के बाद उसे एक केमिकल में मिलाकर किट में दो बूंद डाली जाती है।
उसके बाद करीब 10 से 15 मिनट में रिपोर्ट आ जाती है। कुछ लोग उस तार को सुई समझकर भागने लगे। काफी समझाने के बाद कुछ ने जांच कराई और कुछ फिर भी बिना जांच के ही चले गए।
कई कार्यालयों में और सफर के दौरान भी कोरोना की जांच रिपोर्ट मांगी जा रही है। ऐसे में लिखित रिपोर्ट होगी तो फायदा होगा। मौखिक रिपोर्ट से दूसरा व्यक्ति संतुष्ट नहीं होता दोबारा जांच करानी पड़ती है।
जांच किट के तार को सुई समझ कर भागने लगे लोग
कोरोना रैपिड जांच किट में एक लंबा तार होता है, जिसके ऊपर रुई लगाकर उसे नाक में डाला जाता है। नाक से सैंपल लेने के बाद उसे एक केमिकल में मिलाकर किट में दो बूंद डाली जाती है।
उसके बाद करीब 10 से 15 मिनट में रिपोर्ट आ जाती है। कुछ लोग उस तार को सुई समझकर भागने लगे। काफी समझाने के बाद कुछ ने जांच कराई और कुछ फिर भी बिना जांच के ही चले गए।