'ताउम्र एक सदमे में रहेंगी गैंगरेप पीड़ित बच्चियां'
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मनौवैज्ञानिक डॉ. अरूणा ब्रूटा ने कहा कि दुष्कर्म की शिकार ढाई और पांच साल की बच्चियां ताउम्र एक सदमे में जीएंगी।
चाहे कितनी भी काउंसलिंग की जाए, उनका दर्द जिंदगी भर उन्हें एक डर और सदमे के साये में जीने को मजबूर करेगा। इस दर्द की भरपाई कोई नहीं कर सकेगा।
इस घटना का असर जीवन भर देखने को मिलता है। ऐसी बच्चियां कभी किसी पुरुष पर भरोसा नहीं कर पातीं। वे अपनी ही नजरों में इज्जत नहीं ला पाती हैं।
'कभी आंख मिलाकर नहीं कर पाते बात'
दूसरा वे इसे ईश्वर की नियति मान लेती हैं। ऐसे रोगी पेडफिल्य (बाल यौन शोषण) बीमारी से भी आगे होते हैं, जो कि मासूम बच्चियों को अपना निशाना बनाते हैं।
निठारी कांड का दोषी पेडफिल्य बीमारी से पीड़ित था। हालांकि इन मासूम बच्चियों के गुनहगार बेहद की गंभीर मानसिक रोगी हैं, जिनका खुद पर कंट्रोल नहीं रहता।
ऐसे व्यक्तित्व के लोग कभी आंख मिलाकर बात नहीं करते। उनकी मनोवृत्तियां सामान्य नहीं होती हैं। ऐसे रोगियों को अस्पताल में मानसिक इलाज की जरूरत होती है।