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Delhi NCR News: रामानुजन कॉलेज के प्राचार्य को किया निलंबित
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-कॉलेज की असिस्टेंट प्रोफेसर ने लगाया है उत्पीड़न और शत्रुतापूर्ण व्यवहार का आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के रामानुजन कॉलेज के प्राचार्य को उत्पीड़न और शत्रुतापूर्ण व्यवहार के आरोप की शिकायतों के बाद निलंबित कर दिया गया। प्राचार्य के खिलाफ मार्च 2025 में एक असिस्टेंट प्रोफेसर की ओर से शिकायत दी गई थी। उसके बाद प्रशासन ने यह कार्रवाई की है। हालांकि प्राचार्य ने अपने खिलाफ दर्ज शिकायत को सुनियोजित साजिश का हिस्सा बताया है।
प्राचार्य के खिलाफ मिली शिकायत की जांच के लिए समिति का गठन किया गया। उसके बाद तीन सदस्यों वाली गवर्निंग बॉडी पैनल ने जांच कर आरोपों में कुछ तथ्य होने की बात की। निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने तक निलंबन का अंतरिम निर्णय लिया गया। प्राचार्य ने अपने खिलाफ झूठी शिकायत, षड्यंत्र और उत्पीड़न के संबंध में सितंबर 2025 में डीयू कुलपति से लेकर पीएमओ शिकायत प्रकोष्ठ को पत्र भी भेजा था। इसमें उन्होंने इस पूरे प्रकरण को एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा बताया है।
पत्र के अनुसार मेरे खिलाफ उत्पीड़न और शत्रुता की झूठी शिकायत दर्ज कराई गई है। यह मुझे फंसाने और पद से हटाने का एक सुनियोजित प्रयास है। यह शिकायत पदोन्नति मामले में अधूरे दस्तावेजों के कारण विचार न करने पर तुरंत आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ द्वारा मार्च महीने में दर्ज कराई गई जो स्पष्ट रूप से शिकायत की प्रतिशोधात्मक और सोची-समझी प्रकृति को दर्शाता है। मुझ पर पदोन्नति के लिए अनैतिक दबाव डाला गया। ऐसा न करने पर मुझ पर यौन उत्पीड़न के मामले में फंसाने की धमकी दी गई। इस संबंध में कॉलेज प्राचार्य ने कहा कि उनके खिलाफ सभी आरोप मनगढ़त और पूरी तरह से निराधार है।
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प्राचार्य ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि यह कुर्सी की लड़ाई है। राजनीतिक रूप से प्रेरित दुर्भावनापूर्ण उत्पीड़न से बचाया जाएं। हैरानी की बात है कि शिकायत को यूजीसी नियमों के तहत और यौन उत्पीड़न रोकथाम कानून के तहत आंतरिक शिकायत समिति को भी नहीं भेजा गया बल्कि सीधे कॉलेज की गवर्निंग बॉडी के तत्कालीन अध्यक्ष और उसके बाद कुलपति को सौंपा गया। प्राचार्य ने कहा कि निलंबन से पहले उन्हें बर्खास्त करने और पद छोड़ने की धमकी भी दी गई थी।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के रामानुजन कॉलेज के प्राचार्य को उत्पीड़न और शत्रुतापूर्ण व्यवहार के आरोप की शिकायतों के बाद निलंबित कर दिया गया। प्राचार्य के खिलाफ मार्च 2025 में एक असिस्टेंट प्रोफेसर की ओर से शिकायत दी गई थी। उसके बाद प्रशासन ने यह कार्रवाई की है। हालांकि प्राचार्य ने अपने खिलाफ दर्ज शिकायत को सुनियोजित साजिश का हिस्सा बताया है।
प्राचार्य के खिलाफ मिली शिकायत की जांच के लिए समिति का गठन किया गया। उसके बाद तीन सदस्यों वाली गवर्निंग बॉडी पैनल ने जांच कर आरोपों में कुछ तथ्य होने की बात की। निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने तक निलंबन का अंतरिम निर्णय लिया गया। प्राचार्य ने अपने खिलाफ झूठी शिकायत, षड्यंत्र और उत्पीड़न के संबंध में सितंबर 2025 में डीयू कुलपति से लेकर पीएमओ शिकायत प्रकोष्ठ को पत्र भी भेजा था। इसमें उन्होंने इस पूरे प्रकरण को एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा बताया है।
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पत्र के अनुसार मेरे खिलाफ उत्पीड़न और शत्रुता की झूठी शिकायत दर्ज कराई गई है। यह मुझे फंसाने और पद से हटाने का एक सुनियोजित प्रयास है। यह शिकायत पदोन्नति मामले में अधूरे दस्तावेजों के कारण विचार न करने पर तुरंत आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ द्वारा मार्च महीने में दर्ज कराई गई जो स्पष्ट रूप से शिकायत की प्रतिशोधात्मक और सोची-समझी प्रकृति को दर्शाता है। मुझ पर पदोन्नति के लिए अनैतिक दबाव डाला गया। ऐसा न करने पर मुझ पर यौन उत्पीड़न के मामले में फंसाने की धमकी दी गई। इस संबंध में कॉलेज प्राचार्य ने कहा कि उनके खिलाफ सभी आरोप मनगढ़त और पूरी तरह से निराधार है।
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प्राचार्य ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि यह कुर्सी की लड़ाई है। राजनीतिक रूप से प्रेरित दुर्भावनापूर्ण उत्पीड़न से बचाया जाएं। हैरानी की बात है कि शिकायत को यूजीसी नियमों के तहत और यौन उत्पीड़न रोकथाम कानून के तहत आंतरिक शिकायत समिति को भी नहीं भेजा गया बल्कि सीधे कॉलेज की गवर्निंग बॉडी के तत्कालीन अध्यक्ष और उसके बाद कुलपति को सौंपा गया। प्राचार्य ने कहा कि निलंबन से पहले उन्हें बर्खास्त करने और पद छोड़ने की धमकी भी दी गई थी।