Rajendra Nagar: चौथे दिन भी जारी रहा छात्रों का प्रदर्शन, टॉर्च जलाकर किया विरोध प्रदर्शन
27 जुलाई को ओल्ड राजेंद्र नगर के राउ आईएएस कोचिंग सेंटर में हुए हादसे के बाद से धरने पर बैठे छात्रों को प्रदर्शन मंगलवार रात भी जारी रहा।
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27 जुलाई को ओल्ड राजेंद्र नगर के राउ आईएएस कोचिंग सेंटर में हुए हादसे के बाद से धरने पर बैठे छात्रों को प्रदर्शन मंगलवार रात भी जारी रहा। छात्रों ने इलाके के तमाम कोचिंग सेंटर को लेकर नारेबाजी की। कोचिंग सेंटर के सामने मोबाइल फोन की टॉर्च जलाकर विरोध प्रदर्शन किया है।
भूख हड़ताल पर बैठे छात्र, सड़क पर लगाई क्लास
राजनीतिक आरोपों-प्रत्यारोपों से निराश छात्रों ने इससे पहले दिन में भूख हड़ताल शुरू कर दी है। 10 छात्र मंगलवार दोपहर तीन बजे से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे गए। इन्होंने एलान किया कि जब तक इंसाफ नहीं मिलता, वह पीछे नहीं हटेंगे। छात्रों का आरोप है कि हादसे के बाद से इस मामले में केवल राजनीति हो रही है। इसमें छात्रों की समस्याओं का ठोस समाधान निकलने की उम्मीद नहीं दिख रही है। हादसे में तीन छात्रों की जान चली गई है। उधर, विरोध प्रदर्शन के साथ ही छात्रों ने राजेंद्र नगर में सड़क पर कक्षा भी लगाई। छात्रों का कहना है कि आने वाले महीनों में परीक्षाएं नजदीक होने से वह विरोध और पढ़ाई जारी रखेंगे।
भूख हड़ताल पर बैठी एक छात्रा ने बताया कि प्रशासन की लापरवाही से छात्रों की जिंदगी हमेशा खतरे में रहती है। अमूमन बेसमेंट की क्लास में 500-600 अभ्यर्थी पढ़ते हैं। इनकी सीढि़यां इतनी संकरी हैं, इतने छात्रों को बाहर निकलने में 20 मिनट से ज्यादा का वक्त लग जाता है। किसी एक की नहीं, सभी कोचिंग में यही आलम रहता है। पुलिस के साथ सामान्य प्रशासन के निचले स्तर पर काम करने वाले हर अधिकारी को इसका पता है। फिर भी दूसरा हादसा होने तक सब आंख मूंदे बैठे रहते हैं, इसलिए इस बार छात्रों ने तय किया है कि ठोस समाधान तक वह संघर्ष जारी रखेंगे।
एक अन्य छात्र ने बताया कि इतने बड़े हादसे के बाद भी दिल्ली सरकार या एमसीडी किसी ने कोई जिम्मेदारी नहीं ली। जितनी संख्या में छात्र लाइब्रेरी में पढ़ाई कर रहे थे, पानी भरने के साथ उनका एक साथ बाहर निकलना मुमकिन नहीं। ऐसे में कोचिंग संस्थान के साथ प्रशासन को सबूत के साथ यह भरोसा दिलाना चाहिए कि बाकी छात्र बाहर निकल आएं हैं। उनका भी कहना है कि हादसे के वक्त 8-8 एंबुलेंस आई थीं तो 8 एंबुलेंस तीन लोगों के लिए तो आएंगी नहीं। उनका सवाल है कि प्रशासन कुछ छिपा तो नहीं रहा है।
छात्रों का कहना है कि सुरक्षा के साथ उनको अपने भविष्य को लेकर भी चिंता है। जिन कोचिंग सेंटरों के बेसमेंट को सील किया गया है वह कोचिंग सेंटर अब फस्ट फ्लोर या सेकंड फ्लोर पर क्लास चलाते हैं ऐसे में उन क्लासों में स्टूडेंट को एडजस्ट किया जाए या फिर जब तक उनके पास व्यवस्था नहीं है तब तक ऑनलाइन क्लासेज भी शुरू हों।
पढ़ाई जारी रहेगी पर प्रदर्शन भी चलता रहेगा
बेसमेंट में क्लास बंद होने के बाद छात्रों ने खुली सड़क पर ही क्लास लगाना शुरू कर दिया। मंगलवार को छात्र खुले आसमान के नीचे किताबों व लैपटॉप के साथ पढ़ाई करते हुए दिखाई दिए। छात्र विशाल का कहना है कि हम यहां पढ़ने आए हैं, तो पढ़ाई जारी रहेगी लेकिन न्याय की मांग को लेकर हमारा प्रदर्शन भी चलता रहेगा। वहीं अन्य छात्र रवि रंजन ने कहा कि गरीब परिवार से आने वाले बच्चे दोबारा फीस भरने की स्थिति में नहीं हैं। ऐसे में उन्हें सड़क पर ही अपनी पढ़ाई करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
- मृतक छात्रों के परिजनों को तुरंत मिले 1-5 करोड़ रुपये का मुआवजा व सरकारी नौकरी
- छात्रों के लिए खुले सरकारी पुस्तकालय, बंद हों बेसमेंट में चल रहीं सभी लाइब्रेरी
- खराब सीवरेज व्यवस्था के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर हो सख्त कार्रवाई
- मृतकों की सही संख्या बताई जाए, मिले पूरी घटना की औपचारिक जानकारी
- बेसमेंट पुस्तकालय या कक्षा में पढ़ रहे छात्रों के लिए होनी चाहिए उपयुक्त व्यवस्था
- भ्रष्टाचार करने वाले कोचिंग सेंटर, आवास दिलवाने वाले पर हो सख्त कार्रवाई