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14 विधेयक वापस भेजने की खबर का राजनिवास ने किया खंडन

Sat, 25 Jun 2016 01:51 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 25 Jun 2016 01:51 AM IST
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Raj Niwas denied the news of 14 bill back to delhi government
नजीब जंग - फोटो : फ़

केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा दिल्ली सरकार के 14 बिल वापस भेजने की खबर का उपराज्यपाल कार्यालय (राजनिवास) ने खंडन किया है। खबर आ रही थी कि केंद्र सरकार ने दिल्ली विधानसभा से पास लोकपाल विधेयक, मंत्री-विधायकों के वेतन संबंधी बिल समेत 14 बिल यह कहकर वापस किए हैं कि बिना गृह मंत्रालय की पूर्व अनुमति के विधेयक पास करने का अधिकार नहीं है। फिर से विधेयक प्रक्रियागत तरीके से भेजें।

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सोशल मीडिया पर इस खबर के तुरंत बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर निशाना साधने वाले पांच ट्वीट किए। केजरीवाल ने कहा-10 बार तो प्रक्रिया पूरी कर कर के भेज दी।
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उनकी नीयत ही नहीं है बिल पास करने की। हर काम में टांग अड़ा रहे हैं। केजरीवाल ने अगले ट्वीट में लिखा, मोदी जी का नारा- न काम करूँगा, न करने दूंगा। फिर केजरीवाल ने कुछ सवाल भी दागे।

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थोड़ा बड़ा दिल कीजिए मोदी जी

Raj Niwas denied the news of 14 bill back to delhi government
नजीब जंग और केजरीवाल

केजरीवाल ने कहा, क्या दिल्ली की चुनी विधानसभा को कानून पास करने का अधिकार नहीं होना चाहिए। क्या केंद्र को दिल्ली के हर कानून को रोकने का अधिकार होना चाहिए। क्या केंद्र दिल्ली सरकार का हेडमास्टर है।

मुख्यमंत्री ने यहां तक कहा कि मोदी जी से फिर से हाथ जोड़ कर निवेदन है कि -थोड़ा बड़ा दिल कीजिए, दिल्ली की हार को भुला दीजिए और इस तरह से दिल्ली के लोगों से बदला मत लीजिए।

उल्लेखनीय है कि दिल्ली विधानसभा की बैठक में अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि मोदी जी हमारे बिल पास नहीं कर सकते तो हमें वापस भेज दीजिए। हम सभी बिल फिर से प्रक्रियागत तरीके से भेज देंगे। लेकिन दबाकर मत बैठिए।

ये बिल हैं लंबित

Raj Niwas denied the news of 14 bill back to delhi government
द‌िल्ली व‌िधानसभा - फोटो : ani

-दिल्ली लोकपाल विधेयक, जिसमें सख्त कानून बनाकर कई पहलुओं को शामिल किया गया।
-प्राइवेट स्कूल फीस और दाखिले में पारदर्शिता से जुड़ा बिल।
-नो डिटेंशन पॉलिसी, जिसमें पहली से आठवीं तक फेल नहीं करने की नीति में बदलाव सुझाए गए हैं।
-सिटीजन चार्टर बिल में समय पर काम नहीं करने वाले अधिकारियों पर जुर्माना लगाने, बिना उपभोक्ता के मांगे वेतन काटकर चुकाने का प्रावधान है।
-दिल्ली का न्यूनतम मजदूरी विधेयक, जिसमें न्यूनतम मजदूरी नहीं दिए जाने समेत श्रम कानून के उल्लंघन पर सख्त सजा का प्रावधान है।
-वर्किंग जर्नलिस्ट बिल में मजीठिया आयोग की सिफारिशों को लागू करने के अलावा कुछ अन्य पहलू शामिल।
-नेताजी सुभाष प्रौद्योगिकी संस्थान को विश्वविद्यालय बनाने का बिल, इससे सीटें बढ़ेंगी।
-विधानसभा अध्यक्ष, मुख्यमंत्री, मंत्री और विधायकों के वेतन वृद्धि संबंधी बिल, जो एक बार केंद्र सरकार से पहले भी वापस आ चुका है। इसमें छह बिल हैं।
-अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में संशोधन का बिल, जिसमें मजिस्ट्रेट जांच सरकार अपनी इच्छानुसार कराने का अधिकार चाहती है।

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