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कोहरे में रेलवे एक बार फिर पटाखे से ही देखेगा ट्रैक, त्रि-नेत्र योजना खटाई में 

Fri, 06 Dec 2019 03:54 AM IST
दुष्यंत शर्मा नवनीत शरण, नई दिल्ली
नवनीत शरण, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 06 Dec 2019 03:54 AM IST
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Railways will once again see the track in fog with help of detonator blast
डेटोनेटर (प्रतीकात्मक चित्र) - फोटो : अमर उजाला

रेलवे को रेल संचालन के लिए तकनीक के बजाय इस साल भी परंपरागत डेटोनेटर (पटाखा) का सहारा लेना होगा। कारण, इस दिशा में रेलवे की कोई योजना अभी तक धरातल पर नहीं उतरी है। 

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कोहरे के कारण इस साल भी ट्रेनों की दूरी घटाने, पूरे सप्ताह चलने वाली ट्रेनों को सप्ताह में दो दिन या तीन दिन निरस्त करने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। लंबी दूरी की अन्य ट्रेन को अपने नियत समय पर चलाने के लिए रेलवे यह कदम उठा सकता है। नतीजतन इस साल भी मुसाफिरों को मुश्किल का सामना करना पड़ेगा। 
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हालांकि इस साल 12,205 फॉग पास डिवाइस लोको को उपलब्ध कराई गईं जो लोको पायलटों को कोहरे के मौसम में ट्रेन चलाने में कुछ हद तक सहायक होगी।

उत्तर भारत में घने कोहरे के आगे एक बार फिर रेलवे की तैयारी विफल साबित होने वाली है। अभी कोहरे की मार पड़ी भी नहीं है फिर भी ट्रेनों की रफ्तार धीमी होने लगी है। ना तो त्रि-नेत्र डिवाइस का ही सफल परीक्षण हो पाया और ना ही कोई आधुनिक यंत्र बन पाया। 
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रेलवे का दावा था कि त्रि-नेत्र डिवाइस उच्च रिजुलुशन ऑप्टिकल वीडियो कैमरा, उच्च संवेदनशील इंफ्रारेड वीडियो कैमरा से निर्मित, रडार आधारित भू-भागीय मानचित्रण प्रणाली से लैस डिवाइस है जो घने कोहरे में भी ट्रेन के ड्राइवरों को बेहतर दृश्यता उपलब्ध कराएगी। 

कोहरे, भारी बारिश, धूप अंधेरी रात में भी लोकोमोटिव पायलटों को ट्रैक पर फंसे वाहनों, पेड़ों, बोल्डरों की जानकारी देगा लेकिन यह योजना भी फाइलों में ही है। इसी तरह ट्रेन प्रोटेक्शन वार्निंग सिस्टम (टीपीडब्ल्यूएस), ट्रेन कोलिजन एवायडेंस सिस्टम (टीसीएएस) तकनीकों का भी अभी पायलट परीक्षण ही चल रहा है। 


रेलवे का दावा है कि कोहरे के कारण ट्रेनों की लेटलतीफी में कमी आ रही है। फॉग पास उपकरण से लोको पायलट सुरक्षित तरीके से ट्रेन चला रहे हैं। पिछले साल घने कोहरे के कारण काफी कम ट्रेनें लेटलतीफी का शिकार हुई थीं। 

कोहरे के कारण लेट से चलने वाली ट्रेनों की स्थिति
वर्ष                      लेट से चलने वाली ट्रेनों का प्रतिशत
2016-17            20.51 प्रतिशत ट्रेन लेट 
2017-18            12.13 प्रतिशत ट्रेन लेट 
2018-19            5.38 प्रतिशत ट्रेन लेट 

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