पढ़ी-लिखी पंचायत से बदलेगी गांव की तस्वीर
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गुड़गांव मंडल के छह जिलों के 15 हजार से अधिक पंचों ने मंगलवार को पद और
साथ ही पंचों को विकास की नसीहत देते हुए गांवों की तस्वीर बदलने की उम्मीद जताई। धनखड़ ने कहा कि पंच अपने गांव, वार्ड में विकास की शुरुआत अभी से करें।
केंद्र व प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों का लाभ हर व्यक्ति को मिले, इसके लिए सजग प्रहरी के रूप में अपनी भागीदारी निभाएं।
लोगों, फसलों व जानवरों के बीमा पर जोर देते हुए पंचों को इसकी जिम्मेदारी निभाने को कहा। उन्होंने कहा कि अब गांव का विकास की जिम्मेदारी पंच-सरपंच की है।
इसके लिए सभी भेदभाव छोड़कर विकास में जुट जाएं। जनता ने जो पांच साल दिए है, उसका सार्थक इस्तेमाल करें। वहीं लोक निर्माण एवं जनस्वास्थ्य मंत्री नरबीर सिंह ने चुने गए पंचों से सड़कों पर पानी नहीं बहाने की अपील की।
शपथ ग्रहण समारोह में पहुंचने वाले सभी अतिथियों को जिला प्रशासन की ओर से स्मृति चिन्ह भेंट किए गए। इस अवसर पर हरियाणा हाउसिंग बोर्ड के चेयरमैन जवाहर यादव, भाजपा प्रदेश प्रवक्ता सूरजपाल अमू, भाजपा के गुड़गांव जिलाध्यक्ष भूपेंद्र चौहान, रेवाड़ी जिलाध्यक्ष सतीश खोला के साथ ही फरीदाबाद के उपायुक्त चंद्रशेखर व गुड़गांव के अतिरिक्त उपायुक्त विनय प्रताप सिंह मौजूद रहे।
समारोह में जुटे तीन मंत्री प्रदेश सरकार को जन हितैषी साबित करने में जुटे रहे और अप्रत्यक्ष रूप से विपक्ष पर निशाना साधा। पंचों को संबोधित करते हुए सभी मंत्रियों ने कहा कि जनता ने पढ़ी-लिखी पंचायत चुनकर साबित कर दिया कि सरकार सही थी।
कृषि
मंत्री ओम प्रकाश धनखड़ ने कहा कि हरियाणा के हित के लिए सरकार ने पंजाब
एवं हरियाणा हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट तक आपका पक्ष रखा।
प्रतिनिधियों की
योग्यता निर्धारण के फैसले को हर स्तर पर सही पाया गया और सर्वोच्च
न्यायालय के दस बड़े सफलतम फैसलों में हरियाणा में पढ़ी लिखी पंचायतें होने
का निर्णय शामिल हुआ।
वहीं शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा ने कहा कि पढ़ी
लिखी पंचायत विपक्ष के लिए करारा जवाब है, जो इसे लेकर हो-हल्ला मचा रहे
थे।
आरक्षण से अधिक चुनी गईं महिलाएं
पंचायत
चुनाव में इस बार महिलाएं तय आरक्षण से अधिक आईं। महिलाओं के लिए 33
प्रतिशत आरक्षण रखा गया था लेकिन जिला परिषद में 43 प्रतिशत, पंचायत समिति
में 42 प्रतिशत, सरपंच पद पर 41 प्रतिशत तथा पंच पद पर 38 प्रतिशत महिलाएं
चुनी गई हैं।
हरियाणा में इस बार 64 प्रतिशत पंच
निर्विरोध चुने गए, जिनमें अनुसूचित जातियों के लिए निर्धारित 20 प्रतिशत
आरक्षण में जिला परिषद में 23 प्रतिशत, पंचायत समिति में 27 प्रतिशत, सरपंच
के लिए 24 प्रतिशत तथा पंच पद के लिए 25 अनुसूचित जाति के प्रतिनिधि चुने
गए।
पांच महीने दी जाएगी विशेष ट्रेनिंग
पढ़ी-लिखी पंचायत की ‘छोटी सरकार’ को विकास का सलीका सिखाया
जाएगा। इसके लिए प्रदेश सरकार इन्हें पांच महीने ट्रेनिंग देगी। नए
पंच-सरपंच को गांवों के ई-मैनेजमेंट का पाठ पढ़ाया जाएगा।
देश के लिए मॉडल
बन चुके गांवों को नए सरपंचों के सामने रखकर प्रेरित किया जाएगा। यह
जानकारी कृषि एवं पंचायत राज मंत्री ओपी धनखड़ ने दी।
उन्होंने
बताया कि पहले भी पंच-सरपंच को 05 दिन की ट्रेनिंग दी जाती थी, लेकिन अब
पांच महीने की ट्रेनिंग होगी। इसके लिए पूरा मॉड्यूल तैयार किया गया है।
जिसमें छोटी सरकार के नुमाइंदों को पंचायत राज अधिनियम के तहत उनकी
शक्तियां, गांवों के लिए केंद्र व प्रदेश सरकार की योजनाएं, डिजिटल
गांव, नई योजनाओं आदि के बारे में बताया जाएगा।
ग्रामीण
विकास संस्थान की ओर से देशभर से करीब 30 प्रेरणादायक वीडियो क्लिप
दिखाया जाएगा और मॉडल गांवों के सरपंच को बुलाया गया है।
इसके अलावा
सरपंचों को लीडरशिप, प्रशासनिक काम, वर्क कल्चर, ग्रामीण
विकास और वित्तीय प्रबंधन के बारे में भी प्रशिक्षण दिया जाएगा।
डिजिटल
इंडिया के तर्ज पर तैयार डिजिटल गांव के लिए सभी पंच-सरपंचको कंप्यूटर का
प्रशिक्षण भी देने का निर्णय ग्रामीण विकास विभाग ने लिया
है।
उन्होंने बताया कि पंच-सरपंच व जिला पंचायत के अन्य सदस्यों को
यूनिवर्सिटी में प्रशिक्षण दिलाने के लिए
शिक्षा विभाग को पत्र लिखा गया है।