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Delhi NCR News: डीयू में प्रदर्शन और जुलूस पर एक महीने के लिए लगी रोक, विरोध में आए संगठन
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-यूजीसी इक्विटी को लेकर 13 फरवरी को नॉर्थ कैंपस के आर्ट फैकल्टी के बाहर हुआ था जबरदस्त हंगामा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) परिसर में एक महीने के लिए किसी भी तरह की सार्वजनिक सभा, जुलूस और प्रदर्शन पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। इस संबंध में विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर प्रो. मनोज कुमार ने छात्रों, फैकल्टी सदस्यों और स्टाफ को सूचित करने के लिए आदेश जारी किया है। इस आदेश को मंगलवार से ही लागू कर दिया गया है। प्रो. मनोज कुमार के अनुसार यह आदेश इस जानकारी के आधार पर जारी किया गया है कि डीयू परिसर में बिना रोक-टोक के सार्वजनिक समारोहों, जुलूस या प्रदर्शन से ट्रैफिक में रुकावट, इंसानी जान को खतरा और जनशांति भंग हो सकती है। पहले भी आयोजक अक्सर ऐसे छात्र विरोध प्रदर्शनों को नियंत्रित करने में असफल रहे हैं। जिससे विश्वविद्यालय परिसर में कानून-व्यवस्था बिगड़ रही है।
डीयू ने पुलिस के आदेश का दिया हवाला
प्रॉक्टर ने आदेश में सब डिविजन सिविल लाइंस के असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस के 26 दिसंबर 2025 वाले आदेश का हवाला दिया है। जिसमें गृह मंत्रालय की अधिसूचना का विवरण दिया गया है। इसमें विश्वविद्यालय परिसर में किसी भी सार्वजनिक सभा, रैली, धरने प्रदर्शन, आंदोलन और किसी भी ऐसी गतिविधि पर रोक के आदेश है जिससे आम लोगों की शांति और यातायात की आवाजाही प्रभावित हो।
आदेश को लेकर विरोध शुरू
डीयू के आदेश को लेकर शिक्षकों और छात्रों ने विरोध दर्ज कराया है। डीयू कार्यकारी परिषद के सदस्य मिथुराज धुसिया ने कहा कि यह आदेश लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। यह सच है कि सरकार, विश्वविद्यालय और इसके संबद्ध कॉलेजों की गलत नीतियों के खिलाफ सभी विरोध प्रदर्शन और आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण होने चाहिए और यह सुनिश्चित करना विश्वविद्यालय का कर्तव्य है।
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आंदोलनों पर रोक लगाना स्वीकार्य नहीं
हालांकि, विश्वविद्यालय में यातायात अवरोध आदि के बहाने विरोध प्रदर्शनों और आंदोलनों पर रोक लगाना बिलकुल भी स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि क्या विश्वविद्यालय प्रशासन विश्वविद्यालय विभागों में नियुक्तियों में बड़ी संख्या में गैर-वित्तीय मामलों या एनईपी की विफलता, यूजीसी इक्विटी बिल या विश्वविद्यालय के शिक्षकों के निलंबन के मामलों के खिलाफ सार्वजनिक सभाओं और आंदोलनों को नहीं चाहता है।
छात्रों की आवाज को दबाने का प्रयास
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) दिल्ली राज्य के सचिव अभिज्ञान ने कहा कि डीयू का यह आदेश छात्रों की आवाज को दबाने का प्रयास है। परिसर में हिंसा करने वालों को भगा दिया जाता है और उन पर कार्रवाई करने की जगह प्रदर्शन और जुलूस पर रोक लगाई जाती है।
नॉर्थ कैंपस में दो दिन हुआ था हंगामा
12 फरवरी को आर्ट फैकल्टी के बाहर छात्रों के आयोजित कार्यक्रम में एक प्रोफेसर पर पानी और डस्टबिन फेंकने का मामला सामने आया था। फिर अगले दिन 13 फरवरी को यूजीसी इक्विटी को लेकर आर्ट फैकल्टी पर प्रदर्शन के दौरान जमकर नारेबाजी और हंगामा हुआ। हालात मारपीट तक पहुंच गए थे। जिसके बाद छात्रों ने मौरिस नगर थाने के बहार भी विरोध दर्ज कराया था। इस मामले में पुलिस ने दोनों पक्षों की ओर से क्रॉस एफआईआर दर्ज की थी। वहीं परिसर में हुए हंगामे को लेकर डीयू कुलपति योगेश सिंह ने घटना की निंदा और चिंता व्यक्त की थी।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) परिसर में एक महीने के लिए किसी भी तरह की सार्वजनिक सभा, जुलूस और प्रदर्शन पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। इस संबंध में विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर प्रो. मनोज कुमार ने छात्रों, फैकल्टी सदस्यों और स्टाफ को सूचित करने के लिए आदेश जारी किया है। इस आदेश को मंगलवार से ही लागू कर दिया गया है। प्रो. मनोज कुमार के अनुसार यह आदेश इस जानकारी के आधार पर जारी किया गया है कि डीयू परिसर में बिना रोक-टोक के सार्वजनिक समारोहों, जुलूस या प्रदर्शन से ट्रैफिक में रुकावट, इंसानी जान को खतरा और जनशांति भंग हो सकती है। पहले भी आयोजक अक्सर ऐसे छात्र विरोध प्रदर्शनों को नियंत्रित करने में असफल रहे हैं। जिससे विश्वविद्यालय परिसर में कानून-व्यवस्था बिगड़ रही है।
डीयू ने पुलिस के आदेश का दिया हवाला
प्रॉक्टर ने आदेश में सब डिविजन सिविल लाइंस के असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस के 26 दिसंबर 2025 वाले आदेश का हवाला दिया है। जिसमें गृह मंत्रालय की अधिसूचना का विवरण दिया गया है। इसमें विश्वविद्यालय परिसर में किसी भी सार्वजनिक सभा, रैली, धरने प्रदर्शन, आंदोलन और किसी भी ऐसी गतिविधि पर रोक के आदेश है जिससे आम लोगों की शांति और यातायात की आवाजाही प्रभावित हो।
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आदेश को लेकर विरोध शुरू
डीयू के आदेश को लेकर शिक्षकों और छात्रों ने विरोध दर्ज कराया है। डीयू कार्यकारी परिषद के सदस्य मिथुराज धुसिया ने कहा कि यह आदेश लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। यह सच है कि सरकार, विश्वविद्यालय और इसके संबद्ध कॉलेजों की गलत नीतियों के खिलाफ सभी विरोध प्रदर्शन और आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण होने चाहिए और यह सुनिश्चित करना विश्वविद्यालय का कर्तव्य है।
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आंदोलनों पर रोक लगाना स्वीकार्य नहीं
हालांकि, विश्वविद्यालय में यातायात अवरोध आदि के बहाने विरोध प्रदर्शनों और आंदोलनों पर रोक लगाना बिलकुल भी स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि क्या विश्वविद्यालय प्रशासन विश्वविद्यालय विभागों में नियुक्तियों में बड़ी संख्या में गैर-वित्तीय मामलों या एनईपी की विफलता, यूजीसी इक्विटी बिल या विश्वविद्यालय के शिक्षकों के निलंबन के मामलों के खिलाफ सार्वजनिक सभाओं और आंदोलनों को नहीं चाहता है।
छात्रों की आवाज को दबाने का प्रयास
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) दिल्ली राज्य के सचिव अभिज्ञान ने कहा कि डीयू का यह आदेश छात्रों की आवाज को दबाने का प्रयास है। परिसर में हिंसा करने वालों को भगा दिया जाता है और उन पर कार्रवाई करने की जगह प्रदर्शन और जुलूस पर रोक लगाई जाती है।
नॉर्थ कैंपस में दो दिन हुआ था हंगामा
12 फरवरी को आर्ट फैकल्टी के बाहर छात्रों के आयोजित कार्यक्रम में एक प्रोफेसर पर पानी और डस्टबिन फेंकने का मामला सामने आया था। फिर अगले दिन 13 फरवरी को यूजीसी इक्विटी को लेकर आर्ट फैकल्टी पर प्रदर्शन के दौरान जमकर नारेबाजी और हंगामा हुआ। हालात मारपीट तक पहुंच गए थे। जिसके बाद छात्रों ने मौरिस नगर थाने के बहार भी विरोध दर्ज कराया था। इस मामले में पुलिस ने दोनों पक्षों की ओर से क्रॉस एफआईआर दर्ज की थी। वहीं परिसर में हुए हंगामे को लेकर डीयू कुलपति योगेश सिंह ने घटना की निंदा और चिंता व्यक्त की थी।