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दिल्ली में फिल्म पद्मावत की रिलीज के विरोध में हुआ प्रदर्शन

Sun, 21 Jan 2018 05:08 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 21 Jan 2018 05:08 PM IST
सार

पुलिस ने रोकी विरोधी रैली 

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protest against releasing of film padmawat in delhi

विस्तार

संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावत की रिलीज होने से पहले ही देश भर में इसका विरोध एक बार फिर शुरू हो गया है। रविवार को पूर्वी दिल्ली के मंडोली क्षेत्र में फिल्म के विरोध में आयोजित क्षत्रीय समाज की विरोध रैली को पुलिस ने सड़क पर नहीं उतरने दिया। रैली  मंडोली  से शुरू होकर पूरे दिल्ली-एनसीआर में अयोजित करने की योजना थी।  

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रैली की सूचना पुलिस को पहले ही थी। अशोक नगर फ्लाईओवर को पास सुबह से ही भारी पुलिसबल तैनात कर दिया गया था। रैली स्‍थल पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह रोक दी गई व संदिग्‍ध लोगों को रोककर पुलिस ने पूछताछ भी की। 
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सूत्रों के मुताबिक, रैली में मौजूद लोगों द्वारा मुख्य सड़क को जामकर हिंसक प्रदर्शन करना था। मौके पर मौजूद एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि पुलिस-प्रशासन से विरोध रैली की कोई परमिशन नहीं ली गई थी। 
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रैली में क्षेत्र के लोगों के अलावा आसपास के क्षेत्रों से भी लोग पहुंचे थे। शांति भंग होने की आंशका के चलते सुबह से ही पुलिस ने घेराबंदी कर दी थी। मौके पर मौजूद क्षत्रीय समाज के जितेन्द्र तोमर, गौतम रावल, विनोद, राहुल राणा, दिनेश राठौर, कृष्‍णा आदि का कहना था कि वह फिल्म का प्रदर्शन नहीं होने देंगे, कोई भी सिनेमा अगर फिल्म को लगाता है, तो वहां फिल्म चलने नहीं दी जाएगी। 

अलका लांबा ने राष्ट्रपति पर उठाए सवाल

protest against releasing of film padmawat in delhi
alka lamba

राष्ट्रपति द्वारा अयोग्य घोषित होने वाले आप विधायकों में से एक अलका लांबा ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि राष्ट्रपति ने इतनी जल्दबाजी में और हमें अपना पक्ष रखे बिना फैसला सुना दिया। केंद सरकार ने अपने फायदे के लिए संवैधानिक संस्था का इस्तेमाल किया है। हमें न्यायपालिका पर भरोसा है। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के दरवाजे हमारे लिए खुले हैं।

जबकि भाजपा नेता मीनाक्षी लेखी ने कहा कि राज्य सभा के ‌लिए उम्मीदवारों का नामांकन प्रकिया संपन्न होना इस बात का साफ संकेत करता है कि चुनाव आयोग अपने ढंग से काम कर रही है इसलिए अरविंद केजरीवाल का चुनाव आयोग पर आरोप लगाने का कोई मतलब नहीं है। ये सभी संवैधानिक संस्थाएं है और इनके लिए कानून का पालन करना अनिवार्य है।

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