रेलवे रिजर्वेशन:‘जुगाड़’ से चल रहा है काम
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रेल बजट में रिजर्वेशन और ई-टिकट के लिए खास इंतजाम करने की घोषणा के बावजूद टिकट बुक कराने वालों को कोई राहत नहीं मिल सकी है। लाइनें डबल करने के बाद भी रेलवे के सर्वर की सुस्त चाल में भी कोई सुधार नहीं हुआ है।
ई-टिकट कराने वालों का भी मुसीबत पीछा नहीं छोड़ रही है। आज भी रिजर्वेशन काउंटर पर लोगों की लंबी कतार लग रही है।
25 लाख की आबादी वाले गुड़गांव में रिजर्वेशन काउंटर पर महज चार खिड़कियां हैं। सुबह से लेकर शाम तक इन खिड़कियों पर चार से पांच कर्मचारी सैकड़ों यात्रियों से जूझते रहते हैं।
क्यों है इतना बुरा हाल?
कहने को तो यहां छह कंप्यूटर सिस्टम हैं, लेकिन दो लंबे समय से खराब हैं। जो ठीक है, उन्हें भी जुगाड़ से चलाया जा रहा है। पेन के सहारे तारों को सिस्टम में फिट किया गया है। एक कर्मचारी ने उस ओर इशारा कर कहा कि ऐसे हालातों में बेहतर काम कैसे संभव है?
टिकट कराने वालों की बढ़ती संख्या के बीच रेलवे का सर्वर हमेशा परेशान करता है। परेशानी दूर करने के लिए इस बजट में लाइनों को बढ़ाकर दोगुना कर दिया गया, फिर भी दिक्कतें दूर नहीं हुईं। रेलवे के एक कर्मचारी ने बताया कि दिन में कई बार सर्वर के कारण काम बीच में बंद करना पड़ता है। जिसका गुस्सा यात्री उन पर उतारते हैं।
पेशे से मैकेनिकल इंजीनियर निखिल आनंद ने बताया कि पहली बार स्टेशन पर टिकट कराने आया हूं। पहले ऑनलाइन टिकट कराता था। ऑनलाइन तत्काल के लिए अगर 15 मिनट पहले भी लॉग इन किया तो टिकट नहीं मिल पाती।