Tihar Jail: कपड़े और आधार कार्ड में छिपाकर कैदी ला रहे मादक पदार्थ और सिम, मुलाकाती इस तरह कर रहे मदद
जेल अधिकारियों का कहना है कि जेल में निगरानी बढ़ने के बाद कैदी अपने परिवार वालों और मुलाकाती के जरिए जेल में सामान लाने की कोशिश कर रहे हैं।
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तिहाड़ जेल में मादक द्रव्य, मोबाइल और सिम लाने पर पाबंदी के बावजूद कैदियों के मुलाकाती नए तरीके अपनाकर कैदियों तक सामान को पहुंचा रहे हैं। कभी पैंट, कभी पजामा तो कभी आधार कार्ड में सिम डालकर कैदियों तक पहुंचाई जा रही है। पहले जेल की दीवारों के ऊपर से जेल परिसर में इन चीजों को फेंका जाता था, लेकिन जेल परिसर में जाली लगा दिए जाने के बाद ऐसी वारदातों में कमी आई है। जेल अधिकारियों का कहना है कि जेल में निगरानी बढ़ने के बाद कैदी अपने परिवार वालों और मुलाकाती के जरिए जेल में सामान लाने की कोशिश कर रहे हैं।
एक सप्ताह पहले जहां तिहाड़ जेल में एक महिला ने पजामा में स्मैक का पुड़िया डालकर कैदी तक पहुंचाने की कोशिश की, वहीं करीब तीन माह पहले रोहिणी जेल में एक महिला ने पैंट में सिम डालकर अपने बेटों को देने की कोशिश की। जेल अधिकारियों की शिकायत पर पुलिस ने महिला को गिरफ्तार कर लिया। अधिकारियों का कहना है कि जेल में बंद कैदी पहले अपने साथियों की मदद से जेल परिसर में नशे का सामान व अन्य चीजें मंगवाते थे। बाहर मौजूद कैदियों के परिचित इन चीजों को टेनिस बॉल में डालकर जेल परिसर में फेंक देते थे। कैदियों की इन हरकतों की जानकारी मिलने के बाद जेल प्रशासन ने जेल संख्या 8 और 9 के जेल परिसर में जाल लगवा दिया। इससे उनके फेंके हुए सामान जाल में ही अटक जाते थे।
रोक लगने के बाद कैदी अब मुलाकाती के जरिए प्रतिबंधित सामानों को जेल के भीतर लाने की कोशिश कर रहे हैं। नया मामला मंगलवार को जेल नंबर तीन में सामने आया है। जहां एक कैदी से मिलने के लिए उसका परिचित आया था। परिचित ने कैदी को उसका आधार कार्ड दिया। कार्ड लेमिनेट था। ऊपर से किसी तरह का कोई संदिग्ध नजर नहीं आ रहा था। लेकिन जांच के दौरान कार्ड को अपने हाथ में लेने पर सुरक्षा कर्मियों को उसके भीतर कुछ होने का अहसास हुआ। उनलोगों ने कार्ड का लेमिनेशन हटाया तो उसके भीतर से एक सिम निकला। जेल अधिकारी ने तुरंत उसे अपने कब्जे में ले लिया और उस कैदी के खिलाफ नियम के मुताबिक कार्रवाई शुरू कर दी है।
नशीले पदार्थ को जेल में बेचते भी हैं कैदी
जेल सूत्रों का कहना है कि कैदी जेल के अंदर तंबाकू, स्मैक, चरस और बीड़ी ले जाते हैं। इसका वह खुद भी इस्तेमाल करते हैं और उसे अन्य कैदियों को बेचते हैं। सूत्रों का कहना है कि कैदी बोतल के ढक्कन के बराबर तंबाकू को जेल के भीतर पांच सौ रुपये में बेचते हैं वहीं चरस और गांजे वाली बीड़ी की कीमत चार सौ रुपये होती है। जिस मादक द्रव्य की कीमत ज्यादा होती है उसकी कम मात्रा की कीमत भी जेल में बाहर से दोगुना वसूली जाती है।
तीन बार होती है कैदियों की तलाशी
जेेल अधिकारियों का कहना है कि जेल आने वाले कैदी की तीन बार तलाशी ली जाती है। जेल में आने के बाद ड्योढ़ी पर सबसे पहले कैदियों की तलाशी ली जाती है। उसके बाद तमिलनाडु पुलिस कैदियों की तलाशी लेती है। शक होने पर जेल कर्मी कैदियों की तलाशी लेते हैं। जेल अधिकारियों का कहना है कि जेल महानिदेशक संजय बेनीवाल के कार्यभार संभालने के बाद से जेलों में लगातार छापेमारी की जा रही है।
कई तरीकों से सामान को ले जाते हैं जेल के अंदर
तिहाड़ जेल में बंद कैदी नशे का सामान धड़ल्ले से अंदर ले जा रहे हैं। वे कई तरीके से सामान को अंदर ले जा रहे हैं। कभी कभी कैदी अदालत से पेशी के बाद भी अपने साथ नशे का सामान और सिम लेकर आते हैं और उसे छिपाकर जेल के अंदर ले जाने की कोशिश करते हैं। एक कैदी पेशी से जेल पहुंचा तो उसके हाथ में पट्टी बंधी थी। प्रथम दृष्टया उसे चोट लगना प्रतीत हुआ। शक होने पर उसे खोला गया तो उसमें से नशे का सामान मिला। जेल सूत्रों का कहना है कि कैदी जूते के सोल में तो शरीर के अन्य जगहों पर छिपाकर सामान लेकर जाते है। यहां तक कि कैदी फोन को अपने पेट में छिपाकर जेल के अंदर ले जा चुके हैं।