फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   prime minister narendra modi inaugurates subhash chandra bose museum at red fort all update

लाल किले में पीएम मोदी ने किया नेताजी सुभाष चंद्र बोस संग्रहालय का उद्घाटन

Wed, 23 Jan 2019 09:57 AM IST
पूजा त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Wed, 23 Jan 2019 09:57 AM IST
विज्ञापन
prime minister narendra modi inaugurates subhash chandra bose museum at red fort all update
पीएम मोदी ने किया संग्रहालय का उद्घाटन - फोटो : डीडी नेशनल ट्विटर
नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 122वीं जयंती पर आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली के लाल किले में बने सुभाष चंद्र बोस म्यूजियम का उद्घाटन कर इसे राष्ट्र को समर्पित किया। इस म्यूजियम में सुभाष चंद्र बोस और आजाद हिंद फौज से जुड़ी चीजों को प्रदर्शित किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ सुभाष चंद्र बोस के पोते चंद्र बोस भी मौजूद इस मौके पर लाल किला में मौजूद हैं।
विज्ञापन


सिर्फ यही नहीं इसके साथ ही आज प्रधानमंत्री याद-ए-जलियां संग्रहालय (जलियांवाला बाग और प्रथम विश्वयुद्ध पर संग्रहालय) और 1857 (प्रथम स्वतंत्रता संग्राम) पर बने संग्रहालय और भारतीय कला पर दृश्यकला संग्रहालय भी देखने गए।
विज्ञापन
विज्ञापन

 


नेताजी की कुर्सी और तलवार भी देख सकेंगे आप
जानकारी के अनुसार इस म्यूजियम में नेताजी द्वारा इस्तेमाल की गई तलवार, कुर्सी के साथ ही आईएनए से जुड़े पदक, वर्दी, बैज और अन्य चीजें भी देखी जा सकती हैं। बता दें कि आईएनए के खिलाफ जो मुकदमा दायर किया गया था उसकी सुनवाई लाल किले के परिसर में ही की गई थी, यही वजह है यहां संग्रहालय बनने का।

ये होंगी सुविधाएं
म्यूजियम देखने आने वालों को बेहतरीन अनुभव प्राप्त हो इसके लिए इसे खास तौर से डिजाइन किया गया है। बताया जा रहा है कि यहां पेंटिंग, फोटो, पुराने रिकॉर्ड, अखबार की कटिंग, ऑडियो-विडियो क्लिप, मल्टीमीडिया और एनिमेशन की भी सुविधा है।

पीएम मोदी ने बदला अंडमान के तीन द्वीपों का नाम, नेताजी के नाम पर रखा
गौरतलब है कि आजाद हिंद फौज ने अंडमान निकोबार द्वीप समूह में 75 साल पहले तिरंगा फहराया था। इसी की 75वीं वर्षगांठ होने के मौके पर कुछ समय पहले ही पीएम नरेंद्र मोदी अंडमान के दौरे पर गए थे। तब उन्होंने तीन द्वीपों का नाम सुभाष चंद्र बोस के नाम पर रखने का ऐलान किया था। अंडमान के हैवलॉक द्वीप का नाम स्वराज द्वीप, नील द्वीप का नाम शहीद द्वीप और रॉस द्वीप को नेताजी सुभाष चंद्र द्वीप के नाम से जाना जाएगा।

आगे पढ़े नेताजी की लव स्टोरी

prime minister narendra modi inaugurates subhash chandra bose museum at red fort all update
नेताजी सुभाष चंद्र बोस
नेताजी सुभाष चंद्र बोस की लव स्टोरी उनकी जिंदगी की किताब का वह चैप्टर है जिसके पन्ने बहुत कम दफा पलटे गए। आजादी की लड़ाई लड़ते-लड़ते नेताजी जिस महिला पर दिल हार बैठे थे उसे वह अपनी आखिरी सांस तक प्यार करते रहे। दोनों की शादी भी हुई लेकिन रहस्यमयी तरीके से। बेहद अनूठी रही इनकी लव स्टोरी...

ऐसे हुआ प्यार का एहसास
साल 1934 में जब ब्रिटिश सरकार ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को भारत से निर्वासित किया तो वह यूरोप के वियेना चले गए। वह यही रहकर आजादी की लड़ाई से जुड़े साथियों को लगातार चिट्ठियां लिखते रहे। खतों के डिक्टेशन और टाइपिंग के लिए उन्हें एक सहायक की जरूरत थी। तभी उनके एक दोस्त ने मिस एमिली शांक्ले से मिलवाया। नेताजी ने शांक्ले को नौकरी पर रख लिया।

काम के दौरान बढ़ी करीबियां

इसी दौरान नेताजी सुभाष चंद्र बोस और एमिली एक दूसरे के प्रति आकर्षत हुए और उनका प्यार परवान चढ़ा। दोनों यूरोप में साथ कई जगह घूमने भी गए। दो साल बाद, 1936 में नेताजी सुभाष चंद्र भारत लौट आए। काम की व्यस्तता के बावजूद वह वक्त निकालकर एमिली को खत लिखते रहे। 

नेताजी की लिखी ये चिट्ठियां जब आजादी के सालों बाद प्रकाशित हुईं तो लोगों को उनके रोमांटिक पहलू से रूबरू होने का मौका मिला। इन्हें पढ़कर लगता है मानो चिट्ठियों में वह अपनी सारा प्यार उड़ेल देते थे-

“तुम पहली महिला हो, जिससे मैंने प्यार किया। भगवान से यही चाहूंगा कि तुम मेरे जीवन की आखिरी स्त्री भी रहो।” 

“मैंने कभी नहीं सोचा था कि एक महिला का प्यार मुझको बांध भी सकेगा। इससे पहले बहुतों ने मुझे प्यार करने की कोशिश की लेकिन मैने किसी की ओर नहीं देखा पर तुमने मुझे अपना बना ही लिया।”


रहस्यमयी तरीके से की शादी
शर्मिला बोस के लिखे 'लव इन द टाइम ऑफ वारः सुभाष चंद्र बोस जर्नी टू नाजी जर्मनी' के मुताबिक साल 1937 में बोस वापस एमिली के पास गए। ऑस्ट्रिया के बडगस्टीन शहर में 26 दिसंबर को उन दोनों ने गुप्त शादी कर ली।  लेकिन शादी के फौरन बाद बोस जनवरी 1938 में भारत लौट आए। हालांकि, कुछ इतिहासकारों का मानना है कि इनकी शादी 1942 में हुई। 

इस शादी के बारे में जानता था बस ये एक शख्स

prime minister narendra modi inaugurates subhash chandra bose museum at red fort all update
सुभाष चंद्र बोस और एमिली ने फैसला किया कि भारत की आजादी से पहले वह अपनी शादी का जिक्र नहीं करेंगे। हालांकि, इस शादी के बारे में सिर्फ उनके मित्र पंडित जवारहरलाल नेहरू को ही पता था। नवंबर, 1942 में बोस और एमिली की बेटी अनिता का जन्म हुआ। 

दुर्भाग्यवश, पत्नी और बेटी का साथ बस इतने ही दिनों तक था। आठ जनवरी, 1943 को सुभाष जब जर्मनी से जापान के लिए रवाना हो रहे थे, तब उन्होंने दोनों से आखिरी बार मुलाकात किया। 1945 में प्लेन क्रैश में उनकी मौत की खबर आई

कभी भारत ना जा सकीं बोस की पत्नी
सुगाता बोस (नेताजी के भाई के पोते) की लिखी सुभाष चंद्र बोस की जीवन 'हिज मैजेस्टी ऑपोनेंट' के अनुसार नेताजी की मौत के तीन साल बाद 1948 में उनका परिवार वियेना गया जहां उनकी मुलाकात एमिली और अनिता से हुई। परिवार ने एमिली से कोलकाता चलने को भी कहा लेकिन उन्होंने इंकार कर दिया। दरअसल, उन दिनों एमिली अपनी मां की देखभाल कर रही थीं जो अस्वस्थ थीं। 1960 में अनिता कोलकाता आईं, लेकिन एमिली कभी भारत ना आ सकीं

लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप के बावजूद जिंदा रहा प्यार

शादी के बाद भी सुभाष चंद्र बोस पत्नी एमिली के साथ रह ना पाए। वह कभी कभार वियेना जाकर कुछ वक्त पत्नी के साथ बिताते रहे लेकिन काम की व्यस्तता के कारण ज्यादातर वह उनसे दूर ही रहे। इसी बीच उन प्यार भरी चिट्ठियों ने ही दोनों के रोमांस को बरकरार रखा। दोनों सिर्फ 9 साल साथ रह पाए लेकिन उनकी लव स्टोरी आज भी रोंगटे खड़े कर देती है और सोचने पर मजबूर कर देती है कि अगर लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप उस दौर में मुमकिन था, तो क्या आज इंटरनेट और सैटेलाइट के दौर में क्यों नहीं?


(सुभाष चंद्र बोस के भतीजे की पत्नी कृष्णा बोस ने भी सुभाष चंद्र बोस की लव स्टोरी पर किताब लिखी है 'ए ट्रू लव स्चटोरी-एमिली एंड सुभाष')
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed