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अब राष्ट्रपति के दरबार पहुंचेगी केजरी-नजीब की जंग

Sun, 17 May 2015 03:12 AM IST
नवनीत शरण/अमर उजाला, नई दिल्ली
नवनीत शरण/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 17 May 2015 03:12 AM IST
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President of the court-Najeeb Jung arrive Kejri.

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल व उपराज्यपाल नजीब जंग के बीच तकरार बढ़ती जा रही है। दिल्ली में अपने मन मुताबिक अफसर नियुक्त करने पर केजरीवाल ने जंग पर असंवैधानिक अंदाज में काम करने का आरोप लगा दिया है।

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अब यह मामला जल्द ही केजरीवाल राष्ट्रपति के दरबार में लेकर जाएंगे। लेकिन डर यह भी है कि अगर जंग संवैधानिक संकट को लेकर राष्ट्रपति के पास पहुंच जाते है तो फिर दिल्ली सरकार के लिए मुश्किल हो सकती है।
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मुख्य सचिव को लेकर राज निवास भवन व दिल्ली सचिवालय के बीच खाई बढ़ती ही जा रही है। संविधान का जिस तरह से दोनों जगह अपनी-अपनी तरह से व्याख्या की जा रही है। इसे देखकर एक मायने में ऐसा लग रहा है कि दिल्ली में संवैधानिक संकट की स्थिति है।
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अगर केजरीवाल इसी असंवैधानिक संकट को लेकर राष्ट्रपति के दरबार पहुंचते है और दूसरी तरफ एलजी भी पहुंच जाते है यह साफ हो जाएगा कि दिल्ली में संवैधानिक संकट है।

दिल्ली में संवैधानिक संकट!

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राजनैतिक विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी स्थिति में राष्ट्रपति के पास यह अधिकार होता है कि संवैधानिक संकट का हवाला देकर कोई भी निर्णय ले सकते हैं। उधर, यह भी कयास लगाया जा रहा है कि भाजपा शासित केंद्र सरकार भी इस मामले को उलझा रही है।

बताया जा रहा है कि मुख्य सचिव केके शर्मा यूं तो 10 दिनों की छुट्टी पर गए हैं, लेकिन वे इस दौरान नहीं लौटेंगे। सूत्र बताते है कि दिल्ली पुलिस के तबादले के मामले में दिल्ली सरकार ने उनके खिलाफ मेमो जारी किया था, क्योंकि  उन्होंने सीधे तौर पर जंग को ही इसकी रिपोर्ट की थे।

इसी से नाराज होकर वे छुट्टी पर गए हैं। अगर शर्मा लंबी छुट्टी पर चले गए जैसा की कयास लगाया जा रहा तो कार्यवाहक मुख्य सचिव के साथ दिल्ली सरकार का तालमेल बैठाना मुश्किल साबित होगा।

ऐसे में एक बार फिर से संवैधानिक संकट खड़ा हो जाएगा। अब देखना है कि राष्ट्रपति के दरबार से केजरी-नजीब की जंग को क्या अंजाम मिलता है।

भाजपा ने तख्ता पलट की कोशिश की है : सिसोदिया

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दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि भाजपा एलजी के कंधे पर बंदूक रखकर चला रही है। एलजी के जरिये तख्ता पलट की भी कोशिश की गई।

एक चुनी हुई ऐतिहासिक बहुमत वाली सरकार को, उसके मुख्यमंत्री को, कैबिनेट को किनारे करके सीधे सरकार चलाने की कोशिश की गई।मंत्रियों को किनारे कर अधिकारियों को सीधे निर्देश दिया गया है।

सिसोदिया ने कहा कि संविधान कहता है कि एलजी, सरकार के किसी मंत्री के साथ राय में मतभेद होने पर पहले मंत्री से बात करेंगे। बात न बने, तो कैबिनेट को लिखेंगे।

फिर भी बात न बने तो राष्ट्रपति को लिखेंगे। उन्हें राष्ट्रपति से आदेश मिलता है तो भी वो ये आदेश मंत्री को बताएंगे न कि सीधे किसी अफसर को। एलजी के पास मंत्री को बाईपास कर किसी अधिकारी को निर्देश देने का अधिकार किसी भी कानून में नहीं है।

विवादों के बीच गैमलिन ने संभाली कुर्सी

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गौरतलब है कि एलजी ने 1984 बैच की आईएएस अधिकारी शकुंतला को मुख्य सचिव का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है। इसकी आलोचना करते हुए दिल्ली सरकार ने कहा कि एलजी निर्वाचित सरकार एवं सीएमकी अनदेखी नहीं कर सकते।

बताया जा रहा है कि तमाम विरोध व मुख्यमंत्री के मना करने के बावजूद शकुंतला गैमलिन ने दिल्ली सरकार के कार्यकारी मुख्य सचिव का कार्यभार संभाल लिया है। इसके कारण और हंगामा मचा हुआ है।शनिवार सुबह से ही एलजी व दिल्ली सरकार के बीच खींचतान चल रही थी।

इस बीच टकराव उस समय और बढ़ गया था, जब केजरीवाल ने गैमलिन से कहा कि वह कार्यवाहक मुख्य सचिव का कार्यभार नहीं संभालें। लेकिन जंग के शुक्रवार के फैसले पर अडिग गैमलिन कार्यवाहक मुख्य सचिव के पद पर आसीन हो गई हैं।

मजूमदार और गैमलीन पर नजीब जंग का पक्ष

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दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग ने स्पष्ट तौर पर आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर यह भी कहा है कि अभी तक जो भी फैसला लिया गया है संविधान के तहत लिया गया है।

शकुंतला गैमलीन पर लगाए गए आरोप को एलजी ने निंदनीय करार दिया है। हालांकि उन्होंने शिकायत पर नियम के तहत जांच करने को भी कहा है। उन्होंने दिल्ली सरकार के उस निर्णय को भी गलत ठहराया है जिसमें मुख्य सचिव (सर्विस) अरविंदो मजूमदार को पद से हटाने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में दिल्ली सरकार ने राज निवास से किसी तरह की अनुमति नहीं ली है।

जबकि दिल्ली के एलजी को ही इस रैंक के अधिकारी के तबादले पर निर्णय का अधिकार है। उन्होंने एक तरह से दिल्ली सरकार के इस फैसले को पलटने का निर्देश दे दिया है। बता दें कि मजूमदार ने ही शकुंतला को सीएस के पद के लिए आदेश जारी किए थे।

सूत्र बताते हैं कि बिना मुख्यमंत्री की सहमति के इस तरह के आदेश जारी करने के कारण उनसे विभाग का सभी तरह का काम ले लिया गया और उनकी जगह पर दिल्ली सरकार ने राजेंद्र कुमार को मजूमदार का सभी कामकाज सौंप दिया। हालांकि एलजी ने इस फैसले को नकार दिया है।

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