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Delhi NCR News: यमुना के सक्रिय बाढ़ क्षेत्र में नो-एक्टिविटी जोन बनाने की तैयारी
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एमपीडी-2047 की बैठक में बाढ़ क्षेत्र में पर्यावरण प्रभावित करने वाली गतिविधियों पर रोक का सुझाव
यमुना पुनर्जीवन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर जोर
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली में यमुना के सक्रिय बाढ़ क्षेत्र को संरक्षित करने के लिए नो-एक्टिविटी जोन चिह्नित करने का सुझाव सामने आया है। दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) की एमपीडी-2047 को लेकर बुधवार को हुई नौवीं हितधारक बैठक में यमुना, ग्रीन-ब्लू इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रदूषण मुक्त दिल्ली के मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक में कहा गया कि बाढ़ क्षेत्र में ऐसी गतिविधियों पर रोक जरूरी है, जिनसे यमुना के प्राकृतिक स्वरूप और पर्यावरण को नुकसान पहुंच सकता है।
एमपीडी-2047 में यमुना के पुनर्जीवन के साथ जलाशयों, वेटलैंड, प्राकृतिक व निर्मित नालों, शहरी जंगलों और जैव विविधता के संरक्षण को प्राथमिकता दी गई है। प्राकृतिक संसाधनों को आपस में जोड़कर ग्रीन नेटवर्क विकसित करने तथा स्थानीय प्रजातियों और प्रकृति आधारित उपायों को बढ़ावा देने पर भी जोर है। इसका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के साथ जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने में दिल्ली को अधिक सक्षम बनाना है।
ई-वेस्ट और ट्रैफिक प्रबंधन पर भी मंथन
बैठक में दिल्ली में प्रदूषण कम करने के उपायों पर भी सुझाव लिए गए। ई-वेस्ट प्रबंधन के लिए दिशा-निर्देश तैयार करने, यातायात जाम और मोबिलिटी की समस्या से निपटने के लिए एकीकृत रणनीति बनाने तथा जमीन के ऊपर और नीचे विकसित होने वाले बुनियादी ढांचे के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत बताई गई। यह बैठक तीन महीने के हितधारक संपर्क कार्यक्रम का हिस्सा है। इसके तहत एमपीडी-2047 के विभिन्न विषयों पर करीब 20 बैठकें आयोजित की जा रही हैं। बैठक में एमसीडी, सीपीसीबी, शहरी विकास विभाग, डीपीसीसी, पीडब्ल्यूडी, जल बोर्ड, एनएमसीजी और आईएंडएफसी समेत विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों ने सुझाव दिए।
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यमुना पुनर्जीवन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर जोर
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली में यमुना के सक्रिय बाढ़ क्षेत्र को संरक्षित करने के लिए नो-एक्टिविटी जोन चिह्नित करने का सुझाव सामने आया है। दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) की एमपीडी-2047 को लेकर बुधवार को हुई नौवीं हितधारक बैठक में यमुना, ग्रीन-ब्लू इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रदूषण मुक्त दिल्ली के मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक में कहा गया कि बाढ़ क्षेत्र में ऐसी गतिविधियों पर रोक जरूरी है, जिनसे यमुना के प्राकृतिक स्वरूप और पर्यावरण को नुकसान पहुंच सकता है।
एमपीडी-2047 में यमुना के पुनर्जीवन के साथ जलाशयों, वेटलैंड, प्राकृतिक व निर्मित नालों, शहरी जंगलों और जैव विविधता के संरक्षण को प्राथमिकता दी गई है। प्राकृतिक संसाधनों को आपस में जोड़कर ग्रीन नेटवर्क विकसित करने तथा स्थानीय प्रजातियों और प्रकृति आधारित उपायों को बढ़ावा देने पर भी जोर है। इसका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के साथ जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने में दिल्ली को अधिक सक्षम बनाना है।
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ई-वेस्ट और ट्रैफिक प्रबंधन पर भी मंथन
बैठक में दिल्ली में प्रदूषण कम करने के उपायों पर भी सुझाव लिए गए। ई-वेस्ट प्रबंधन के लिए दिशा-निर्देश तैयार करने, यातायात जाम और मोबिलिटी की समस्या से निपटने के लिए एकीकृत रणनीति बनाने तथा जमीन के ऊपर और नीचे विकसित होने वाले बुनियादी ढांचे के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत बताई गई। यह बैठक तीन महीने के हितधारक संपर्क कार्यक्रम का हिस्सा है। इसके तहत एमपीडी-2047 के विभिन्न विषयों पर करीब 20 बैठकें आयोजित की जा रही हैं। बैठक में एमसीडी, सीपीसीबी, शहरी विकास विभाग, डीपीसीसी, पीडब्ल्यूडी, जल बोर्ड, एनएमसीजी और आईएंडएफसी समेत विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों ने सुझाव दिए।
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