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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Which dad?" asked the innocent three-year-old-now comes the punishment.

Delhi NCR News: तीन साल की मासूम से कहा- कौन से वाले पापा?, अब होगी सजा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 30 Sep 2026 07:44 PM IST
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तीस हजारी कोर्ट ने टिप्पणी को महिला की निष्ठा और बेटी के पितृत्व पर आपत्तिजनक करार दिया
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। तीन साल की बच्ची से उसकी मां के सामने 'कौन से वाले पापा?' कहना एक महिला की मर्यादा और शालीनता को ठेस पहुंचाने वाली टिप्पणी है। तीस हजारी कोर्ट ने इस मामले में गिरधारी लाल को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 509 के तहत दोषी ठहराया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट मोक्षा बैंस ने कहा कि टिप्पणी को केवल उसके शाब्दिक अर्थ में नहीं देखा जा सकता, बल्कि उसे उस परिस्थिति के संदर्भ में समझना होगा, जिसमें वह कही गई थी। अदालत ने सजा की मात्रा पर सुनवाई अलग से करने का निर्देश दिया है।
अभियोजन के अनुसार, घटना 23 मार्च 2021 की है। प्रियंका गुप्ता अपनी तीन वर्षीय बेटी के साथ घर के बाहर सड़क पर जा रही थीं। बच्ची रो रही थी, जिसे शांत कराने के लिए प्रियंका ने कहा, देखो पापा आ गए, रोओ मत। इसी दौरान सड़क के कोने पर बैठे गिरधारी लाल ने तुरंत टिप्पणी की, “कौन से वाले पापा?”
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अदालत के मुताबिक, इस टिप्पणी का संदर्भ यह संकेत देता था कि बच्ची के पिता के रूप में एक से अधिक पुरुष हो सकते हैं। न्यायाधीश ने कहा कि ऐसा आक्षेप सामान्य अशिष्टता या ताने से आगे जाता है और महिला की गरिमा और शालीनता की भावना को ठेस पहुंचाता है।
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बाद में कहा-दुर्भावना से नहीं की टिप्पणी
महिला ने मौके पर टिप्पणी को नजरअंदाज किया और बाद में अपने ससुर को घटना की जानकारी दी। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। सुनवाई के दौरान गिरधारी लाल ने आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 313 के तहत अपने बयान में इन शब्दों को कहने की बात स्वीकार की, हालांकि उसने किसी दुर्भावना से टिप्पणी करने से इन्कार किया।
अदालत का सख्त रुख
कोई ऐसा तथ्य नहीं आया जिससे टिप्पणी का निर्दोष अर्थ निकाला जा सके
अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता की गवाही और आरोपी की स्वीकारोक्ति से टिप्पणी किए जाने की पुष्टि होती है। न्यायाधीश ने यह भी कहा कि किसी टिप्पणी के पीछे का इरादा उसकी प्रकृति और उस समय की परिस्थितियों से समझा जा सकता है। रिकॉर्ड पर ऐसा कोई तथ्य सामने नहीं आया, जिससे टिप्पणी का कोई निर्दोष अर्थ निकाला जा सके।

स्वतंत्र गवाह नहीं होने से अभियोजन कमजोर नहीं
अदालत ने स्वतंत्र सार्वजनिक गवाह नहीं होने की दलील को भी अभियोजन के खिलाफ पर्याप्त आधार नहीं माना। न्यायाधीश ने कहा कि शिकायतकर्ता स्वयं घटना की प्रत्यक्ष गवाह थीं और टिप्पणी के संबंध में उनकी गवाही पूरी कार्यवाही के दौरान अडिग रही। अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि अभियोजन ने युक्तियुक्त संदेह से परे साबित किया कि गिरधारी लाल ने टिप्पणी महिला के सुनने के इरादे से की और उसका स्वभाव उसकी मर्यादा को ठेस पहुंचाने वाला था। इसी आधार पर अदालत ने उसे आईपीसी की धारा 509 के तहत दोषी ठहराया। अब मामले में सजा की मात्रा तय की जानी है।
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