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नई लाइनों पर तीन कोच वाली लाइट मेट्रो दौड़ाने की तैयारी, एनएमआरसी की बैठक में बनी योजना
Wed, 25 Sep 2019 08:28 AM IST
शाहरुख खान
सुशील पांडेय, अमर उजाला, नोएडा
सुशील पांडेय, अमर उजाला, नोएडा
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 25 Sep 2019 08:28 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : सोशल मीडिया
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अब भविष्य में जहां भी मेट्रो की नई लाइनें बिछेंगी, वहां तीन कोच वाली लाइट मेट्रो चलाने की योजना है। इसके कोच पुराने कोच से सस्ते होंगे। केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय में मंगलवार को आयोजित एनएमआरसी की 22वीं बोर्ड बैठक में इस पर चर्चा हुई।
बैठक में एक्वा लाइन पर यात्रियों की संख्या बढ़ाने पर भी मंथन किया गया। बैठक में भविष्य की मेट्रो पर विचार किया गया। इसमें पहले की अपेक्षा सस्ते कोच की सेवा लेने की बात हुई। अभी तक चल रहे मेट्रो के कोच 200 करोड़ से भी ज्यादा की लागत के होते हैं। जबकि प्रस्तावित लाइट मेट्रो के कोच 100 करोड़ से भी कम में आ जाएंगे।
ऐसी मेट्रो में केवल तीन कोच ही लगेंगे जिसमें 1000 यात्री सफर कर सकेंगे। जरूरी नहीं कि यह मेट्रो सड़क मार्ग पर ही चले। इसे दूसरे रूट पर भी चलाने पर विचार विमर्श किया जा सकता है। दिल्ली में लाइट मेट्रो का प्रयोग किया जाएगा। इसके अलावा नई एक्सटेंशन लाइनों पर भी लाइट मेट्रो को ही लाने पर विचार किया जा रहा है।
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बैठक में मौजूद रहे एनएमआरसी के कार्यकारी निदेशक पीडी उपाध्याय ने बताया कि ग्रेटर नोएडा वेस्ट तक बिछाई जाने वाली नई लाइन की डीपीआर पुराने पैटर्न के आधार पर ही भेजी गई है, लेकिन प्रस्तावित नोएडा एयरपोर्ट के लिए जिस मेट्रो पर विचार किया जा रहा है। वह संभव है कि लाइट मेट्रो हो, चूंकि मंत्रालय इस तरह की मेट्रो पर गंभीरता से विचार कर रहा है।
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बैठक में एक्वा लाइन पर यात्रियों की संख्या बढ़ाने पर भी मंथन किया गया। बैठक में भविष्य की मेट्रो पर विचार किया गया। इसमें पहले की अपेक्षा सस्ते कोच की सेवा लेने की बात हुई। अभी तक चल रहे मेट्रो के कोच 200 करोड़ से भी ज्यादा की लागत के होते हैं। जबकि प्रस्तावित लाइट मेट्रो के कोच 100 करोड़ से भी कम में आ जाएंगे।
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ऐसी मेट्रो में केवल तीन कोच ही लगेंगे जिसमें 1000 यात्री सफर कर सकेंगे। जरूरी नहीं कि यह मेट्रो सड़क मार्ग पर ही चले। इसे दूसरे रूट पर भी चलाने पर विचार विमर्श किया जा सकता है। दिल्ली में लाइट मेट्रो का प्रयोग किया जाएगा। इसके अलावा नई एक्सटेंशन लाइनों पर भी लाइट मेट्रो को ही लाने पर विचार किया जा रहा है।
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बैठक में मौजूद रहे एनएमआरसी के कार्यकारी निदेशक पीडी उपाध्याय ने बताया कि ग्रेटर नोएडा वेस्ट तक बिछाई जाने वाली नई लाइन की डीपीआर पुराने पैटर्न के आधार पर ही भेजी गई है, लेकिन प्रस्तावित नोएडा एयरपोर्ट के लिए जिस मेट्रो पर विचार किया जा रहा है। वह संभव है कि लाइट मेट्रो हो, चूंकि मंत्रालय इस तरह की मेट्रो पर गंभीरता से विचार कर रहा है।
मंत्रालय से इस संबंध में विचार विमर्श भी किया जा रहा है। बोर्ड बैठक की अध्यक्षता मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव के. संजय मूर्ति ने की। इस मौके पर नोएडा मेट्रो रेल कारपोरेशन लिमिटेड की एमडी और नोएडा प्राधिकरण की सीईओ रितु माहेश्वरी के अलावा मंत्रालय के संयुक्त सचिव व वित्तीय सलाहकार श्याम सुंदर दूबे और एनएमआरसी के अन्य अधिकारी शामिल रहे।
ई-बाइक-ई-साइकिल सेवा अक्तूबर में होगी लांच
एनएमआरसी के अधिकारियों के मुताबिक बोर्ड बैठक में लास्ट माइल कनेक्टिविटी बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। इसमें पांच स्टेशनों पर ई-रिक्शा, ई-बाइक और ई-साइकिल सेवा की लांचिंग अक्तूबर में होगी। इसके माध्यम से मेट्रो के यात्रियों को लास्ट माइल कनेक्टिविटी देने का काम किया जाएगा।
किराये के अलावा अन्य आय बढ़ाने पर जोर
बैठक में एनएमआरसी का राजस्व बढ़ाने पर मंथन किया गया। इसमें अभी शुरुआती दौर में करीब 1.25 करोड़ तक प्रति माह की आय हो रही है, जो यात्रियों की राइडरशिप से है। लिहाजा, राइडरशिप बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। अभी यह अधिकतम 30 हजार तक गई है, जिसे और बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। इसके अलावा स्टेशनों की को-ब्रांडिंग पर भी जोर दिया जा रहा है। इसमें स्टेशन के बाहर विज्ञापन, प्रोपर्टी बिजनेस, कामर्शियल स्पेस, ट्रेन के अंदर और बाहर विज्ञापन, स्टेशनों पर फिल्म की शूटिंग आदि का होना है।
ई-बाइक-ई-साइकिल सेवा अक्तूबर में होगी लांच
एनएमआरसी के अधिकारियों के मुताबिक बोर्ड बैठक में लास्ट माइल कनेक्टिविटी बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। इसमें पांच स्टेशनों पर ई-रिक्शा, ई-बाइक और ई-साइकिल सेवा की लांचिंग अक्तूबर में होगी। इसके माध्यम से मेट्रो के यात्रियों को लास्ट माइल कनेक्टिविटी देने का काम किया जाएगा।
किराये के अलावा अन्य आय बढ़ाने पर जोर
बैठक में एनएमआरसी का राजस्व बढ़ाने पर मंथन किया गया। इसमें अभी शुरुआती दौर में करीब 1.25 करोड़ तक प्रति माह की आय हो रही है, जो यात्रियों की राइडरशिप से है। लिहाजा, राइडरशिप बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। अभी यह अधिकतम 30 हजार तक गई है, जिसे और बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। इसके अलावा स्टेशनों की को-ब्रांडिंग पर भी जोर दिया जा रहा है। इसमें स्टेशन के बाहर विज्ञापन, प्रोपर्टी बिजनेस, कामर्शियल स्पेस, ट्रेन के अंदर और बाहर विज्ञापन, स्टेशनों पर फिल्म की शूटिंग आदि का होना है।
स्टेशनों को सजाया व संवारा जाएगा
एक्वा लाइन के स्टेशनों को कांसेप्ट स्टेशन बनाने पर अब काम होगा। इसमें कुछ स्टेशनों को इस तरह से सजाया और संवारा जाएगा कि उसे देखकर यात्री आकर्षित हों। इसमें यात्रियों की सुविधा से लेकर, प्लस्टिक मुक्त स्टेशन, खाने-पीने की सुविधा सहित कई नए आइडिया शामिल होंगे।
सेक्टर-51 और 52 स्टेशनों पर भी चर्चा
बोर्ड बैठक में सेक्टर-51 और ब्लू लाइन के सेक्टर-52 मेट्रो स्टेशन को वॉक-वे से जोड़ने के बाद यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी पर भी चर्चा हुई। इसके लिए एनएमआरसी के सिटी बस सेवा की प्रगति पर भी संतोष जताया गया। वहीं फीडर बस सेवा की प्रगति रिपोर्ट भी बताई गई।
सेक्टर-51 और 52 स्टेशनों पर भी चर्चा
बोर्ड बैठक में सेक्टर-51 और ब्लू लाइन के सेक्टर-52 मेट्रो स्टेशन को वॉक-वे से जोड़ने के बाद यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी पर भी चर्चा हुई। इसके लिए एनएमआरसी के सिटी बस सेवा की प्रगति पर भी संतोष जताया गया। वहीं फीडर बस सेवा की प्रगति रिपोर्ट भी बताई गई।