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डॉक्टर नहीं ये यमराज हैं: आईवीएफ में महिला की गई जान, फर्जी डिग्री पर चल रहा था क्लीनिक, 80 का हो चुका है इलाज

Fri, 02 Sep 2022 03:45 PM IST
आकाश दुबे माई सिटी रिपोर्टर, ग्रेटर नोएडा
माई सिटी रिपोर्टर, ग्रेटर नोएडा Published by: आकाश दुबे Updated Fri, 02 Sep 2022 03:45 PM IST
सार

गर्भवती की मौत के बाद मामले की जांच कर रही बिसरख कोतवाली पुलिस ने आरोपी क्लीनिक संचालक साहिबाबाद निवासी प्रियरंजन ठाकुर को 28 अगस्त को गिरफ्तार किया था। अब आरोपी पर फर्जी डिग्री मिलने पर एक और केस दर्ज किया गया है। इस मामले में एक महिला डाक्टर समेत क्लीनिक के अन्य स्टाफ की भी पुलिस जांच कर रही है।

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woman dies during treatment at a fake IVF clinic in Greater Noida
पुलिस की गिरफ्त में आरोपी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ग्रेटर नोएडा वेस्ट में आईवीएफ (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) क्लीनिक संचालक और उसके स्टाफ की लापरवाही से महिला की मौत के मामले में नया खुलासा हुआ है। एमबीबीएस की फर्जी डिग्री के आधार पर क्रिएशन वर्ल्ड आईवीएफ क्लीनिक संचालित किया जा रहा था। महिला की मौत के बाद मामले की जांच कर रही बिसरख कोतवाली पुलिस ने आरोपी क्लीनिक संचालक साहिबाबाद निवासी प्रियरंजन ठाकुर को 28 अगस्त को गिरफ्तार किया था। अब आरोपी पर फर्जी डिग्री मिलने पर एक और केस दर्ज किया गया है। इस मामले में एक महिला डॉक्टर समेत क्लीनिक के अन्य स्टाफ की भी पुलिस जांच कर रही है। क्लीनिक एक साल से संचालित था और लगभग 80 निसंतान महिला व पुरुष का इलाज यहां किया गया। 

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गाजियाबाद के वसुंधरा निवासी चंद्रभान रावत 19 अगस्त को अपनी पत्नी ललिता रावत के साथ इस क्लीनिक में पहुंचे थे। विवाह के 11 साल बाद भी दंपती निसंतान थे और उन्होंने ललिता का संतान की चाह में इलाज शुरू कराया था। आरोप था कि गलत दवा व इंजेक्शन से ललिता की हालत बिगड़ गई और उन्हें नोएडा के अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां उपचार के दौरान 26 अगस्त को ललिता की मौत हो गई थी। इस मामले में बिसरख कोतवाली पुलिस ने क्लीनिक संचालक व अज्ञात चिकित्सक आदि पर केस दर्ज किया था। जांच में संचालक प्रियरंजन ठाकुर की एमबीबीएस डिग्री भूपेंद्र नारायण यूनिवर्सिटी मधेपुरा, बिहार के नाम से दिखाई गई। पुलिस ने यूनिवर्सिटी से जानकारी जुटाई तो डिग्री फर्जी निकली।

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सीएमओ कार्यालय से गोलमोल जवाब
इस मामले में पुलिस ने सीएमओ से रिपोर्ट मांगी थी। सीएमओ कार्यालय ने इस मामले में गोलमोल जवाब देते हुए विशेषज्ञों से जांच कराने की बात कही। वहीं, क्लीनिक संचालक की डिग्री फर्जी मिलने पर इस तरह के आईवीएफ सेंटरों की जांच की मांग सोशल मीडिया पर उठने लगी है।

आरोपी क्लीनिक संचालक की डिग्री फर्जी मिलने पर एक और केस दर्ज किया गया है। आरोपी पर पूर्व में महिला के इलाज में लापरवाही से मौत के मामले में भी केस दर्ज किया गया था। 28 अगस्त को आरोपी को जेल भेजा गया था। -राजेश एस, डीसीपी सेंट्रल जोन

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