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प्रद्युम्न हत्याकांड : पिंटो परिवार को मिली बड़ी राहत, 5 दिसंबर तक मिली अंतरिम जमानत

Sun, 08 Oct 2017 10:07 AM IST
बयूरो/ अमर उजाला, गुरुग्राम
बयूरो/ अमर उजाला, गुरुग्राम Updated Sun, 08 Oct 2017 10:07 AM IST
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pradyumn murder case pinto family got bail till fifth december
पिंटो फैमिली - फोटो : self

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सीबीआई को झटका देते हुए रायन स्कूल के मालिकों रायन पिंटो और ऑग्टाइन पिंटो की गिरफ्तारी पर पांच दिसंबर तक के लिए रोक लगा दी है जबकि उत्तरी क्षेत्र के प्रमुख फ्रांसिस थामस और एचआर हेड जयेश थॉमस की नियमित जमानत याचिका मंजूर कर ली। सीबीआई ने पुलिस की प्राथमिक जांच से सामने आए तथ्यों को आधार बनाकर जमानत का विरोध किया था।

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pradyuman thakur - फोटो : अमर उजाला

रायान स्कूल ग्रुप के सीईओ रायन पिंटो, उसके पिता संस्थापक अध्यक्ष आगस्टाइन एफ पिंटो और मां प्रबंध निदेशक ग्रेसी पिंटो के अलावा उत्तरी क्षेत्र के प्रमुख फ्रांसिस थॉमस और एचआर हेड जयेश थॉमस की जमानत याचिका पर शनिवार को बहस हुई। पिंटो परिवार की ओर से दलील दी गई कि वे मुंबई में रहते हैं और उनका काम उच्च स्तर के निर्णय लेने का है।

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pradyuman thakur - फोटो : सुदर्शन झा/अमर उजाला

​स्कूल स्थानीय प्रबंधन की निगरानी में चलते हैं, इसलिए उन्हें अभियुक्त बनाया जाना उचित नहीं है। वे जांच में पूरा सहयोग देने को तैयार हैं, लेकिन उन्हें आशंका है कि पूछताछ के दौरान गिरफ्तार किया जा सकता है। इसलिए उन्हें अग्रिम जमानत दी जाए।

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pradyuman thakur - फोटो : अमर उजाला

​वहीं, फ्रांसिस थॉमस व जयेश थॉमस की ओर से दलील दी गई कि उनका कार्यालय उस स्कूल में नहीं है जहां घटना हुई थी। साथ ही स्कूल के प्रबंधन में सीधे तौर पर उनका कोई दखल नहीं है। मीडिया के दबाव में और मुद्दा बनाए जाने के चलते पुलिस व जांच एजेंसियों पर दबाव है इसलिए वे बच्चे की हत्या के मामले में उन्हें सीधे तौर पर जिम्मेदार बताने पर तुले हुए हैं।

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pradyuman thakur - फोटो : सुदर्शन झा/अमर उजाला

नहीं मानी सीबीआई की दलील
सीबीआई की ओर से कहा गया कि ये सभी प्रभावशाली लोग हैं और बाहर आकर गवाहों पर दबाव बनाना, सबूत मिटाना और अन्य आरोपियों की मदद करने जैसे काम कर सकते हैं।  इसलिए जो जेल में हैं उन्हें जमानत न दी जाए और जो बाहर हैं उनकी गिरफ्तारी पर रोक न लगाई जाए। पुलिस की जांच के दौरान जो प्राथमिक तथ्य सामने आए उन्हें आधार बनाकर ही सीबीआई ने जमानत रोकने का प्रयास किया था।

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