रायन हत्याकांड : हत्या का ढंग था पेशेवराना, घटना को अंजाम देने में लगे महज तीन से चार सेकेंड
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गुरुग्राम के रायन इंटरनेशनल स्कूल की कक्षा दो के छात्र प्रद्युम्न की गर्दन पर हत्यारे ने पीठ के पीछे खड़े होकर चाकू से वार किया था। हत्यारा महज तीन से चार सेकेंड में वारदात को अंजाम देकर मौके से हट गया।
दिमाग को खून पहुंचाने वाली मुख्य नस कट जाने से सात साल के बालक की सांसें एक से डेढ़ मिनट में ही थम गई होंगी। प्रद्युम्न के गले से मिले चाकू के वार के निशान से कुछ इसी तरह का क्राइम सीन बनता है।
मालूम हो कि प्रद्युम्न हत्याकांड में पुलिस ने बस कंडक्टर अशोक को और सीबीआई ने इसी स्कूल के कक्षा 11वीं के छात्र को हिरासत में लिया है। सीबीआई ने क्राइम सीन रिक्रिएट भी किया था।
छात्र प्रद्युम्न की 8 सितंबर को गले में चाकू से वार कर हत्या कर दी गई थी। हत्यारे ने प्रद्युमभन के गले में दाहिने कान के नीचे चाकू से दो वार किए थे। यह वार प्रद्युम्न के पीछे से किए गए थे।
दोनों आरोपी दाएं हाथ से काम करते हैं
दरअसल हत्याकांड के दोनों आरोपी दाएं हाथ से काम करते हैं। दाएं हाथ में चाकू थाम कर यदि प्रद्युम्न पर सामने से वार किया जाता तो घाव उसकी गर्दन में बाईं ओर होता। दूसरे, वार यदि सामने से किया जाता तो छात्र हाथ आगे कर, झुक कर या इधर-उधर होकर बचाव का प्रयास करता।
ऐसे में निशाना चूकने की संभावनाएं ज्यादा हैं और चाकू दूसरी जगह भी लग सकता था। उसकी गर्दन के अलावा शरीर पर कहीं चोट के निशान नहीं मिले। पीछे से अचानक वार किए जाने का प्रद्युम्न को पता ही नहीं था शायद इसी वजह से वह बचाव का प्रयास भी नहीं कर सका होगा। हत्यारे ने महज तीन से चार सेकेंड में दो बार चाकू घोंपा और छात्र को छोड़कर चला गया।
प्रद्युम्न की हत्या बहुत ही पेशेवराना ढंग से की गई। ऐसा लगता है कि हत्यारे ने वारदात अंजाम देने से पहले किसी को मौत के घाट उतारने के तरीकों का अध्ययन किया था। मालूम हो कि हत्यारे ने प्रद्युम्न के दाहिने कान के ठीक नीचे गले में दो बार चाकू घोंपा था।
उसके गले में एक घाव दो सेंटीमीटर लंबा और 18 सेंटीमीटर गहरा जबकि दूसरा दो सेंटीमीटर लंबा और 16 सेंटीमीटर गहरा था। बीके सिविल अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. नवीन गर्ग ने बताया कि गर्दन में कान के नीचे से मस्तिष्क को रक्त भेजने वाली मुख्य नस, कॉमन कैरोटिड ऑर्टरी (सीसीए) गुजरती है।
इंटरनेट पर आसानी से उपलब्ध हैं हत्या के तरीके
यदि यह आर्टरी कट जाए तो मस्तिष्क को रक्त आपूर्ति बंद होने की वजह से घायल व्यक्ति चंद सेकेंड में गहरी बेहोशी में चला जाता है। मुख्य आर्टरी होने की वजह से खून बहुत तेजी से बहता है और महज 60 से 90 सेकेंड के बीच व्यक्ति की मौत हो जाती है।
प्रद्युम्न के मामले में भी हत्यारे ने कॉमन कैरोटिड ऑर्टरी काटने की नीयत से कान के नीचे दो बार चाकू घोंपा, हत्यारे ने गला रेतने का प्रयास नहीं किया। इसका यह भी अर्थ लगाया जा सकता है कि हत्यारे को अच्छी तरह पता था कि सिर्फ कॉमन केरोटिड ऑर्टरी ही काटनी है।
बहुत संभव है कि हत्यारे ने प्रद्युम्न की जान लेने का यह तरीका इंटरनेट से सर्च किया हो। एक वेबसाइट में चाकू का प्रयोग कर आसानी से हत्या करने के कई ढंग बताए गए हैं। हालांकि, यह साइट पूरी जानकारी देने से पहले यह सुनिश्चित करती है कि एक्सेस करने वाले की उम्र 13 वर्ष से ज्यादा हो।
बिना लॉगइन किए जानकारी नहीं मिलती। इसके लिए व्यक्ति अपनी ईमेल आईडी से भी लॉगइन कर सकता है। बताते चलें कि प्रद्युम्न की हत्या के दोनों ही आरोपियों की उम्र 13 वर्ष से ज्यादा है।
जिस ढंग से प्रद्युम्न की हत्या की गई, इस साइट पर वह तरीका लगभग हूबहू बताया गया है। हत्याकांड की जांच कर रही सीबीआई छात्र के कंप्यूटर, मोबाइल आदि की ब्राउजिंग हिस्ट्री भी जांच रही है।