‘संजीवनी’ की तलाश में सियासी हुक्मरान, खाप की शरण में आप, कांग्रेस और शिअद भी
- 2022 में पंजाब और उत्तर प्रदेश में होने हैं विधानसभा चुनाव
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नए कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे किसान आंदोलन ने सियासी गलियारों में भी हलचल बढ़ा दी है। तमाम राजनीतिक पार्टियां आंदोलन के सहारे अपना हित साधने की कोशिश में जुटी हैं। सियासी हुक्मरानों को उम्मीद है कि आगामी चुनाव में आंदोलन के बूते ही पंजाब, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में जीत रूपी संजीवनी हासिल हो सकती है। यही वजह है कि राजधानी के सिंघु और गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों के बीच बड़ी संख्या में राजनीतिक पार्टियों के कार्यकर्ता सेवा में लगे हुए हैं। हालांकि, प्रदर्शनकारियों ने नेताओं को मंच देने से इनकार कर दिया है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियां बता रही हैं कि आंदोलन पर सियासी रंग चढ़ने लगा है। कई शीर्ष नेता तो खापों की शरण में भी चले गए हैं।
दरअसल, पंजाब और उत्तर प्रदेश में 2022 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। वहीं, हरियाणा में 2021 में पंचायत चुनाव होने हैं। इसलिए सभी पार्टियां किसान आंदोलन के बूते अपनी नैया पार लगाने की फिराक में हैं। आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल व उनकी टीम किसानों का खुलकर समर्थन कर रही है। अन्नदाताओं की हरसंभव मदद की जा रही है। वहीं, पंजाब में सत्तासीन कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व भी खुद को किसानों का हमदर्द बता रहे हैं। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और शिरोमणि अकाली दल (बादल) ने किसानों के बीच अपने कार्यकर्ताओं को भी लगा दिया है।
बृहस्पतिवार को सिंघु बॉर्डर पर पहुंचे हरियाणा और उत्तर प्रदेश के खाप चौधरियों ने कहा कि राजनीतिक लोग आंदोलन के सहारे अपनी सियासी जमीन तलाश रहे हैं। निर्वाल खाप भारत चौधरी बाबा राजवीर सिंह मुंडेट ने बताया कि आप और कांग्रेस के शीर्ष कई नेताओं ने उत्तर प्रदेश और हरियाणा की खापों से संपर्क किया है, ताकि यूपी के विधानसभा चुनाव और हरियाणा के पंचायत चुनाव में उन्हें इसका लाभ मिल सके। क्योंकि, इन दोनों राज्यों की खाप किसानों को पूर्ण समर्थन दे चुकी हैं। वहीं, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता भी आजकल गाजीपुर और चिल्ला बॉर्डर पर किसानों का हमदर्द बनते नजर आ रहे हैं।
कतई नहीं देंगे मंच
सिंघु और गाजीपुर बॉर्डर पर डटे किसानों ने एक बार फिर दोहराया कि वह किसी भी पार्टी के नेता को मंच नहीं देंगे। आंदोलन को गैर राजनीतिक रखा जाएगा। चेतावनी दी कि जब तक केंद्र सरकार नए कृषि कानूनों और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी नहीं देती है, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
आंदोलन गैर राजनीतिक रहेगा : टिकैत
भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत का कहना है कि आंदोलन संयुक्त किसान मोर्चा की अगुवाई में चल रहा है। यह पूरी तरह गैर राजनीतिक है। नेतागिरी करने वालों के लिए आंदोलन में कोई जगह नहीं है। केंद्र को किसानों की मांगें पूरी करने ही होंगी।