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कुत्तों के चक्कर में पुलिस को लगानी पड़ी दौड़
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव
Updated Sat, 05 Apr 2014 12:43 PM IST
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शायद पुलिसवालों ने भी कभी नहीं सोचा होगा कि उन्हें कुत्तों के पीछे इतनी भागदौड़ लगानी पड़ेगी। लेकिन एक एनजीओ की महिला सदस्य ने ऐसी ही शिकायत पुलिस को दी जिसके बाद बेचारे पुलिसकर्मियों को खूब दौड़ धूप लगानी पड़ी।
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आखिरकार जब उस व्यक्ति के पास पहुंचने के बाद पुलिस को सच्चाई मालूम चली तो उन्होंने शिकायतकर्त्ता महिला और व्यक्ति को आमने-सामने बैठा दिया। जिसके बाद महिला ने भी अपनी गलतफहमी मानते हुए एफआईआर रद्द करने की बात कही।
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हुआ यूं कि मेनका गांधी के एनजीओ पीपुल फॉर एनीमल्स (पीएफए) की सदस्या मीनाक्षी अवस्थी गुरूवार को सोहना से गुड़गांव आ रही थी। बादशाहपुर के पास उसने एक टैंपों में काफी संख्या में कुत्ते भरे देखा जब उसने टैंपों चालक से टैंपों रोकने का इशारा किया तो उसने टैंपों रोका नहीं।
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इस पर महिला ने ऑटो की नंबर प्लेट का फोटो खींच सीधा रजिस्ट्रेशन दफ्तर पहुंच गई। जहां उसे पता चला कि वह टैंपो सोहना के किसी अत्तर सिंह के नाम से पंजीकृत है। इसके बाद महिला ने अत्तर सिंह के नाम पर सिविल लाइन थाना में मामला दर्ज करा दिया।
पशु क्रुरता को लेकर मामला सामने आने के बाद पुलिस भी सर्तक हो गई और उन्होंने तुरंत खोजबीन शुरू कर दी। इसके बाद पुलिस ने सोहना में अत्तर सिंह ने पूछताछ की तो पता चला कि उसने बादशाहपुर के किसी जगदीश नाम के व्यक्ति को टैंपो बेच दिया था।
मामला गंभीर होता देख पुलिस की टीम बादशाहपुर स्थित जगदीश के निवास पर पहुंची। यहां पूछताछ में पता जगदीश ने मामला जानकार बताया कि यह टैंपों उसका साला सोनू चलाता है। लेकिन पुलिस को आखिर कुत्तों की जानकारी लेनी थी इसलिए उन्होंने तुरंत सोनू को पूछताछ के लिए बुलाया। जब सोनू ने बताया कि टैंपों में जो कुत्ते थे वो उसके पालतू कुत्ते और वह खुद ही उन्हें लेकर जा रहा था।
इस पर पुलिस तुरंत उसे थाना लेकर आई और शिकायतकर्त्ता महिला मीनाक्षी को आमने-सामने बैठा दिया। जब व्यक्ति ने पूरी हकीकत बताई तो पुलिस और महिला शिकायतकर्ता ने अपनी गलतफहमी मानी। महिला ने पुलिस से माफी मांगते हुए एफआईआर भी रद्द करने की बात कही। ऐसे में पूरे दिन की दौड़भाग के बाद आखिरकार पूरा मामला खुलने पर पुलिस ने भी राहत की सांस ली।