अवैध निर्माण-अतिक्रमण नहीं रुकवा रही पुलिस
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
औद्योगिक नगर में हो रहे अवैध निर्माण और अतिक्रमण को पुलिस विभाग नहीं रुकवा रहा है। पुलिस की जिम्मेदारी कानून व्यवस्था बनाने के साथ ही शहर की सूरत बिगाड़ रहे अवैध निर्माण और अतिक्रमण की सूचना हुडा या नगर निगम को देकर उसे रुकवाने की भी है। सूचना देना तो दूर अधिकतर थानों की पुलिस को यह भी नहीं पता है कि उनके क्षेत्र में कहां और कितना अवैध निर्माण या अतिक्रमण हुआ है।
शहर में अतिक्रमण और अवैध निर्माण की रोकने के लिए ‘हरियाणा अनुसूचित सड़क व प्रतिबंधित क्षेत्र अवैध निर्माण अधिनियम’ लागू है। इस कानून की धारा 12 के तहत सभी पुलिस अधिकारियों को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वह अपने क्षेत्र में होने वाले अतिक्रमण या अवैध निर्माण की जानकारी बिना देरी किए हुडा या नगर निगम के आला अधिकारी को लिखित में दें।
इस आदेश की पालना कराने के लिए अप्रैल 2013 में तत्कालीन पुलिस आयुक्त अरशिंदर चावला ने सभी बीट इंचार्ज को लिखित निर्देश जारी किए थे। इसके तहत बीट इंचार्ज को उनके इलाके में सरकारी जमीन पर होने वाले कब्जे या अतिक्रमण की शिकायत तुरंत ही डीटीपी हुडा और संयुक्त आयुक्त नगर निगम को लिखित में देनी होगी।
पुलिस अधिकारियों ने करीब सवा दो साल तक इस आदेश को गंभीरता से नहीं लिया और अपने क्षेत्र में अतिक्रमण या अवैध निर्माण की जानकारी नहीं ली। जुलाई 2015 में आरटीआई कार्यकर्ता विष्णु गोयल ने शहर में सौ से अधिक अतिक्रमण और अवैध निर्माण होने की शिकायत करते हुए तत्कालीन पुलिस आयुक्त सुभाष यादव से कार्रवाई करने की मांग की थी।
शिकायत पर पुलिस आयुक्त ने सभी थाना इंचार्ज को उनके इलाके में होने वाले अवैध निर्माण-अतिक्रमण की जानकारी एकत्र करने को कहा था। एनआईटी, एसजीएम नगर और सूरजकुंड पुलिस को छोड़ बाकी सभी थानों ने उनके इलाके में अवैध निर्माण या अतिक्रमण के शून्य होने की रिपोर्ट भेजी थी। थानों से भेजी गई रिपोर्ट में यह भी लिखा गया था कि भविष्य में होने वाले अवैध निर्माण या अतिक्रमण की सूची तैयार की जाएगी लेकिन कोई काम नहीं किया गया।
नहीं बना सकते 11.3 मीटर से ऊंची इमारत
आरटीआई कार्यकर्ता विष्णु गोयल ने बताया कि एक्ट के तहत शहर में अधिकतम 11.3 मीटर ऊंचाई तक ही इमारत का निर्माण किया जा सकता है। इस आधार पर ढाई मंजिल से अधिक ऊंची सभी इमारतें अवैध रूप से बनाई गई हैं। उनका आरोप है कि शहर में हर कहीं ऊंची ऊंची इमारतें देखी जा सकती हैं। जमाई कॉलोनी, राहुल कॉलोनी, खोरी गांव, बाईपास रोड, सेक्टर 45,46 और 48 के साथ लगती सरकारी जमीन, नहरपार, सरूरपुर, भाखरी गांव के अलावा हर थाना क्षेत्र में अवैध बस्तियां और अतिक्रमण किया गया है। उनका कहना है कि यदि पुलिस सही वक्त पर हुडा या नगर निगम को इसकी जानकारी देती तो शहर की सूरत इतनी खराब नहीं होती।
कमेटी की बैठक कब हुई पता नहीं
अवैध निर्माण को रोकने के लिए 2012 में तत्कालीन जिला उपायुक्त ने पत्रांक संख्या (22073-12एमए) के तहत संबंधित विभागों के अधिकारियों को मिलाकर 17 कमेटियां गठित की थीं। इन कमेटियों का नोडल अधिकारी सिटी मजिस्ट्रेट को बनाया गया था। थानावार बनाई गई इन कमेटियों का पदेन सचिव संबंधित थाना प्रभारी को बनाया गया। इन कमेटियों की बैठक नोडल अधिकारी (सिटी मजिस्ट्रेट) की अध्यक्षता में हर मां की पांच तारीख को निश्चित की गई है। सिटी मजिस्ट्रेट गौरव अंतिल को भी इस कमेटी के बारे में पता नहीं है। वह कहते हैं कि संभवतया यह जिम्मेदारी किसी और अधिकारी को डेलिगेट कर दी गई है।
रोजाना ढेर सारी बैठकें होती हैं उनमें अतिक्रमण या अवैध निर्माण पर भी चर्चा हो जाती है। कोई कमेटी गठित है और उसकी बैठक हर माह की पांच तारीख को होना तय है इस बारे में मुझे फिलहाल जानकारी नहीं है, मैं पता कर ही कुछ बता पाऊंगा।- गौरव अंतिल सिटी मजिस्ट्रेट
अतिक्रमण और अवैध निर्माण के लिए 2012 में बनाई गई 17 कमेटियों की जानकारी मुझे नहीं है। जिला उपायुक्त के साथ बैठक इन कमेटियों को सक्रिय कर अवैध निर्माण-अतिक्रमण पर अंकुश लगाया जाएगा। सभी थाना प्रभारियों की बैठक बुलाकर कमेटियों के बारे में जानकारी लूंगा और उनके इलाके की तीन मंजिल से ऊंची इमारतों व अतिक्रमण का ब्योरा तलब करूंगा।- हनीफ कुरैशी, पुलिस आयुक्त फरीदाबाद