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घूस लेने के जुर्म में वकील को तीन साल की कैद

Wed, 23 Jul 2014 01:40 PM IST
Updated Wed, 23 Jul 2014 01:40 PM IST
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Police lawyer goes to jail for taking bribe

दिल्ली पुलिस के एक सरकारी वकील को रिश्वत लेने के जुर्म में अदालत ने तीन साल कैद की सजा सुनाई है। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक खबर के अनुसार इस सरकारी अधिवक्ता पर आरोप है कि इसने एक अपहरण के मामले में दूसरे पक्ष के हित में अपनी राय रखने के लिए उस पक्ष के वकील से रिश्वत ली थी।

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इस मामले में कोई भी उदार रवैया दिखाने से मना करते हुए एक ट्रायल कोर्ट की स्पेशल सीबीआई जज पूनम भांबा ने कहा कि, आरोपी ने इस तरह की गतिविधि में शामिल होकर आपराधिक न्याय व्यवस्था के विश्वास को तोड़ा है। समाज को एक कड़ा संदेश देने के लिए यह सजा जरूरी है क्योंकि अधिकारियों के ऐसे बरताव के कारण ही आम जनता का विश्वास न्याय व्यवस्था से उठ जाता है।
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अदालत ने सहायक सरकारी अधिवक्ता (एपीपी) 48 वर्षीय दीपक कुमार बरुआ को प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट फॉर क्रिमिनल मिसकंडक्ट एंड टेकिंग इललीगल ग्रैटीफिकेशन के सेक्शन 7 और 13(1)(डी) के तहत दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।

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सीबीआई की मदद से बरुआ ने गुनाह क‌िया कबूल

Police lawyer goes to jail for taking bribe

बरुआ जो साल 2007 में प‌टियाला कोर्ट में एपीपी के पद पर नियुक्त थे, उन्होंने एक वकील सुचिस्मिता भूयन से उन्हें दिए गए एक केस को उसके पक्ष में करने के लिए पैसे मांगे थे।

अदालत ने इस मामले में कहा कि आपराधिक न्याय व्यवस्था का हिस्सा होने के नाते उनका फर्ज बनता था कि वो सच तक पहुंचने में मदद करें। ल‌ेकिन उन्होंने न्याय व्यवस्था का भरोसा ही तोड़ दिया।

भूयन ने मार्च 2007 में सीबीआई के पास एक केस रजिस्टर कराया था जिससे बाद सीबीआई के बरुआ को अपने जाल में फंसा ‌ल‌िया और बरुआ ने घूस लेने का अपना गुनाह कबूल कर लिया।

घूस ना देने पर दी थी धमकी

Police lawyer goes to jail for taking bribe

जानकारी के अनुसार बरुआ ने भूयन को धमकी दी थी (जो एक अपहरण के मामले में आरोपी थी) कि अगर वो उसे 10000 रुपए नहीं देती है तो बरुआ उसके खिलाफ चार्जशीट फाइल कर देंगे। इस पर सीबीआई ने अदालत को बताया कि बरुआ के धमकी देने के बावजूद जांच अधिकारी ने एक क्लोजर रिपोर्ट फाइल कर दी जिसमें लिखा था कि भूयन के खिलाफ कोई सबूत नहीं है।

अपनी कार्यवाही में अदालत ने यह भी बात पाई कि बरुआ अपहरण केस में बार-बार अदालत को स्थगित कराकर केस में देरी के‌ लिए भी जिम्मेदार हैं।

भ्रष्टाचार के मामलों में सख्त सजा की वकालत करते हुए अदालत ने कहा कि लोगों के बीच ये कठोर संदेश जाने की जरूरत है‌ कि भ्रष्टाचार कोई मामूली जुर्म नहीं है। कोई भी जो गलत काम करते पकड़ा जाएगा उसे सजा मिलकर ही रहेगी।

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