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कोरोना काल में बदला पुलिस का पहनावा, फर्ज की जंग में जान भी गंवाई
Sat, 26 Sep 2020 06:00 AM IST
दुष्यंत शर्मा
राजीव कुमार, नई दिल्ली
राजीव कुमार, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 26 Sep 2020 06:00 AM IST
सार
- पीपीई किट पहनकर ही घटनास्थल पर पहुंचते हैं पुलिसकर्मी
- महकमे में बढ़ते संक्रमण के बाद किट को कर दिया अनिवार्य
- 3400 हो चुके हैं संक्रमित, 15 की मौत, 200 का चल रहा इलाज
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पीपीई किट में पुलिस...
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कोविड-19 ने दिल्ली में पुलिस का पहनावा भी बदल दिया है। खाकी से पहचानी जाने वाली पुलिस इस समय पीपीई किट पहने नजर आती है। हादसों की जगह तो पुलिसकर्मी अमूमन किट में ही होते हैं। महकमे की कोशिश है कि पहली श्रेणी में खड़े कोरोना योद्धाओं को संक्रमण से बचाया जाए। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि पुलिसकर्मियों को यह नहीं पता होता कि हादसे का शिकार कोरोना संक्रमित हैं या नहीं? लिहाजा, संक्रमण से बचने के लिए पुलिस हर स्तर पर सतर्कता बरत रही है।
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पुलिसकर्मियों को अक्सर ऐसी जगहों पर जाना होता है, जहां बगैर लोगों के संपर्क में आए जांच पूरी नहीं हो सकती है। ऐसे मामलों में खासतौर से, जहां हादसों की कॉल पर पुलिस जाती है। सड़क हादसों, ट्रेन से कटने व लावारिस शव मिलने पर मौके पर जाने वाले कर्मी बगैर घायल या मृतक के संपर्क में आए जांच को आगे नहीं बढ़ा सकते।
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इन मामलों में पुलिसकर्मी इस बात से बेखबर होते हैं कि मृतक कोरोना संक्रमित था या नहीं? कोरोना टेस्ट होने के बाद ही स्थिति साफ हो पाती है। पुलिस को अपनी जांच तुरत आगे बढ़ानी होती है। मौजूदा वक्त में यह काम बेहद चुनौती भरा है। पुलिस ने इसका समाधान पीपीई किट में तलाश किया है। हादसों पर जाने वाले कर्मियों के लिए अनिवार्य कर दिया गया है कि वह पीपीई किट में ही मौके पर जाएं।
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संक्रमित होने के साथ जान भी है गंवाई
कोरोना काल में पुलिस फ्रंट लाइन पर काम कर रही है। बीते करीब छह महीने में करीब 3400 पुलिसकर्मी संक्रमित हुए हैं। इनमें से करीब १५ की मौत हो गई है और करीब 200 का इलाज चल रहा है। अधिकारियों का कहना है कि इससे पुलिस के मनोबल पर असर पड़ रहा था। पुलिस ने इससे बचने के लिए पीपीई किट का रास्ता निकाला है।
स्पेशल टीम गठित, फील्ड में कर रही काम
किसी भी थाना क्षेत्र में लावारिस लाश मिलने या फिर किसी के ट्रेन से कटने की जानकारी मिलते ही थाने में मौजूद जांच अधिकारी व उसके साथ मौजूद तीन अन्य सहयोगी वहां जाने के लिए खुद को तैयार करते हैं। चारों पीपीई किट पहनकर मौके पर पहुंचते हैं और जांच प्रक्रिया में जुट जाते हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हादसों में मरने वाले मामलों में दिक्कत का सामना करना पड़ता है।
क्योंकि, शव क्षत-विक्षत हालत में होने खून बिखरे होने से संक्रमित होने का खतरा रहता है। ऐसे में सावधानी से काम करना होता है। पुलिसकर्मी अपने साथ मौके पर एक विशेष एंबुलेंस को भी ले जाते हैं, जिससे शव को अस्पताल पहुंचाया जा सके। एंबुलेंस का ड्राइवर भी पीपीई किट पहनकर मौके पर जाता है।
कोरोना महामारी से बचने के लिए स्पेशल टीम गठित की गई है, जो कोविड के नियमों व दिशा निर्देशों का पालन कर बेहतर काम कर रही है।
- हरेंद्र कुमार सिंह, पुलिस उपायुक्त, रेलवे
ऐसे सभी मामलों में हम सतर्कता बरत रहे हैं, जहां संक्रमण का खतरा है। फील्ड में जाने वाले पुलिसकर्मियों को कोरोना से बचाव की आवश्यक किट मुहैया कराई जा रही है। कोशिश जवानों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
- संजय भाटिया, पुलिस आयुक्त, मध्य जिला