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Kunal Sharma Murder Case: छह दिन बाद भी कुणाल के कातिलों तक नहीं पहुंच सकी पुलिस, परिजनों में आक्रोश

Mon, 06 May 2024 10:18 PM IST
आकाश दुबे माई सिटी रिपोर्टर, ग्रेटर नोएडा
माई सिटी रिपोर्टर, ग्रेटर नोएडा Published by: आकाश दुबे Updated Mon, 06 May 2024 10:18 PM IST
सार

पुलिस की कार्यशैली से कुणाल के परिजन और ग्रामीण भी संतुष्ट नहीं हैं। खुलासे के लिए उत्तर प्रदेश विशेष कार्य बल (एसटीएफ) को भी लगा दिया गया है।

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Police could not reach Kunal s murderers even after six days
Kunal murder case - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ढाबा संचालक कृष्ण कुमार शर्मा के 15 वर्षीय बेटे कुणाल शर्मा की अपहरण के बाद हत्या के मामले में छह दिन बाद भी पुलिस हत्यारों तक नहीं पहुंच पाई है। हालांकि कुछ लोगों को हिरासत में लिया है, लेकिन उससे भी कुछ हासिल नहीं हुआ है। दूसरी ओर पुलिस की कार्यशैली से कुणाल के परिजन और ग्रामीण भी संतुष्ट नहीं हैं। रविवार को कुणाल का शव बुलंदशहर की नहर से मिलने के बाद थाना प्रभारी पर कार्रवाई की गई, लेकिन अधिकारियों की जवाबदेही पर कोई प्रतिक्रिया नहीं है।

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घटना के बाद पुलिस ने कुणाल की तलाश के लिए पांच टीमों को लगाया था। खुलासे के लिए उत्तर प्रदेश विशेष कार्य बल (एसटीएफ) को भी लगा दिया गया। पुलिस ने कृष्ण कुमार शर्मा के कुछ रिश्तेदारों को भी हिरासत में लिया है। लगातार पूछताछ चल रही है, इसके बाद भी कोई नतीजा नहीं निकला है। इस मामले में पुलिस की नाकामी को लेकर थाना बीटा-2 के प्रभारी मुनेंद्र कुमार सिंह को लाइन हाजिर कर दिया गया। जबकि एसीपी सुशील गंगा प्रसाद को जवाब तलब किया गया है। 

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इस सनसनीखेज वारदात में उन्होंने क्या किया? परिजनों व ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस के बड़े अधिकारियों की कोई भूमिका तय नहीं की। यह भी कहा जा रहा है कि इस अपहरण और हत्याकांड को लेकर जोन के एक अधिकारी की भूमिका संदिग्ध है। यह अधिकारी घटना के बाद लगातार लीपापोती करने और घटना को हल्का प्रदर्शित करने के काम में लगे रहे। ग्रामीणों का कहना है कि पहले भी कासना में हुए सुखपाल हत्याकांड में इन अधिकारी की भूमिका विवादित रही थी। इसके बाद भी इन अधिकारी पर विभाग की ओर से कोई सख्ती नहीं हुई थी। एक मई को दोपहर 1.45 बजे रबूपुरा के गांव म्याना निवासी कृष्ण कुमार शर्मा के बेटे कुणाल का नट मडैया के सीएनजी पंप के पास स्थित शिवा ढाबे से कार सवार लोगों ने अपहरण कर लिया था। इसमें एक महिला भी शामिल थी। यह घटना सीसीटीवी में कैद हो गई थी।

हर महीने एक अपहरण, लापरवाही पर लापरवाही बरती पुलिस ने
पिछले तीन महीने में ग्रेटर नोएडा में अपहरण के बाद हत्या की तीन घटनाएं हुई हैं। तीनों ही वारदात में थाना पुलिस, अपहरण किए गए किशोरों को नहीं बचा सकी। ऐेसे में कमिश्नरेट पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाना स्वाभाविक है।

इस वर्ष की शुरुआत में 30 जनवरी को बिलासपुर के रहने वाले किराना व्यापारी के बेटे वैभव का वहीं के रहने वाले दो युवकों ने अपहरण कर लिया। वैभव के परिजन पुलिस से गुहार लगाते रहे, लेकिन पुलिस ने सक्रियता नहीं दिखाई। बल्कि पुलिस आरोपियों के उस झांसे में आ गई, जिसमें वैभव के मोबाइल से आरोपियों ने जयपुर का फोटो सोशल मीडिया पर साझा किया। पुलिस ने कहा घूमने गया है आ जाएगा। जबकि उसकी बहन ने शक जताया था कि वैभव पढ़ा लिखा था जयपुर की स्पेलिंग गलत कैसे लिख सकता है? बाद में यही शक सही साबित हुआ। आरोपियों ने ही वह पोस्ट की थी। अपहरण के 11 दिन बाद पास की नहर में वैभव का शव मिला था।

फरवरी महीने में भी छह करोड़ की फिरौती के लिए गजरौला के निवासी और स्थानीय यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे बीबीए के छात्र यश मित्तल की अपहरण के बाद हत्या कर दी गई। इस मामले में भी पुलिस जिंदगी बचाने में नाकाम रही। ताजा मामला कुणाल का है। कुणाल की जिंदगी बचाने में भी पुलिस नाकाम ही रही।

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