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Delhi: 'आपके बेटे को अरेस्ट कर लिया..खाते में रुपये डाल दो', पुलिस अधिकारी बन लोगों से करते ठगी, पांच गिरफ्तार
Fri, 12 Apr 2024 07:38 PM IST
श्याम जी.
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: श्याम जी.
Updated Fri, 12 Apr 2024 07:38 PM IST
सार
खुद को पुलिस अधिकारी बताकर ठगी करने वाले गैंग का खुलासा किया है। पुलिस ने इस गैंग में शामिल पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पांच सदस्यों को भोपाल मध्य प्रदेश से पकड़ा है।
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Arrest demo
- फोटो : istock
विस्तार
रोहिणी जिला साइबर सेल ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर रिश्तेदारों की गिरफ्तारी की धमकी देकर ठगी करने वाले गैंग का खुलासा किया है। पुलिस ने गैंग के पांच सदस्यों को भोपाल मध्य प्रदेश से गिरफ्तार किया है। सभी जालसाजों के लिए अपना बैंक खाता और सिम मुहैया करवाते थे। पुलिस ने इनके कब्जे से ठगी में इस्तेमाल चार मोबाइल फोन, 41 सिम, 18 बैंक खातों के पासबुक और दस्तावेज और दस डेबिट कार्ड जब्त किए हैं।
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गिरफ्तार आरोपियों की पहचान भोपाल मध्य प्रदेश निवासी विश्वजीत गिरी, सुधीर पाल, रवि कुशवाह, कुंजी लाल अहिरवार और माया सिंह के रूप में हुई है। रोहिणी साइबर सेल ने दीपक कुमार गुप्ता ने ठगी की शिकायत की। उन्होंने बताया कि उनके मोबाइल पर एक कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को सदर थाने का पुलिस अधिकारी बताया। उसने बताया कि उनका बेटा और उसके तीन दोस्त उनके कब्जे में हैं। उसने बेटे के खिलाफ मामला दर्ज करने और उनकी गिरफ्तारी की धमकी दी।
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पीड़ित ने अपने बेटे से बात करवाने के लिए कहा। दूसरी तरफ से उसके बेटे जैसे आवाज आई। आरोपी ने उन्हें छोड़ने के एवज में ऑनलाइन 70 हजार रुपये बैंक खाते में डालने के लिए कहा। बेटे के रिहाई के लिए पीड़ित ने आरोपी के दिए बैंक खाते में पैसे डाल दिए। बाद में शिकायतकर्ता को पता चला कि उसके बेटे को किसी ने हिरासत में नहीं लिया था। ठगी का अहसास होने के बाद उन्होंने एनसीआरपी पोर्टल पर इसकी शिकायत की। बाद में रोहिणी साइबर सेल में शिकायत आने पर अधिकारियों ने शिकायतकर्ता के बयान पर ठगी का मामला दर्ज कर लिया।
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निरीक्षक चैतन्य अभिजीत के नेतृत्व में पुलिस टीम ने उन बैंक खातों की जांच की, जिसमें पैसे ट्रांसफर किए गए थे। जांच में पता चला कि पैसा भोपाल के बैंक खाते में डाले गए हैं। तकनीकी जांच पड़ताल से आरोपियों का लोकेशन भोपाल मध्य प्रदेश में पाया गया। इसके बाद साइबर टीम को तुरंत भोपाल भेजा गया, जहां गुप्त सूचना पर पुलिस ने विश्वजीत गिरी को गिरफ्तार किया। पूछताछ करने पर आरोपी ने बताया कि वह पीड़ित के खाते से ठगी गई रकम प्राप्त करने के लिए भोपाल में बैंक खातों की व्यवस्था करता था।
वह निम्न वर्ग के लोगों को बैंक खाते खोलने के लिए कुछ पैसे के बदले अपने दस्तावेज़ उपलब्ध कराने का लालच देता था। वह बिहार में रहने वाले अपने साथियों के साथ ठगी को अंजाम देता था। गैंग हर दिन धोखाधड़ी के लगभग दो-तीन लाख रुपये को अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करता था। पुलिस ने विश्वजीत गिरी के निशानदेही पर चार उन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया, जो ठगी करने वालों को अपना बैंक खाता और सिम कार्ड मुहैया करवाते थे। पुलिस गैंग के सरगना को पकड़ने के लिए उनके संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है।